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ऊर्जा मंत्रालय जलस्रोत संबंधित छाता कानून लाने की तैयारी में

सरकार संघीय संरचना के अनुरूप जलस्रोत प्रबंधन के लिए नया ‘जलस्रोत विधेयक २०८३’ लाने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक संविधान द्वारा निर्धारित संघ, प्रदेश और स्थानीय तह के बीच अधिकारों के बंटवारे को कानूनी रूप प्रदान करेगा। मंत्रालय इस विधेयक को संसद अधिवेशन में ही पारित कराने का लक्ष्य रखता है और जेष्ठ महीने के पहले सप्ताह में इसे स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करने की योजना बना रहा है। २९ वैशाख, काठमाडौं।

जलस्रोत प्रबंधन को संघीय ढांचे के अनुसार सुव्यवस्थित करने के लिए सरकार नया छाता कानून लाने का विचार कर रही है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय ने बताया कि ‘जलस्रोत विधेयक २०८३’ का प्रारूप संशोधन कार्य पूरा कर स्वीकृति हेतु आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। यह विधेयक वर्तमान में लागू जलस्रोत अधिनियम २०४९ को प्रतिस्थापित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है तथा संविधान द्वारा निर्धारित संघ, प्रदेश और स्थानीय तहों के बीच अधिकारों के बंटवारे को कानूनी मान्यता प्रदान करेगा।

नए अधिनियम के लागू होने के बाद प्रदेश और स्थानीय तह अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग कानून बना सकेंगे। मंत्रालय के अनुसार, विधेयक का मुख्य उद्देश्य जलस्रोत संरक्षण, बहुआयामी उपयोग और समुचित विकास सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही जलजनित आपदाओं के न्यूनकरण, जलस्रोत का सतत उपयोग और एकीकृत प्रबंधन को विधेयक प्राथमिकता देगा। विधेयक के माध्यम से जल तथा ऊर्जा आयोग के सचिवालय को अधिक अधिकार प्रदान करने का प्रस्ताव रखा गया है।

सचिवालय को जलस्रोत नियमन, नीति समन्वय एवं दीर्घकालीन योजना बनाने वाला प्रमुख निकाय विकसित करने की तैयारी मंत्रालय ने बताई है। आयोग के वर्तमान कार्यक्षेत्र का विस्तार कर उसे और जिम्मेदारियां दी जाएंगी। मंत्रालय अधिनियम के साथ आवश्यक नियमावली तैयार करने का कार्य भी समानांतर रूप में आगे बढ़ा रहा है। सरकार इस संसद अधिवेशन में विधेयक पास कराने का लक्ष्य रखती है। इसके लिए प्रारूप को जेष्ठ महीने के पहले सप्ताह में कानून, न्याय तथा संसदीय मामलों के मंत्रालय और मंत्रिपरिषद में स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया जाएगा। संघीय संरचना के अनुसार जलस्रोत प्रबंधन के स्पष्ट कानूनी आधार की कमी के कारण विभिन्न स्तरों की सरकारों के बीच अधिकार क्षेत्र, परियोजना स्वीकृति और संसाधन उपयोग में भ्रम उत्पन्न होता था। नया विधेयक ऐसे अस्पष्टताओं को दूर कर जलस्रोत विकास को संस्थागत और व्यवस्थित बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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