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विवादित बन्यो राष्ट्रिय अपांग महासंघको महाधिवेशन

राष्ट्रिय अपांग महासंघ के महाधिवेशन में विवाद

२८ चैत, बुटवल। राष्ट्रिय अपांग महासंघ नेपाल का १०वां राष्ट्रिय महाधिवेशन विवादपूर्ण साबित हुआ है। महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामबहादुर कार्की और महासचिव सुगम भट्टराई सहित उनके पक्ष ने विधान के विपरीत और अदालत के निर्देशों की अवहेलना करते हुए जबरदस्ती चुनाव कराने के आरोप लगाते हुए चुनाव का बहिष्कार किया है। असंतुष्ट पक्ष ने महासंघ के विधान के खिलाफ वितरित सदस्य संस्थाओं की जांच की मांग की, लेकिन सुनवाई न होने पर सदस्यता वितरण और उसके आधार पर आए प्रतिनिधियों के सहभागिता में हुए महाधिवेशन को विधान के विरुद्ध बताया है।

पाटन उच्च न्यायालय ने महाधिवेशन से जुड़ी विवाद की सुनवाई के दौरान २६ चैत को आदेश दिया था कि २०८३ वैशाख ३ को दोनों पक्षों को विवाद समाधान के लिए बुलाया जाएगा। इसके बावजूद अदालत के मानहानी के रुप में महाधिवेशन और चुनाव अनधिकृत तरीके से कराए जाने का आरोप वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामबहादुर कार्की ने लगाया है। उन्होंने कहा कि महाधिवेशन प्रतिनिधियों पर पुलिस दमन किया गया और गैरकानूनी तौर पर चुनाव कराए जाने के खिलाफ कानूनी कदम उठाएंगे।

महाधिवेशन प्रतिनिधियों को प्रतारणा और जालसाजी का आरोप लगाते हुए असंतुष्ट पक्ष ने विरोध किया, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच कुछ समय के लिए झड़प हुई और कुछ प्रतिनिधियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया, ऐसा महासंग के केन्द्रीय सदस्य सावित्रा घिमिरे ने बताया। महासंघ में दो वर्षों से आर्थिक अनियमितता, असमावेशिता और नेतृत्व की निरंकुशता के खिलाफ जांच की मांग की जा रही है, लेकिन नेतृत्व ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया है, घिमिरे ने कहा।

निर्वाचन कराने के लिए गठित वरिष्ठ अधिवक्ता शालिकराम बञ्जाडे की अध्यक्षता वाली निर्वाचन समिति ने महासंघ में विवादों और पाटन उच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चुनाव कराना उचित न समझ कर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि महासंघ के अध्यक्ष देविदत्त आचार्य के पक्ष ने विवादों के बीच अचानक अधिवक्ता जोखबहादुर खत्री की अध्यक्षता में एक नई निर्वाचन समिति गठित कर बहुमत प्रतिनिधियों के बहिष्कार के बावजूद चुनाव कराने को गैरकानूनी बताया महासचिव सुगम भट्टराई ने। वहीं महासंघ के अध्यक्ष आचार्य ने बहुमत से पारित करके महाधिवेशन और चुनाव कराए जाने का दावा किया है।

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