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सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती का मकसद क्या है?

कुछ दिन पहले पाकिस्तान के लड़ाकू विमान और सैन्य बल सऊदी अरब पहुँचे हैं। यह तैनाती दोनों देशों के बीच पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते का हिस्सा मानी जाती है। इस समझौते के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है तो दूसरा देश सहायता करेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान ईरान-अमेरिका वार्ता का मध्यस्थता कर रहा है। वार्ता का उद्देश्य ईरान युद्ध को समाप्त करने का रास्ता निकालना है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तानी सेना की तैनाती को संयुक्त रक्षा सहयोग को मजबूत करना और क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान देना बताया है।

पाकिस्तान के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि सऊदी अरब पहुंचे पाकिस्तानी सैनिक ‘किसी पर हमला करने के लिए’ नहीं हैं। इस कदम ने कई सवाल खड़े किए हैं, खासकर खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा गारंटी के भविष्य पर इसके प्रभाव को लेकर। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के महत्वपूर्ण तेल खदानों और नागरिक सुविधाओं पर ड्रोन तथा बैलिस्टिक क्षेप्यास्त्रों से हमले किए हैं, जिससे अमेरिका द्वारा थोपे गए युद्ध की कीमत इन देशों को चुकानी पड़ रही है, और इससे असंतोष बढ़ा है।

सऊदी सुरक्षा एवं रणनीति विशेषज्ञ हसन अल-शहरी ने कहा है कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी वायुसेना की तैनाती यह दिखाती है कि सऊदी अपनी सुरक्षा गारंटी में विविधता लाना चाहता है। उन्होंने इसे एक स्मार्ट कदम बताया, जिसका मतलब है अमेरिका के साथ साझेदारी बनाए रखना तथा पाकिस्तान के साथ मिलकर एक अलग समांतर सुरक्षा कवच बनाना। 2015 में यमन युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने पाकिस्तान से सैन्य सहयोग मांगा था, लेकिन तब पाकिस्तान की संसद ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था।

अल-शहरी के अनुसार, आज की स्थिति अलग है क्योंकि अब दोनों देशों के बीच औपचारिक रक्षा समझौता मौजूद है। इस बीच, डॉ. मुस्तफा शलाश ने कहा है कि सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती अधिकतर प्रतीकात्मक है। यह पाकिस्तान की रक्षा प्रतिबद्धता और उसके सहयोगियों के प्रति निष्ठा का संदेश है। इस तैनाती से सऊदी अरब को अन्य सहयोगियों को भी अपने साथ जोड़ने की क्षमता का प्रदर्शन होता है।

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