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संसद के नए नियम से रवि लामिछाने को निलंबन से बचाने की संभावना

प्रतिनिधि सभा नियमावली के मसौदे में शामिल एक नियम पर आरोप लग रहे हैं कि यह भ्रष्टाचार और संपत्ति शुद्धीकरण के मुद्दों में फंसे सांसदों को निलंबन से बचाने की व्यवस्था करता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद गणेश पराजुली की अध्यक्षता वाली समिति ने यह मसौदा तैयार कर सभामुख को सौंपा है, जिसमें सांसदों के मामले में नियमावली को प्रचलित कानूनों से ऊपर रखा गया है, ऐसा जानकारों का कहना है।

प्रस्तावित नियमावली के नियम २५९ में कहा गया है, “प्रचलित कानून में जो भी लिखा हो, फिर भी सभा समिति और सदस्यों के मामले में यह नियमावली संघीय कानून के रूप में विशेष कानून की तरह लागू होगी।” इसमें आगे व्याख्या करते हुए कहा गया है कि “नियमावली प्रतिनिधि सभा सदस्य के विशेषाधिकार के रूप में बनी रहेगी।” इस व्यवस्था को पहले के संसद में निलंबित रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के मामले से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रतिनिधि सभा नियमावली मसौदा समिति के अध्यक्ष गणेश पराजुली ने कहा है कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति को लक्षित नहीं करती। उन्होंने बताया, “राज्य के तीनों निकायों के अपने क्षेत्राधिकार होते हैं। संविधान की धारा १०४ नियमावली बनाने का अधिकार देती है।” कानून के जानकारों का मानना है कि यह व्यवस्था उन कानूनों को कमजोर करती है जिनके तहत लामिछाने संपत्ति शुद्धीकरण और भ्रष्टाचार निवारण के मामले झेल रहे हैं, साथ ही अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग के कानूनों को भी प्रभावित कर सकती है।

संपत्ति शुद्धीकरण निवारण कानून, २०६४ के धारा २७ के अनुसार, संपत्ति शुद्धीकरण के मामले दर्ज होने पर पदाधिकारी, कर्मचारी या राष्ट्रसेवक स्वचालित निलंबन में चले जाते हैं। इसी आधार पर २०८१ साल के पौष ८ तारीख को संघीय संसद सचिवालय ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष लामिछाने को निलंबित कर दिया था। परंतु प्रतिनिधि सभा में अभी अनुमोदित नहीं हुआ प्रस्तावित नियमावली का नियम २४७ कहता है कि “प्रचलित कानून के अनुसार तीन वर्ष या उससे अधिक की सजा पाए जाने या नैतिक पतन दिखाई देने वाले आपराधिक मामलों में अभियोग पत्र दायर होने तथा संसद सदस्य के पुर्पक्षकाल के लिए जेल में होने के दौरान निलंबन रहेगा।”

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