
सम्बन्धविच्छेद के बाद भी सहकारी सदस्य परिवार के ही माने जाएंगे, ठगी में संलिप्त की संपत्ति जब्त होगी
सरकार ने सहकारी ऐन संशोधन अध्यादेश के माध्यम से समस्याग्रस्त सहकारी के सदस्यों को परिवार की परिभाषा में अंशधारक व्यक्ति भी शामिल किया है। अध्यादेश के अनुसार लगातार दो वर्ष तक कारोबार न करने वाले या नियमावली के विरुद्ध कार्य करने वाले सहकारी सदस्यों को परिवार में गिना जाएगा। परिवार की परिभाषा में नाते-रिश्तेदारों के विस्तृत संबंध और सहकारी में कार्यरत कर्मचारी भी शामिल किए गए हैं। १७ वैशाख, काठमाडौँ।
संबंध विच्छेद के बाद भी परिवार के सदस्य मानते हुए सहकारी ठगी में संलिप्त की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान बनाया गया है। सरकार ने समस्याग्रस्त सहकारी के सदस्यों के लिए परिवार की परिभाषा संशोधित करते हुए यह व्यवस्था लागू की है। सहकारी एक्ट संशोधन के लिए जारी अध्यादेश में अंशधारिता प्राप्त व्यक्ति को भी परिवार में शामिल किया गया है।
सहकारी ऐन, २०७४ में संशोधन लाने वाले इस अध्यादेश के मुताबिक, ऐन की धारा ८८ के अंतर्गत लगातार दो वर्ष तक कारोबार न करने वाले या ऐन तथा संबंधित नियमावली के खिलाफ कार्य करने वाले सहकारी सदस्यों को परिवार के अंतर्गत गिना जाएगा। इसमें अंशधारक व्यक्ति भी शामिल हैं। इसके अलावा, लिक्विडेशन या खारिज की स्थिति में पहुँचे या ऐन की धारा १०४ के अनुसार समस्याग्रस्त घोषित सहकारी संस्थाओं के ऐसे सदस्यों के अंशधारक जो अलग हुए या संबंध विच्छेद के बाद परिवार के सदस्य हैं, उन्हें भी परिवार में शामिल करने की व्यवस्था की गई है।
ऐन की परिभाषा के अनुसार ‘नाते-रिश्तेदार’ में काका, काकी, भतीजा, भतीजी, नाती, नातिनी, नातिनी की बहू, मामा, माइजु, भांजा, भांजी, ज्वाई, साला, साली, जेठान, जेठानी, फुपू, फुपाजू, नातिनी का ज्वाई, अलग हुए सासु-ससुर, दादा, भाई, भाभी, भाई की बहू और परिवार के एक ही घर के सदस्य शामिल हैं। इस शब्द में सदस्य रही सहकारी संस्था के कर्मचारी भी सम्मिलित हैं।