
लगानी बोर्ड की बैठक में अर्थमंत्री का बयान- प्रगति की स्थिति लज्जाजनक है
अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने लगानी बोर्ड से स्वीकृत ५५ परियोजनाओं में से मात्र २ ही निर्माणाधीन होने की स्थिति को देखकर कठोर समीक्षा की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विदेशी निवेश स्वीकृत परियोजनाओं में काम नहीं होने के कारणों की पहचान करने और कानून में बदलाव करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रधानमंत्री के सलाहकार सुदीप ढकाल ने परियोजनाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय बताते हुए समन्वय की समस्याओं को उजागर किया और तुरंत समाधान की मांग की।
८ वैशाख, काठमांडू। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा कि लगानी बोर्ड से स्वीकृत ५५ परियोजनाओं में केवल २ का निर्माण कार्य शुरू होना शर्मनाक बात है। उनकी सचिवालय द्वारा जारी विवरण में यह बात सामने आई है।
लगानी बोर्ड की अनुगमन एवं सहजीकरण समिति की १३वीं बैठक में उन्होंने कहा, “विदेशी निवेश स्वीकृत परियोजनाओं में इतनी लंबी अवधि में कार्य न होना कठोर समीक्षा की आवश्यकता दर्शाता है।” उन्होंने उन जिम्मेदारों की पहचान करने पर जोर दिया जिनके कारण परियोजनाओं में कार्य नहीं बढ़ पाया। यदि दोषी व्यक्ति या कानूनी विसंगतियाँ हैं, तो उनका पता लगाकर कानूनों में संशोधन करना जरूरी है, यह उन्होंने स्पष्ट किया।
अर्थमंत्री वाग्ले ने कहा, “समस्याएं क्या हैं, उनकी तुरन्त जांच होनी चाहिए।” उन्होंने १४वीं बैठक तक समस्या के समाधान न होने पर बिना किसी नरमी के विचार करने की चेतावनी भी दी। निवेश सहजीकरण करने वाली प्रमुख संस्था की कमजोरी और गलत सूचनाओं का प्रचार गंभीर मामला है, उन्होंने कहा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कम से कम १० परियोजनाओं में तत्काल प्रगति देखी जानी चाहिए। “कुछ आकर्षक परियोजनाएं हैं, उनकी जांच जरूरी है,” उन्होंने जोड़ा।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के नीति, प्रशासन एवं सुशासन सलाहकार सुदीप ढकाल ने कहा कि देश के भविष्य से जुड़े परियोजनाओं की स्थिति अत्यंत दयनीय है। उन्होंने कहा, “परियोजना आगे बढ़ाने में कौन-कौन सी बाधाएं हैं, उनका तत्काल समाधान हो। कौन-कौन से निकाय और व्यक्ति संबंधित हैं, और किन कारणों से समन्वय नहीं हो पाया, इसका पता लगाया जाएगा। अब इसे मॉनिटर कर सुधार किया जाएगा,” उन्होंने बताया। इसी अवसर पर लगानी बोर्ड के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुशील ज्ञवाली ने बोर्ड, कार्यालय और समिति के दायित्व तथा अधिकार और स्वीकृत एवं सहायता प्राप्त परियोजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की।