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बालेन सरकार के अध्यादेश विवाद : राष्ट्रपति का ‘अंकुश’ जनादेश की अवहेलना या कानूनी रक्षा?

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल के साथ प्रधानमंत्री बालेन

तस्वीर स्रोत, EPA/Shutterstock

राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) की बहुमत वाली सरकार द्वारा सिफारिश किए गए अध्यादेश राष्ट्रपति कार्यालय में रोक दिए जाने के बाद तीव्र विवाद शुरू हो गया है।

पिछले समय की तरह इस बार भी अध्ययन करने पर यह सवाल उठता है कि सरकार ने अध्यादेश लाते समय क्या उद्देश्य रखा है और राष्ट्रपति द्वारा रोकने की भूमिका का क्या मतलब हो सकता है, इस पर विभिन्न दृष्टिकोणों की व्याख्या और विश्लेषण हो रहे हैं।

कांग्रेस से राष्ट्रीय सभा सदस्य रह चुके वरिष्ठ अधिवक्ता राधेश्याम अधिकारी के अनुसार, कुछ ही दिन में संसद शुरू होने वाली है इसलिए इस समय अध्यादेश नहीं लाना ज्यादा उपयुक्त होता।

“संसद के अधिवेशन के करीब होने पर अध्यादेश लाना या न लाना सरकार की जिम्मेदारी है,” अधिकारी ने बताया, “लेकिन अगर सरकार अध्यादेश लाती है और वह संविधान के अनुरूप होता है तो उसे लाना सही होता है।”

राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने इस संबंध में संविधानविदों से परामर्श किया है और उनका कार्यालय इस विषय पर अध्ययन कर रहा है।

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