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१० वर्ष पहिले छोरा बिते, अहिले छोरी इनिसा – Online Khabar

१० वर्ष पहले छोरा खोया, अब बेटी इनिसा – पीड़ादायक कहानी

समाचार सारांश

संपादकीयरूपमा समीक्षा किया गया।

  • सुर्खेत में १६ वर्षीय इनिसा बलात्कार के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से निधन हो गईं और पुलिस ने चार नाबालकों को गिरफ्तार किया है।
  • इनिसा के पिता इन्द्रबहादुर ने १० वर्ष पहले ४ वर्षीय बेटे को खोया था और बेटी के बलात्कार और हत्या की घटना ने परिवार को शोक में डाल दिया है।
  • पुलिस वैज्ञानिक जांच आगे बढ़ा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जबरदस्ती करणी के कारण मौत की पुष्टि की है।

३ चैत्र, सुर्खेत। सुर्खेत के वीरेन्द्रनगर-१ में रेडियो नेपाल के पास एक नया एक-मंजिला घर है। इस घर का रंग-रोगन और फिनिशिंग अभी अभी पूरी हुई है। इन्द्रबहादुर विक ने दुबई की तेज धूप में पसीना बहाकर जो यह घर बनाया है, वह सिर्फ ईंट-सीमेंट की संरचना नहीं है, बल्कि यह उनकी बेटी इनिसा का ‘डॉक्टर’ बनने का सपना है। परंतु यह घर दोबारा संतान का दुःख उठाने का स्थान बन गया है। जहां खुशी के रंग बिखेरने थे, वहां अब केवल शोक का सागर व्याप्त है।

चार वर्षीय पुत्र इसान को खो चुके इन्द्रबहादुर और उनकी पत्नी तिला ने १० साल बाद अपनी १६ वर्षीय बेटी इनिसा को भी खो दिया। २०७२ साल में पुत्र भक्तपुर में मृत पाए गए थे, वहीं २०८२ साल में बेटी सुर्खेत अस्पताल में मृतावस्था में देखी गई।

‘मेरी बेटी पढ़ाई में बेहद मेहनती थी, बचपन से ही वह डॉक्टर बनने का सपना देखती थी,’ इन्द्रबहादुर भावुक होकर कहते हैं, ‘उनकी खुशी के लिए मैं खाड़ी में पसीना बहाता था, पर आज मेरे कमाई से बने इस घर में वह नहीं है।’

२३ तारीख की सुबह वीरेन्द्रनगर के जनजागरण सामुदायिक वन में इनिसा बेहोशी की स्थिति में मिली थीं। अस्पताल पहुंचाते समय बहुत देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बलात्कार के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से मौत की पुष्टि हुई है।

इन्द्रबहादुर के लिए यह पीड़ा नई नहीं है। ठीक १० साल पहले, २०७२ वैशाख ३० को ४ साल के पुत्र इसान को भक्तपुर के सिद्धि अस्पताल के ICU में खो दिया था। उसे तीन दिन तक कड़ी तेज बुखार ने जकड़ रखा था। उस समय वे सेना के कमांडो ट्रेनिंग में थे।

‘जब मेरा बेटा चला गया, तो मैंने भगवान से प्रार्थना की थी कि फिर ऐसा दुःख न हो,’ वे रोते हुए कहते हैं, ‘लेकिन भगवान भी बेरहम निकले, अब मुझे फिर बेटी का शव देखना पड़ा।’

बेटी से अंतिम संवाद

नेपाली सेना से अवकाश पाने के बाद इन्द्रबहादुर विश्राम कर सकते थे, लेकिन बेटी इनिसा के सपने को पूरा करने के लिए उन्हें दुबई जाना पड़ा। १६ साल की बेटी की आंखों में वे डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। लेकिन सेना की पेंशन इससे संभव नहीं थी। इसलिए ६ साल पहले वे रोजगार के लिए दुबई गए थे।

फागुन २२ की शाम दुबई से इन्द्रबहादुर का बेटी के साथ वीडियो कॉल हुआ। पढ़ाई और व्यवहार की बातें हुईं। लेकिन अगले दिन मोबाइल पर उन्हें कई संदेश और मिस्ड कॉल्स मिले। दूर देश में रहने वाले भाई ने बताया, ‘इनिसा अब इस दुनिया में नहीं है।’

इन्द्रबहादुर कहते हैं, ‘यह खबर सुनते ही मेरा शरीर कांप उठा, ऐसा लगा मानो दिल छोड़ दिया हो।’

२४ तारीख को वे दुबई से नेपाल लौटने की कोशिश करने लगे लेकिन मध्यपूर्व के संघर्ष के कारण हवाई अड्डा बंद था। दो दिन हवाई अड्डे पर गुजारने के बाद वे दूसरे शहर के हवाई अड्डे से तीन दिन बाद नेपाल लौटे। २७ तारीख की रात घर पहुंचे और २८ तारीख की सुबह घटनास्थल पर पहुंच कर बेटी का शव देखा और पुलिस से जांच की जानकारी ली।

इनिसा के पिता इन्द्रबहादुर

दिनभर पुलिस, मीडिया, अधिकारकर्मियों और विभिन्न संगठनों से घिरे इन्द्रबहादुर शाम को घर लौटते समय टूट जाते हैं। मिलने-जुलने के दौरान भी उन्हें अकेलापन महसूस होता है। बेटी के बचपन की यादें उन्हें सताती हैं।

उनकी आंखें हमेशा इनिसा को ढूंढती हैं – कमरे, रसोई, छत, आंगन, घर के सामने के रास्ते तक। ‘कभी-कभी ऐसा लगता है कि वह अचानक पीछे से आकर पूछेगी, बाबा कितने बजे आए?’ वे गहरे दर्द के साथ कहते हैं।

अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए इन्द्रबहादुर सुरक्षा गार्ड का काम करने दुबई गए थे। उनकी पत्नी तिला वीरेन्द्रनगर में बेटी को पढ़ाने का काम शुरू कर चुकी थीं। इनिसा पढ़ाई में तेज थी और बचपन से डॉक्टर बनने का सपना देखती थी, वह कक्षा ११ में विज्ञान पढ़ रही थी।

‘पेंशन से बेटी का सपना पूरा नहीं हो सका, इसलिए दुबई में सुरक्षित गार्ड की नौकरी करने गया,’ उन्होंने बताया।

इनिसा मिलनसार और समझदार थी, शिक्षक इन्द्रप्रसाद चापागाईं कहते हैं, ‘वह शिक्षकों और सहपाठियों के साथ सद्भाव रखती थी और कभी कोई शिकायत नहीं आयी।’

अब तक उसके पास मोबाइल नहीं था, लेकिन दो महीने पहले इन्द्रबहादुर ने उसे फोन और आईपैड दोनों तोहफे में दिए थे। इनिसा फोन नहीं, आईपैड चाहती थी ताकि पढ़ाई आसान हो सके।

इन्द्रबहादुर के अनुसार, इनिसा बाहरी दुनिया की फिजूल चीजें नहीं समझती थी, साहित्य या खेलकूद के लिए। वह केवल घर और स्कूल में केंद्रित थी।

समाज की दिर्घ बीमारी

विछिप्त मां और घटना स्थल

अपने बच्चों को अनपढ़ाई, अभाव, जातीय भेदभाव और उत्पीड़न से बचाना चाहते थे इन्द्रबहादुर। ‘हमने जो दुःखों का सामना किया, वह हमारे बच्चों को न हो इसलिए मैंने खाड़ी में पसीना बहाया,’ वे याद करते हैं, ‘हमारा बड़ा सपना था लेकिन नियति ने उसे मिटा दिया।’

उन्होंने गरीबी, जातीय भेदभाव और आर्थिक अभाव का सामना किया, लेकिन सामाजिक पितृसत्तात्मक और हिंसक सोच के आगे पराजय स्वीकार करनी पड़ी।

‘हमने अपनी बेटी को हमेशा खुश रखा, कभी भी कोई अभाव महसूस नहीं होने दिया। पर हमने इस समाज की विकृत और कुपित तस्वीर दिखाना भूल गए,’ उन्होंने पछतावा जताया, ‘हमें बेटी को स्पष्ट चेतावनी देनी चाहिए थी कि इस समाज में कभी भी किसी से खतरा हो सकता है।’

जांच किस स्थिति में है?

बलात्कार और हत्या के मामले में पुलिस ने २३ तारीख को एक आरोपी को घटनास्थल से गिरफ्तार किया था। २४ तारीख को तीन और नाबालकों को गिरफ्तार किया गया। चारों आरोपी १८ वर्ष से कम उम्र के हैं।

२५ तारीख को परिवार ने चारों के खिलाफ हत्या और बलात्कार से जुड़ी शिकायत दर्ज कराई। पकड़े गए १६ वर्षीय आरोपी ने बयान में कहा है कि कुंडली फोड़ने के कारण अत्याधिक रक्तस्राव से मौत हुई।

जांच की प्रगति

पुलिस वैज्ञानिक जांच कर रही है। सीआईबी टीम, पोलिग्राफ विशेषज्ञ और नेपालगंज से आए विश्लेषक जांच में सक्रिय हैं। जिला पुलिस कार्यालय के उपरीक्षक सुधीर राज शाही के अनुसार, ये टीम जल्द ही निष्कर्ष प्रस्तुत करेगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जबरदस्ती करणी के कारण संवेदनशील अंगों को हुए नुकसान और अत्यधिक रक्तस्राव से मृत्यु की पुष्टि हुई है। फॉरेंसिक और विषाणु परीक्षण प्रगति पर हैं।

न्याय की मांग

पीड़ित पक्ष न्याय और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग को लेकर पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। विभिन्न संगठन और राजनीतिक दल सक्रिय हैं।

इनिसा के पिता ने भी न्याय की मांग की है।

‘जांच में कई जगह हस्तक्षेप और तोड़-मोड़ की कोशिशें हो रही हैं,’ इन्द्रबहादुर कहते हैं, ‘जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक मैं बेटी का शव नहीं लेने आऊंगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करूंगा।’

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