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निर्माण व्यवसायी महासंघ ने विकास मंत्रालय के सचिव को सौंपा ज्ञापनपत्र

निर्माण व्यवसायी महासंघ ने एकीकृत पूर्वाधार विकास मंत्रालय एवं ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय को ज्ञापनपत्र सौंपा है। महासंघ के अध्यक्ष निकोलस पाण्डे ने बताया कि मूल्यवृद्धि के कारण निर्माण क्षेत्र गंभीर संकट में है और ठेका दरों में समायोजन आवश्यक है। महासंघ ने सरकार से रोकिए हुए परियोजनाओं की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ बजट शीर्षक और भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

महँगाई के प्रभाव से पूरे देश में परियोजनाएं स्वतः बंद होने की स्थिति में पहुंच गई हैं, बावजूद इसके सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। इसी को लेकर महासंघ के अध्यक्ष निकोलस पाण्डे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एकीकृत पूर्वाधार विकास मंत्रालय के सचिव गोपाल सिग्देल तथा ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्रालय की सचिव सरिता दवाड़ी को ज्ञापनपत्र सौंपा। पाण्डे ने बताया कि निर्माण क्षेत्र फिलहाल होल्ड पर है और इसी कारण सचिवों से मुलाकात कर ज्ञापनपत्र दिया गया।

उनके अनुसार, मूल्यवृद्धि के चलते निर्माण व्यवसायी अत्यंत संकट में हैं। इसलिए बढ़े हुए बाजार मूल्य के अनुसार ठेका दरों में समायोजन होना चाहिए, साथ ही रोकी गई परियोजनाओं की अवधि बढ़ाकर 2084 आषाढ़ तक कार्य करने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त आगामी बजट में परियोजनाओं के स्पष्ट बजट शीर्षक और भुगतान की बेहतर व्यवस्था की भी मांग की गई है।

आंदोलन के बीच कारोबारियों पर हो रही धरपकड़ की उन्होंने कड़ी निंदा की। व्यवसायियों को अनुसंधान के नाम पर प्रताड़ित किए जाने से निवेश का माहौल कमजोर होगा, यह उनके विचार हैं। पाण्डे ने बताया कि ईंधन के दाम बढ़ने से सीमेंट, डंडा, बालू जैसे निर्माण सामग्री के भाव बढ़ गए हैं और बिटुमिन सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी के कारण निर्माण कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार को मूल्य समायोजन की निर्देशिका तत्काल जारी करनी चाहिए और मूल्यवृद्धि के प्रभाव के मद्देनज़र राहत प्रदान करनी चाहिए, अन्यथा काम आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।

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