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भृकुटीमण्डपबाट ११ करोड उठाउन नसकेपछि तातेको समाज कल्याण

भृकुटीमण्डप की भूमि से 11 करोड़ रुपये किराया वसूली में असफलता से समाज कल्याण में गर्माया माहौल

समाचार सारांश

  • समाज कल्याण परिषद ने भृकुटीमण्डप स्थित भूमि पर किराया नहीं चुकाने वाले संघ-संस्थाओं और व्यवसायी दुकानों पर सोमवार ताला लगा दिया।
  • परिषद ने 10 करोड़ 54 लाख रुपये किराया न चुकाने वाले संस्थाओं और व्यवसायियों के नाम और राशि सार्वजनिक की।
  • काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय पर सबसे अधिक 1 करोड़ 76 लाख रुपये किराया बाकी है, परिषद ने बताया।

30 चैत्र, काठमांडू। समाज कल्याण परिषद के भृकुटीमण्डप स्थित जमीन पर वर्षों से किराया न चुकाने वाले संघ-संस्था, निजी व्यवसायी की दुकानें एवं मीडिया कार्यालयों पर सोमवार को ताला लगा दिया गया।

परिषद ने किराया अनुबंध के तहत इस वर्ष के अंत तक (आज तक) बकाया किराया न देने वाले संस्थाओं और व्यवसायियों के नाम और बकाया राशि सार्वजनिक की है।

परिषद के सदस्य सचिव सरोजकुमार शर्मा के अनुसार सामाजिक संस्था, खाद्य एवं जूता दुकानें, मीडिया कार्यालय, छात्र संगठन आदि ने 10 करोड़ 54 लाख रुपये का किराया अभी तक नहीं दिया है। इससे पहले भी कई बार पत्राचार कर सूचित किया गया, बावजूद किराया भुगतान में अड़चन की जा रही है।

किराया की राशि जमा करने हेतु बार-बार दबाव बनाने पर भी वे अड़ियल बने रहे, इसलिए सोमवार को ताला लगाना पड़ा, परिषद ने स्पष्ट किया है।

21 चैत्र २०७८ को 35 दिन की मोहलत दी गई थी, इसके बाद माघ २०७८ में पत्राचार और फागुन २०७८ में 15 दिन की अतिरिक्त अवधि मिली, लेकिन इन सभी का उल्लंघन किया गया, इसी कारण ताला लगाना पड़ा, सरकार की ओर से जानकारी दी गई है।

परिषद ने 2054 साल से किराया न चुकाने वालों की सूची सार्वजनिक की है। सूची के अनुसार हरि अमात्य के नाम वाले 43 नंबर स्टॉल ने 2054 सावन से किराया नहीं चुकाया है। ऋषि धमला अध्यक्षता वाले रिपोर्टस क्लब का परिषद के प्रति 73 लाख 40 हजार 901 रुपये बकाया है।

सदस्य सचिव शर्मा के अनुसार 56 स्टालों ने किराया नहीं दिया है। इनमें से 36 स्टालों की गैरकानूनी रूप से अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरण की स्थिति में और समस्याएँ पाई गई हैं।

सोमवार को ताला लगाने गई परिषद के कर्मचारियों और कुछ व्यवसायियों के बीच विवाद भी हुआ। व्यवसायियों ने कहा कि दुकान की स्वामित्व परिवर्तन की जानकारी नहीं दी गई, और परिषद ने पुनः अनुबंध नहीं किया, जिससे किराया वसूली में समस्या आयी।

ताला लगाने वाली टीम से व्यवसायी ने शिकायत की, “दुकान की स्वामित्व परिवर्तन का विवरण अपडेट क्यों नहीं किया गया?” परिषद ने बताया कि इस समूह से 2 करोड़ 74 लाख रुपये किराया वसूली बाकी है।

भृकुटीमण्डप परिसर में 214 रोपनी जमीन में भवन, स्टाल, बूथ संचालित हैं। परिषद ने तंबू के लिए प्रति वर्ग फिट 86 रुपये और पक्के भवनों के लिए प्रति वर्ग फिट 96 रुपये किराया निर्धारित किया है।

सबसे अधिक किराया वसूलने वाले

परिषद ने बताया कि सबसे अधिक किराया न देने वाला संस्था काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय है। इसका संचालनरत 68 नंबर स्टाल का 1 करोड़ 76 लाख 70 हजार 281 रुपये किराया अभी तक बकाया है। साथ ही 34 नंबर स्टाल का भी 1 करोड़ 13 लाख 53 हजार 95 रुपये किराया बाकी है।

उपभोक्ता मञ्च नेपाल का 45 लाख 57 हजार 907 रुपये और 1 तथा 2 नंबर स्टाल सामाजिक संघसंस्थाओं से 2054 माघ 2 से किराया लिया जाना था, जिसकी अवधि 2057 माघ में खत्म हो गई थी। प्रयासों के बावजूद किराया वसूली नहीं हो सकी है।

लोकतांत्रिक शहीद और घायलों का समाज 14 लाख 61 हजार 370 रुपये किराया देलिया बाकी है, पर पांच बार पत्राचार के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। यह संगठन भी परिषद की अनुमति के बिना खाद्य दुकान किराए पर दे चुका है।

राष्ट्रीय अपांग महासंघ का 1 करोड़ 16 लाख 32 हजार 27 रुपये और बालबालिका सम्बन्धी गैरसरकारी संस्था महासंघ नेपाल का 89 लाख 90 हजार 746 रुपये किराया बाकी है।

समाज कल्याण परिषद के भवन में किराया न देने वालों में नेकपा एमाले के छात्र संगठन अनेरास्ववियु भी शामिल है। उन्होंने 60 और 61 नंबर स्टॉल किराए पर लेकर २०७७ से अब तक किराया नहीं दिया है, परिषद ने बताया।

नेपाल राष्ट्रिय मानवअधिकार संरक्षण मञ्च का 21 लाख 85 हजार 957 रुपये एवं नेपाल पत्रकार महासंघ काठमांडू शाखा का 2062 माघ 19 से 33 लाख 7 हजार 421 रुपये किराया बकाया है। पांच बार पत्राचार और सार्वजनिक सूचना के बावजूद महासंघ अड़ियल बना रहा।

सेन्थेसिस एक्जीबिशन एंड इवेंट्स का 10 लाख, मंकला श्रेष्ठ जूता दुकान का 7 लाख 46 हजार 23, टीकाराम सितौला जूता दुकान का 11 लाख 80 हजार 625, कृष्णप्रसाद लामिछाने जूता दुकान का 8 लाख 98 हजार 163, यशोदाकुमारी सेठी खाद्य दुकान का 10 लाख 59 हजार 156, हरि अमात्य खाद्य दुकान का 5 लाख 15 हजार 664 किराया बाकी है।

नारायणकुमारी निरौला खाद्य दुकान का 2 लाख 73 हजार 13, बुद्धिराम भुसाल खाद्य दुकान का 6 लाख 87 हजार 734, मंजु तिमिल्सिना खाद्य दुकान का 9 लाख 7 हजार 710, चित्रबहादुर पंडित क्षेत्री खाद्य दुकान का 2 लाख 19 हजार 567 और नेपाल फोटो पत्रकार महासंघ का 20 लाख 68 हजार किराया बकाया होने पर आज ताला लगाया गया।

समाज कल्याण परिषद के सदस्य सचिव शर्मा ने कहा कि पूर्व में राजनीतिक दलों के संरक्षण के कारण किराया नहीं लिया गया। उन्होंने कहा, “राज्य को सहारा नहीं दिया गया, राजनीतिक संरक्षण भी रहा होगा। ताला लगाने के बाद एक सप्ताह का समय दिया है किराया चुकाने के लिए।” यदि उस अवधि में नहीं चुकाया गया तो राज्य अगले कदम उठाएगा।

पुस्तकालय में ताला लगाने के दौरान…

ताला लगाने के दौरान काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय का माहौल अन्य जगहों से काफी अलग रहा। परिषद के सदस्य सचिव शर्मा के नेतृत्व में दलबल सहित पुस्तकालय में प्रवेश किया गया।

सुरक्षाकर्मियों सहित बड़ी संख्या में पुस्तकालय कक्ष में प्रवेश करने पर अध्ययनरत पाठक भयभीत और आक्रोशित हुए। विद्यालय एवं उच्च शिक्षा के लगभग दो दर्जन विद्यार्थी थे। शांतिपूर्ण माहौल में अध्ययनरत विद्यार्थियों को बड़ी टीम देख कर भयभीत महसूस हुआ और पुस्तकालय में हंगामा शुरू हो गया।

किराया वसूली हेतु सरकार के गुंडागर्दी शैली अपनाने पर कुछ पाठकों ने नाराजगी जताई। एक छात्रा ने कहा, “पढ़ाई कर रहे थे, फिर आप लोग यहाँ क्यों आ गए? गुंडागर्दी शैली में। कल परीक्षा है, पढ़ाई के समय हमें उठा कर किराया की समस्या हल होती है? क्या पाठकों को ऐसे यातना दी जाएगी? व्यवस्थापक से बात होनी चाहिए। किराया दूसरी बात है, पढ़ाई पहले है।”

पाठकों के आक्रोशित होने पर परिषद के कर्मचारी पुस्तकालय से बाहर आ गए। परिषद के सदस्य सचिव सिंह पुस्तकालय व्यवस्थापक लीला भट्टराई से किराया देने का आग्रह कर रहे थे। कुछ देर बातचीत भी हुई।

सदस्य सचिव सिंह ने व्यवस्थापक भट्टराई को चेतावनी देते हुए कहा, “मुझे मिलने न आना लेकिन मंत्री और प्रधानमंत्री कहाँ गए? ऐसा न करें।” विद्यार्थी और अन्य पाठक अध्ययनरत थे, इसलिये पाँच बजे के बाद पुस्तकालय बन्द करने की सूचना दी गई और टीम बाहर निकल गई।

माघ 8 को परिषद ने काठमाडौं उपत्यका सार्वजनिक पुस्तकालय को बकाया राशि जमा करने के लिए पत्राचार किया था। पुस्तकालय के व्यवस्थापक भट्टराई ने 75 प्रतिशत छूट दर पर किराया अनुबंध बताया और पूर्व अनुबंध के अनुसार किराया चुका रहे हैं। अब अचानक छूट से परे किराया सार्वजनिक किया गया है, उन्होंने बताया।

तस्वीरें : आर्यन धिमाल

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