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सर्वोच्च अदालतका न्यायाधीश शर्मा प्रधानन्यायाधीशमा सिफारिस

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. मनोज शर्मा को प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश की गई है। न्याय परिषद की गुरुवार की बैठक में शर्मा को प्रस्तावित प्रधान न्यायाधीश के रूप में आगे बढ़ाया गया। शर्मा वरिष्ठतम न्यायाधीशों में चौथे क्रम पर रहते हुए प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश पाने वाले पहले व्यक्ति हैं।

२४ वैशाख, काठमांडू। नेपाल के न्यायिक इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि वरिष्ठतम न्यायाधीशों के क्रम में चौथे नंबर पर मौजूद न्यायाधीश को प्रधान न्यायाधीश के रूप में सिफारिश मिली है। संसदीय सुनवाई समिति द्वारा नाम की मंजूरी मिल जाने पर वे ३३वें प्रधान न्यायाधीश बनेंगे। ६ वैशाख २०७६ को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने वाले शर्मा, संसदीय अनुमोदन मिलने पर पूरे कार्यकाल अर्थात् ६ वर्ष तक प्रधान न्यायाधीश के पद पर रहेंगे।

कानून व्यवसायी सपना प्रधान मल्ल सहित वरिष्ठ न्यायाधीश कुमार रेग्मी और हरि फुयाल को पीछे छोड़ते हुए चौथे वरिष्ठता क्रम में उपस्थित शर्मा को संवैधानिक परिषद ने प्रधान न्यायाधीश के रूप में प्रस्तावित किया है। ४ असार २०२७ को पर्सा में जन्मे शर्मा ३ असार २०९२ को ६५ वर्ष के हो जाएंगे। प्रजातंत्र पुनर्स्थापना के बाद किसी भी प्रधान न्यायाधीश ने ६ वर्ष का पूरा कार्यकाल नहीं निभाया है। अगर वे ६ वर्ष का कार्यकाल पूरा करते हैं तो वैशाख २०८९ तक प्रधान न्यायाधीश बने रहेंगे।

नेपाल लॉ क्याम्पस से कानून में स्नातक और भारत के पुणे विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने वाले शर्मा ने श्रम कानून से संबंधित विषय में विद्यावारिधि की है। वे पुनरावेदन अदालत के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए और अस्थायी न्यायाधीश की व्यवस्था समाप्त होने के बाद अवकाश ग्रहण किया था। बाद में, चोलेन्द्रशम्सेर जबरा के प्रधान न्यायाधीश रहने के दौरान वे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए सिफारिश किए गए और संसदीय सुनवाई प्रक्रिया से अनुमोदन प्राप्त किया।

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