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पाल्पा में बंद ऑक्सीजन प्लांट को फिर से चलाया गया

पाल्पा में दो साल से बंद पड़े ऑक्सीजन प्लांट की मरम्मत कर इसे पुनः चालू किया गया है। प्लांट चालू होने के बाद पाल्पा अस्पताल सहित जिले के अन्य अस्पतालों को ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति सुगम हो जाएगी। संघीय सरकार ने २०७८ जेठ में एक करोड़ ५० लाख रुपये का बजट आवंटित कर प्लांट संचालन के लिए उपकरण खरीदे थे।

दक्ष जनशक्ति के प्रबंध और मरम्मत के जरिए प्लांट को पुनः चालू किया गया है। कोविड-19 महामारी के समय संघीय सरकार ने बजट स्वीकृति दी थी तथा पाल्पा अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण किया गया था, लेकिन कुछ वर्षों से यह खराब होकर बंद पड़ा था। अब प्लांट के संचालन से ऑक्सीजन की कमी की समस्या दूर होने पर स्थानीय लोगों में खुशी है।

पहले यहां ऑक्सीजन प्लांट न होने के कारण बुटवल, भैरहवा से ऑक्सीजन लाना पड़ता था। जिले में प्लांट के संचालन से अन्य अस्पतालों के साथ-साथ सभी रोगियों के लिए सुविधा बढ़ी है, तानसेन नगरपालिका की उपाध्यक्ष प्रतिक्षा गाहा सिञ्जाली ने बताया। उन्होंने कहा कि प्लांट चालू होने के बाद न केवल पाल्पा अस्पताल के भर्ती मरीजों बल्कि लुम्बिनी मेडिकल कालेज, मिशन अस्पताल, रामपुर अस्पताल और जिले के निजी मेडिकल केंद्रों तथा क्लिनिक्स को भी ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति आसान होगी।

जिले में मासिक लगभग चार से पांच सौ ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत होती है। पाल्पा अस्पताल विकास समिति के अध्यक्ष अजयमान कर्माचार्य ने बताया कि प्लांट पर छोटे सिलेंडर की कीमत ३५० रुपये और बड़े सिलेंडर की ६५० रुपये तक हो रही है। जिले में ऑक्सीजन उत्पादन शुरू होने से अस्पतालों का परिवहन खर्च और समय भी बचेगा।

अस्पताल को सुविधायुक्त, विश्वसनीय और भरोसेमंद बनाने में ऑक्सीजन प्लांट की अहमियत है, समिति अध्यक्ष कर्माचार्य ने कहा। उन्होंने बताया, “ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी रोगी की अकस्मात मृत्यु न हो, ये हमारा मुख्य उद्देश्य है।” प्लांट चालू होने के बाद अस्पताल अगले वैशाख के दूसरे सप्ताह तक शल्य चिकित्सा सेवा शुरू करने की योजना बना रहा है, अस्पताल के कार्यवाहक मेडिकल सुपरीटेंडेंट डॉ. राजेन्द्र पौडेल ने बताया।

संघीय सरकार के अर्थ मंत्रालय ने २०७८ साल जेठ में ऑक्सीजन प्लांट संचालन के लिए १ करोड़ ५० लाख रुपये का बजट मंजूर किया था। इसी स्वीकृत राशि से उपकरण खरीदे गए और प्लांट को चालू किया गया। प्लांट के लिए अस्पताल के पास २६ लाख रुपये की लागत से भवन निर्माण भी किया गया है। कोविड काल में प्लांट कार्यशील था, लेकिन बाद में बंद हो जाने से दीर्घकालिक रोगी मुश्किल में पड़ गए थे।

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