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प्राकृतिक स्रोतों की रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र विकसित करने का निर्णय

अंतर सरकारी वित्त परिषद् और विषयगत समितियों की बैठक में प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र लागू करने का निर्णय किया गया है। इसके साथ ही, वित्तीय संघीयता से संबंधित कानूनों के संशोधन का मसौदा और बजट अनुशासन से जुड़े कानूनों का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया अर्थ मंत्रालय द्वारा आगे बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है।

बैठक में संघीय बजट वृद्धि के अनुपात में वित्तीय समन्वय अनुदान बढ़ाने, सशर्त अनुदान को क्रमिक रूप से घटाने और राजस्व चुहावट नियंत्रण में तीनों स्तर की सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करने का भी निर्णय किया गया है। यह निर्णय ३ वैशाख को काठमांडू में हुई बैठक में लिया गया है। प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना सार्वजनिक की गई है।

गुरुवार को सम्पन्न अंतर सरकारी वित्त परिषद् और विषयगत समितियों की बैठक में इस उद्देश्य के लिए नए सूत्र लागू करने का निर्णय लिया गया। निर्णय में उल्लेख है, ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग की सिफारिश के साथ विद्युत, पर्वतारोहण, वन और खनन क्षेत्रों की रॉयल्टी में स्थानीय तह की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए नए सूत्र लागू किए जाएंगे।’

बैठक ने वित्तीय हस्तांतरण और अनुदान प्रणाली में सुधार करते हुए संघीय बजट वृद्धि के अनुपात में वित्तीय समानीकरण अनुदान बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। संघ और प्रदेश सरकार से मिलने वाले सशर्त अनुदान को क्रमिक रूप से घटाने की नीति अपनाने का निर्णय लिया गया। राजस्व चुहावट नियंत्रण के लिए तीनों स्तरों की सरकारों के बीच समन्वय स्थापित करना भी निर्णय में शामिल किया गया है। आंतरिक स्रोतों के परिचालन को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक स्तर की सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे अपने आर्थिक वर्ष के भीतर ‘राजस्व संकलन और चुहावट नियंत्रण सुधार कार्ययोजना’ तैयार कर लागू करें। यह बैठक अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में सातों प्रदेश के आर्थिक मामिला तथा योजना मंत्री, परिषद के पदेन और विशेषज्ञ सदस्य, राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय प्राकृतिक स्रोत तथा वित्त आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष, अर्थ सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, नेपाल राष्ट्र बैंक के डिप्टी गवर्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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