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पालिकाओं का बयान: अपने ही देश में नागरिकों को बेघर करना दुखद है

बाएं से क्रमशः बसंत बस्नेत, विष्णुप्रसाद भुसाल और भीमलाल अधिकारी। संघीय सरकार द्वारा ऐलानी जमीनों में बने घरों को ध्वस्त कर नागरिकों को बेघर किए जाने पर विभिन्न पालिकाओं ने विरोध जताया है। नवलपुर के कावासोती और उदयपुर के त्रियुगा पालिकाओं ने ऐलानी जमीन पर रह रहे नागरिकों को त्रस्त करने का आरोप लगाते हुए बयान जारी किए हैं। २३ वैशाख, काठमांडू। विभिन्न पालिकाओं ने संघीय सरकार द्वारा भौतिक संरचनाएँ तोड़कर नागरिकों को अपने ही देश में बेघर बनाए जाने पर विरोध किया है। उन्होंने अलग-अलग बयानों में कहा है कि सरकार ने ऐलानी जमीन पर रहने वाले नागरिकों को भी त्रस्त और बेघर कर दिया है। इस विरोध में कावासोती और त्रियुगा नगरपालिकाएं शामिल हैं।

कावासोती के मेयर विष्णुप्रसाद भुसाल ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, ‘संघीय सरकार ने सरकारी और सार्वजनिक जमीन की सुरक्षा के नाम पर वर्षों से ऐलानी जमीन पर घर बनाकर जीवन यापन कर रहे नागरिकों को त्रस्त करते हुए घर और भौतिक संरचनाएं तोड़कर जमीन पर नियंत्रण कर अपने ही देश के नागरिकों को अंदर ही अंदर बेघर करने के कार्यशैली के प्रति कावासोती नगरपालिका अत्यंत चिंतित है।’ मेयर भुसाल ने कहा कि नगरपालिका ने लालपुर्जा वितरण के लिए निस्सा भी जारी किया है।

त्रियुगा नगरपालिक के मेयर बसंत बस्नेत ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि ऐलानी जमीन पर निवास कर रहे नागरिकों को त्रस्त करने की इस कार्रवाई का वे विरोध करते हैं। पालिका ने लालपुर्जा प्रदान करने के लिए भूमि स्वामित्व अधिकार प्रमाणपत्र (सेतो पुर्जा) भी वितरण किया है। दोनों नगरपालिकाओं ने कानूनी तौर पर सरकारी और सार्वजनिक जमीनों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता भी जताई है।

नवलपुर जिले के मध्यबिंदु नगरपालिका के मेयर भीमलाल अधिकारी ने कहा है कि राज्य संयंत्र की कमजोरी के कारण वर्षों से भूमिहीन दलित, सुकुम्बासी और अव्यवस्थित तथा गरीब नागरिकों की समस्या हल नहीं हो पाई है। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, ‘समस्या के समाधान के लिए नीतिगत और प्रक्रियागत रास्ता देना चाहिए, लेकिन इसके बजाय पीड़ित नागरिकों पर दबाव और त्रास उत्पन्न करना अत्यंत दुखद विषय है। घर छूट जाने के बाद बिचल्ली में पड़े बच्चे, वृद्ध, बीमार, दिव्यांग और गर्भवती महिलाओं की हृदय विदारक स्थिति देखकर मन अत्यंत पीड़ित हुआ है।’

इससे पहले बर्दिया की आठ पालिकाओं ने संयुक्त बयान जारी कर संघीय सरकार के वन क्षेत्रों से बस्तियां हटाने के निर्णय का विरोध किया था। ग्रामीण पालिका राष्ट्रीय महासंघ नेपाल और नेपाल नगरपालिका संघ ने भी संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि बस्तियां हटाने से भूमिहीन नागरिकों में त्रास और भय बढ़ेगा और जीवन की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ेगा।

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