
महिमानसिंह विष्ट को ६ महीने की कैद की सजा, रेसम चौधरी की गिरफ्तारी में संलिप्तता सबूतित
२२ चैत, काठमाण्डौ। जिल्ला अदालत काठमाण्डौ ने सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट को लिखित संबंधी अपराध में दोषी पाते हुए ६ महीने की कैद की सजा सुनाई है। विष्ट द्वारा जारी किए गए नकली पत्र के आधार पर नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के तत्कालीन संस्थापक नेता रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। न्यायधीश खिमानन्द भुसाल की अदालत ने उन्हें ६ महीने की कैद के साथ-साथ १० हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
पिछले वैशाख १७ को सर्वोच्च अदालत के शाखा अधिकारी महिमानसिंह विष्ट द्वारा जारी किए गए पत्र की वजह से नागरिक उन्मुक्ति पार्टी के संरक्षणकर्ता एवं पूर्व सांसद रेसम चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में विचाराधीन मामले का अंतिम निर्णय न होने के बावजूद चौधरी को दंडित करने वाला यह पत्र अनधिकृत और गैर कानूनी घोषित किए जाने पर कुछ ही घंटों के भीतर चौधरी को रिहा कर दिया गया था। इस घटना के बाद उक्त पत्र जारी करने वाले विष्ट को गिरफ्तार किया गया।
सर्वोच्च अदालत ने कारागार और पुलिस को तुरंत एक अन्य पत्र भेजकर रेसम चौधरी की रिहाई की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की।