Skip to main content

बाहुनों के मुद्दे पर सरकार की प्रशासनिक सुधार योजना में क्या है?

समाचार सारांश

प्राविधिक हिसाब से तैयार और सम्पादकीय समीक्षा की गई।

  • प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को बाहुन आबादी वाले क्षेत्रों से व्यक्तियों को हटाने के निर्देश दिए हैं।
  • सरकार ने भूमिहीन, बाहुन और अनियमित बस्तियों में रहने वाले लोगों का एकीकृत डिजिटल संपत्ति सर्वेक्षण 60 दिनों के अंदर पूरा करने की योजना बनाई है।
  • राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने बाहुनों से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमिप्राधिकार संस्थान स्थापित करने का संकल्प जताया है।

23 अप्रैल, काठमांडू – प्रधानमंत्री वलेन्द्र शाह द्वारा सुरक्षा एजेंसियों को बाहुनों द्वारा कब्जा किए गए इलाकों को साफ करने के निर्देश देने के बाद बाहुनों का मुद्दा पुनः चर्चा में आया है। बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री शाह ने उन क्षेत्रों से बाहुनों को हटाने का आदेश दिया था।

सरकार की प्रशासनिक सुधार कार्यसूची की 100 बिंदुओं में भूमिहीन, बाहुन या अनियमित बस्तियों में रहने वाले व्यक्तियों को भगाने की नीति शामिल नहीं है। इसके बजाय, सुधार कार्ययोजना की 90वीं बिंदु में भूमिहीन, बाहुन और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वाले लोगों का एकीकृत सर्वेक्षण करने का संकल्प लिया गया है। सरकार देशभर भूमिहीन, बाहुन और अनौपचारिक बस्तियों में रहने वालों का संयुक्त डिजिटल सर्वेक्षण और प्रमाणीकरण 60 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखती है।

शाह की अगुवाई वाली सरकार ने भूमिहीनता, बाहुन और अनियोजित निवास समस्याओं को 1,000 दिनों के भीतर हल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस अवधि में स्थानीय निकायों के सहयोग से परिवार सर्वेक्षण करना और वास्तविक लाभार्थियों की पहचान हेतु स्पष्ट मानदंड लागू करना शामिल है। साथ ही, सरकार अभिलेख अद्यतन करने, सार्वजनिक, सरकारी और ट्रस्ट की जमीनों का मापन करने तथा GIS आधारित डिजिटल डेटाबेस विकसित करने की भी तैयारी में है।

सरकार की प्रशासनिक सुधार योजना में बाहुनों के बारे में क्या कहा गया है?

सरकार ने वास्तविक बाहुनों को चरणबद्ध तरीके से जमीन उपलब्ध कराने का वादा किया है। सुधार योजना में शहरों के भूमिहीन, बाहुन और अनियोजित बस्तियों के लिए एकीकृत आवास विकल्प विकसित करने की योजना शामिल है। इसमें पुनर्वास कार्यक्रम भी शामिल हैं और जमीन वितरण तथा पुनर्वास प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बनाने का संकल्प व्यक्त किया गया है।

चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने बाहुनों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उच्च स्तरीय भूमि अधिकार प्राधिकरण गठन करने का संकल्प जताया था। आरएसपी ने इस “उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमि अधिकार प्राधिकरण” के माध्यम से सैटेलाइट भूमि नक़्शांकन और डिजिटल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से नकली बाहुनों को असली बाहुनों से अलग करने का वादा किया है। उनके घोषणा पत्र में उल्लेख है, “अतीत की असफलताओं से सीखते हुए, उच्च स्तरीय राष्ट्रीय भूमि अधिकार प्राधिकरण वैज्ञानिक प्रदत्त तरीकों से वास्तविक भूमिहीनों का पक्ष लेगा और सैटेलाइट नक़्शांकन व डिजिटल बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे नकली बाहुनों को अलग करेगा। इसके तहत विश्वासयोग्य, सुविधाजनक और उत्पाद से जुड़े एकीकृत मॉडल बस्तियों का विकास किया जाएगा, जो वास्तविक भूमिहीनों को स्थायी आवास और जमीन के अधिकार (लाल किताब) की गारंटी देगा।”

बाहुनों को लेकर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी का घोषणा पत्र

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ