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कवयित्रि शर्मा की ‘पोइटिक डायस्पोरा’ कविता संग्रह पर समीक्षा

कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी द्वारा लिखित कविता संग्रह ‘पोइटिक डायस्पोरा’ की समीक्षा ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित की गई। प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविता की शब्दावली को विचारशील और लेखिका की शब्दों के साथ खेलने की क्षमता को सशक्त बताया। अनुशा ने परिवार से दूर रहने के दौरान अनुभव किए गए भावनाओं को कविताओं में समेकित किया है और शिव भगवान के प्रति गहरा भक्ति भाव भी व्यक्त किया है।

काठमांडू। कवयित्री अनुशा शर्मा सुवेदी की कविता कृति ‘पोइटिक डायस्पोरा’ पर चर्चा हुई। ललितपुर के हात्तिवन में आयोजित विशेष समारोह में इस कृति की समीक्षा की गई। प्रमुख अतिथि प्रोफेसर अरुण गुप्ता ने कविताओं की शब्दावली को अत्यंत विचारशील बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा में लिखी 130 कविताएँ बेहद प्रभावशाली हैं। लेखिका की किसी विषय को पकड़कर शब्दों के साथ खेलने की क्षमता और शब्दकल्पना शक्ति बहुत मजबूत है।

इसी प्रकार कवि समीक्षक केशव सिग्देल ने अनुशा की कविताओं को उच्च स्तर का बताया। उन्होंने कहा, ‘शब्द-शब्द में गहरे अर्थों को सुंदर कलाकृति में पिरोया गया है। जटिल शैली पाठक को बांधकर रखने में असमर्थ होती है। कविताओं में भक्तिभाव प्रमुख है। कविताओं को पढ़ते हुए कवि की मनोस्वतंत्रता की भावना स्पष्ट झलकती है।’ समीक्षक महेश पौडेल ने अनुशा की कविताओं में जीवन और संसार को देखने की दृष्टि होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इनमें ध्यान करने की क्षमता विद्यमान है।

कवि सरला केसी ने भी अनुशा की कविताओं में गहरा भाव देखा। उन्होंने कहा, ‘जब मैं उनकी कविताएँ पढ़ती हूँ तो ऐसा लगता है जैसे मैं किसी ठंडी छतरी के नीचे बैठी हूँ। शब्दों में शक्ति और भावों में प्रभाव होता है। भावनात्मक संदेश में पाठक को बांधने की योग्यता कविताओं में झलकती है।’ कवि लेखक राजीव श्रेष्ठ ने अनुशा की कविताओं में जीवन अनुभव की झलक पाई। उन्होंने कहा, ‘उनकी कविताएँ उनके जीवन के अनुभवों का प्रतिबिंब हैं। मैं उनके साथ निकटता से काम करता आ रहा हूँ इसीलिए उन्हें जानता हूँ। वह आध्यात्मिक व्यक्ति हैं। शिव भक्ति में उन्हें चरम आनंद प्राप्त होता है। इसलिए उनकी कविताओं में आध्यात्मिक रस भी प्रबल है।’

प्रोफेसर गुप्ता ने बताया कि स्वयं को पहचानने के बाद महिला कैसे समाज में सशक्त भूमिका निभा सकती है, यह संदेश अनुशा की कविताओं में विद्यमान है। उन्होंने कहा कि कविताएँ पढ़ते समय आध्यात्मिक भाव के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना की झलक भी मिलती है। पत्रकार, कवि एवं लेखक दीपक सापकोटा ने अनुशा की कुछ कविताओं का पाठ किया। पत्रकार एवं साहित्यकार राज सरगम ने सहजकर्ता की भूमिका निभाते हुए अनुशा के साथ कृति पर संवाद किया।

इस अवसर पर अनुशा ने बताया कि उन्होंने उन बातों को कविताओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया जिनको वे शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा, ‘मैंने विभिन्न कारणों से परिवार से दूर रहते हुए अपने भाव को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है। अपने विचारों को कविताओं के जरिए प्रस्तुत किया है। इस कृति के प्रकाशन में मेरे परिवार ने मेरा बहुत सहयोग किया है।’ उन्होंने प्रकृति प्रेम और शिव भगवान के प्रति गहरी भक्तिभाव की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में लेखक एवं बालगीतकार रामबाबु सुवेदी ने स्वागत भाषण दिया।

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