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मह काढ्ने परम्परालाई जीवन्त राख्न पुस्ता हस्तान्तरण

मह निकालने की परंपरा को जीवित रखने के लिए पीढ़ीगत हस्तांतरण

२७ वैशाख, मनाङ । विश्व के सबसे साहसिक और जोखिम भरे कार्यों में से एक है भिर मौरी का मह शिकार। यह जोखिम भरा मह शिकार गण्डकी प्रदेश के लमजुङ, गोरखा, म्याग्दी जैसे जिलों में किया जाता है। इनमें लमजुङ जिला भिर मौरी के मह शिकार के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। लमजुङ के मस्र्याङ्दी गाउँपालिका–४ मिप्रागाउँ के निकट छिप्ली भिर में लटके भिर मौरी के चाकों से मह निकालने के लिए स्थानीय लोग डोरी पर छलांग लगाकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए मह शिकार करते हैं। यह कार्य न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव की परंपरागत पेशा को जीवित रखने के उद्देश्य से वे भिर मौरी का मह निकालने के कार्य में लगे हुए हैं।

स्थानीय शिकारी टेकबहादुर गुरुङ का कहना है कि भिर मौरी के मह निकालने की परंपरा को जारी रखते हुए पीढ़ीगत हस्तांतरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पहले यह कार्य मुख्यतः बुजुर्ग लोग करते थे, लेकिन अब इसे जीवित रखने के लिए पीढ़ीगत हस्तांतरण को प्राथमिकता दी जा रही है। ‘‘भिर मौरी का मह औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। औषधीय उपयोग के लिए हम जोखिम उठाकर भिर से मह निकालते आए हैं,’’ गुरुङ ने कहा, ‘‘भिर मौरी के मह की मांग भी उच्च है।’’ उन्होंने बताया कि वर्ष में दो बार मह निकाला जाता है।

गुरुङ के अनुसार ‘‘पहला चरण वैशाख के अंतिम सप्ताह से जेठ के दूसरे सप्ताह के बीच मह निकालने का होता है, जबकि दूसरा चरण असोज के अंतिम सप्ताह से कात्तिक के दूसरे सप्ताह तक मह निकालना होता है। मह निकालते समय शुक्रवार को जाना परंपरा है। यदि मह अधिक मात्रा में होता है तो दो दिन तक निकालते हैं।’ भिर मौरी का शिकार करने के लिए तिथियों के अनुसार जंगल से निगालो लाया जाता है, जिससे चोया बनाकर लठ्ठे तैयार किए जाते हैं। आग में गर्म करके ये लठ्ठों से मिलकर भिर चढ़ने के लिए भर्याङ बनाई जाती है। बनाया गया भर्याङ ३-४ वर्ष तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

भर्याङ तैयार होने के बाद गांव वाले एक साथ भिर पर जाकर मह शिकार के लिए जाते हैं। विश्व के साहसिक पेशों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त यह कार्य विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुका है और इससे गांव की आय भी हो रही है, शिकारी मीनबहादुर गुरुङ ने बताया। ‘‘पहले केवल मुख ढककर मह निकाला जाता था, अब पूरी बॉडी ढककर निकाला जाता है, जिससे जोखिम कम हो गया है,’’ उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि मौरी का कम डंक मारना थेरापी के लिए उपयोगी है, लेकिन ज्यादा डंक लगने पर जान का खतरा होता है।

पूर्व में भिर मौरी का मह केवल स्थानीय क्षेत्र में सीमित रूप से औषधि के रूप में इस्तेमाल होता था। मानवीय विकास के साथ पहनावे में बदलाव होने के कारण पूरी तरह कपड़ों से ढंकने की प्रथा बढ़ी है और मह शिकार को सुरक्षित बनाना संभव हुआ है, स्थानीय लोगों ने बताया। पहले मह निकालने में केवल स्थानीय लोग होते थे, अब यह विदेशी पर्यटकों के आकर्षण में भी शामिल हो गया है, गुरुङ ने बताया। वर्तमान में भिर मौरी का मह शिकार देखने के लिए विदेशी पर्यटक आते हैं, स्थानीय लोगों ने जानकारी दी। प्राकृतिक और साहसिक इस कार्य के संरक्षण और निरंतरता पर जोर देते हुए तुर्की के नागरिक केमल ने कहा, ‘‘यह जोखिमभरा काम है लेकिन यहाँ के स्थानीय लोगों की बहादुरी ने सभी को मोहित किया है। प्राकृतिक जोखिम के साथ इसे आय का स्रोत भी बनाना चाहिए।’’ केमल ने मह निकालने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों के साहस को देखकर खुशी जताते हुए कहा, ‘‘मैंने निकाले गए मह में कुछ मौरी बैठी देखी, तो डर लगा। नेपाली वास्तव में बहादुर हैं, जिसे मैंने अपनी आंखों से देखा और समझा।’

भिर मौरी का मह निकालने की परंपरा ही नहीं बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण इसकी मांग भी बढ़ रही है। इसे जारी रखने की आवश्यकता स्पष्ट है। प्राकृतिक उत्पाद के रूप में इसे विकसित कर आय का माध्यम बनाते हुए संरक्षण और प्रचार-प्रसार की स्थिति बन रही है। इस परंपरा को जीवित रखकर इसे विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाने के प्रयासों पर सभी का ध्यान जाना चाहिए।

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