
नेपाल सरकार ने लिपुलेक मामले पर भारत और चीन को दिया कूटनीतिक नोट
नेपाल सरकार ने नेपाली क्षेत्र लिपुलेक के उपयोग को लेकर भारत और चीन को कूटनीतिक नोट भेजा है। भारत ने मानसरोवर यात्रा के लिए २० समूह निर्धारित किए हैं और १० समूहों के लिपुलेक पास होकर यात्रा करने की घोषणा की है। नेपाल ने ऐतिहासिक संधि, तथ्यों और नक्शे के आधार पर सीमा विवाद को कूटनीतिक माध्यम से सुलझाने का संकल्प व्यक्त किया है। तारीख २० वैशाख, काठमांडू।
नेपाल की अनुमति के बिना नेपाली भूमि लिपुलेक का उपयोग किए जाने के विरोध में नेपाल सरकार ने दोनों पड़ोसी देशों (भारत और चीन) को कूटनीतिक नोट भेजा है। वर्ष २०१५ में भी नेपाल ने इस मुद्दे पर भारत और चीन को कूटनीतिक नोट भेजा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री सुशील कोइराला के बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार ने लिखित रूप में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दोनों पड़ोसियों को सूचित किया है।
कोइराला के प्रधानमंत्री रहते विदेश मामलों के विशेषज्ञ दिनेश भट्टराई ने इस कदम को सकारात्मक बताया था। भट्टराई ने कहा, ‘उस समय भेजे गए पत्र का कोई जवाब नहीं मिला, लेकिन सरकार ने अब पुनः पत्र भेजकर अपनी स्थिति बनाए रखने का संदेश दिया है, जो एक सकारात्मक संकेत है।’ इसी सप्ताह भारत के विदेश मंत्रालय ने मानसरोवर यात्रा खोलने का ऐलान किया था।
३० अप्रैल को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस साल यात्रा के लिए कुल २० समूह होंगे, जिनमें से १० समूह उत्तराखण्ड के रास्ते से लिपुलेक पास होकर यात्रा करेंगे और अन्य १० समूह सिक्किम के नाथु ला पास से यात्रा करेंगे। नेपाली क्षेत्र में पड़ोसियों द्वारा एकतरफा निर्णय लेने के बाद नेपाल सरकार ने अपनी स्पष्ट स्थिति स्थापित की है। परराष्ट्र मंत्रालय ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा, ‘नेपाली भूमि लिपुलेक से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में नेपाल सरकार ने अपनी स्पष्ट स्थिति और हितधारकों को भारत और चीन दोनों पक्षों को कूटनीतिक माध्यम से पुनः अवगत कराया है।’