
‘भागबँटवारे के लिए गुटों की बैठक का कोई मतलब नहीं है’ – प्रदीप पौडेल
समाचार सारांश
- नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने प्रधानमंत्री की नीति एवं कार्यक्रम के प्रति गंभीरता न दिखाए जाने और संसद में उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया।
- महामंत्री पौडेल ने कांग्रेस में समानांतर गतिविधियाँ और गुट बैठकों की स्थिति पर कड़ी आलोचना की और सभी असंतुष्ट नेताओं से समिति के अंदर चर्चा करने का आग्रह किया।
- पौडेल ने कहा कि आगामी बजट जनता की अपेक्षाओं के अनुसार सुधार और सुशासन सुनिश्चित करते हुए लाना होगा।
मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के महामंत्री प्रदीप पौडेल ने सरकार की नीति एवं कार्यक्रम पर प्रधानमंत्री की गम्भीरता नहीं दिखाए जाने पर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने संसद के प्रति प्रधानमंत्री की चरम उपेक्षा होने का भी आरोप लगाया है।
कांग्रेस में समानांतर गतिविधियाँ और गुट बैठकों के बीच महामंत्री पौडेल ने ‘शक्ति केंद्र बनाकर पार्टी में भागबँटवारा खोजने की प्रवृत्ति’ की कड़ी आलोचना की। कांग्रेस केन्द्रीय कार्यसमिति में हुए हालिया मनोनयन को विधानसम्मत बताया और सभी असंतुष्ट नेताओं से समिति के अंदर आकर चर्चा करने का आग्रह किया।
वर्तमान सरकार शक्तिशाली और जन अपेक्षित होने के कारण आगामी आर्थिक वर्ष के बजट में कोई बहाना बनाने की जगह नहीं हैः महामंत्री पौडेल से हुई बातचीत से अंश:
सरकार ने हाल ही में नीति तथा कार्यक्रम जारी किया है। इसका नेपाली कांग्रेस ने कैसे स्वागत किया?
नीति तथा कार्यक्रम के आने के माहौल में कई प्रश्न उठने स्वाभाविक हैं। हालांकि प्रधानमंत्री ने नीति तथा कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया। संसद में जब राष्ट्रपति ने नीति तथा कार्यक्रम पेश किया तो प्रधानमंत्री उपस्थित नहीं थे, जिससे उनकी प्रतिबद्धता का अभाव प्रतीत होता है।
नीति और कार्यक्रम पर चर्चा प्रधानमंत्री को संसद में जाकर करनी चाहिए और सवालों के जवाब देने चाहिए, लेकिन गम्भीरता नहीं दिखी। प्रधानमंत्री ने इसे हर साल की औपचारिकता मात्र माना है और संसद की अवहेलना की है।
संसद फिर बंद की गई, महत्वपूर्ण मुद्दे अध्यादेशों से लाए गए, उन्हें संसद के समक्ष लाने की इच्छा नहीं दिखी। राष्ट्रपति द्वारा वाचन हुआ, पर उस प्रक्रिया में न तो राष्ट्रपति का सम्मान देखने को मिला और न संसद का।
नीति और कार्यक्रम के विषय में भी जन समर्थन और अपेक्षा अनुरूप प्रगति नहीं दिखती। आशाओं और देश परिवर्तन की योजनाएँ नहीं हैं, केवल प्रस्तुति और प्रधानमंत्री के व्यवहार में विवाद हैं।
सरकार बनने के सौ दिन भी पूरे न हुए विपक्ष में इतना विरोध क्यों है?
सरकार के काम और व्यवहार से विरोध उत्पन्न होता है। सौ दिन भी पूरे न हुए विरोध के कई कारण सामने आ चुके हैं। यह विरोध सरकार की कमियों और खूबियों को दिखाता है। संसद और प्रक्रियाओं की अनदेखी तथा प्रधानमंत्री द्वारा संसद का उपेक्षा करना बेहद नकारात्मक है।
सरकार को विधि और प्रक्रियाओं के अनुसार ही काम करना चाहिए। विरोध से सरकार की कमजोरी स्पष्ट होती है। योगदान देने वालों और विरोध करने वालों दोनों के प्रति समान व्यवहार जरूरी है। अभी समय है परिपक्वता से काम करने का।
आगामी वित्तीय वर्ष का बजट कैसा होना चाहिए?
यह सरकार शक्तिशाली है और जनता का बड़ा विश्वास प्राप्त कर चुकी है। इसलिए आगामी बजट में जनता की अपेक्षानुसार सुधार और सुशासन लागू होना चाहिए। बजट में स्पष्ट सुधार योजनाएँ होनी चाहिए और शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना, सुरक्षा आदि सभी क्षेत्र शामिल होने चाहिए।
सुशासन केवल कम खर्च करके संभव नहीं है, बल्कि कार्यान्वयन और प्रतिबद्धता पर निर्भर है। पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि और महंगाई नियंत्रण के लिए स्पष्ट कार्यक्रम हो। स्वास्थ्य बीमा प्राथमिकता में होना चाहिए, जिसे सरकार को लेना जरूरी है।
बजट को दीर्घकालीन सुधार, असमानता घटाने और जनता के जीवनस्तर में सुधार लाने वाला बनाना होगा। पांच वर्षों के लिए स्थिर सरकार होने के कारण योजनाओं को निरंतरता मिलनी चाहिए और बहाना बनाने की अनुमति नहीं है।
प्रदेशों में कांग्रेस और एमाले के गठबंधन में खटपट की खबरें हैं?
प्रदेश और स्थानीय सरकारें गठबंधन की वजह से बनी हैं, जो अपरिहार्य है। लेकिन सरकार संचालन में कुछ बातों में संतुलन बनाना और सुधार जरूरी हैं। सरकार एक वर्ष में अच्छे संदेश के साथ काम करने की रणनीति बना रही है।
विभिन्न विवाद हो रहे हैं, पर मुख्य बात यह है कि गठबंधन टूटना नहीं चाहिए। सरकार में रहकर जनता के प्रति जवाबदेही वाली कार्यशैली पर केंद्रित हैं।
नेपाली कांग्रेस में असंतोष और गुटभेंट के संबंध में क्या कहा जाता है?
गुट और समूह होना नया नहीं है, लेकिन पार्टी का मुख्य लक्ष्य देश और जनता की सेवा है। गुटवाइयों से पार्टी कमजोर होती है। इसलिए असंतुष्ट नेताओं को समेटने और समस्या सुलझाने का प्रयास निरंतर चल रहा है।
नई समितियों में पुराने और अनुभवी नेताओं को शामिल करने की कोशिश हो रही है। विभाजन रोकने और पार्टी को मजबूत बनाने के लिए सभी स्तरों पर चर्चा जारी है।
शक्ति केंद्र बनाकर भागबँटवारा खोजने की प्रवृत्ति को मिटाना जरूरी है। सभी एक साथ मिलकर समस्या सुलझाने को तैयार हैं। पार्टी युद्ध के लिए नहीं, विकास और नेतृत्व के लिए है।
मनोनीत नेताओं के बारे में क्या कहा गया?
मनोनीत नेताओं में योग्य और अभियान में लाये जा सकने वाले नेताओं को पार्टी में शामिल किया गया है। क्षमता और योगदान के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाती है। पार्टी में निर्णय सहमति से होते हैं, इसलिए विवाद से बचने की अपील की गई है।
शक्ति केंद्र बनाकर भागबँटवारा करना पार्टी के लिए हानिकारक है। हमारी कोशिश असंतुष्ट नेताओं और समूहों को पार्टी में शामिल करना है।
हाल ही में देउवा समूह द्वारा सम्पन्न बागमती प्रदेश स्तरीय बैठक और महाधिवेशन की तैयारियों के बारे में क्या कहा गया?
सहमति और साझा संयंत्र का निर्माण महाधिवेशन को निष्पक्ष और सफल बनाने के लिए जरूरी है। अचानक नई समिति बनाए बिना वर्तमान केन्द्रीय समिति के भीतर सहमति खोजने की नीति है। सभी वरिष्ठ नेताओं को शामिल करके सहमति और महाधिवेशन की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
सदस्यता वृद्धि म्याद में पूरी नहीं हुई तो अधिवेशन में भागीदारी संभव नहीं है। नई सदस्यता नहीं, बल्कि पुराने सदस्यों का डिजिटल अपडेट जारी है। इससे पारदर्शिता और पार्टी संगठन मजबूत होगा।
मुख्य असंतुष्ट नेताओं को शामिल करने के प्रयास कैसे हैं?
उन नेताओं को साथ लाने का प्रयास चल रहा है। समिति में आकर सहयोग करने का अनुरोध है। पार्टी के अंदर एक जगह इकठ्ठा होकर सक्रिय और गतिशील बनाना अभियान देश भर में चल रहा है।
आंतरिक विवाद से ज्यादा पार्टी को आगे बढ़ाने का काम महत्वपूर्ण है। समय कम है, इसलिए जल्दी और प्रभावी महाधिवेशन की तैयारी की योजना है।
प्रदेशस्तरीय प्रशिक्षण और बैठक कार्यक्रमों में सहभागिता और भावना कैसी है?
निर्वाचन में पराजय और आंतरिक विवाद से साथियों में उत्साह कम है। पर अब पार्टी एकजुट होकर काम करने की ओर है। साथी मिलकर जनता के पक्ष में मजबूत भूमिका निभाने की भावना विकसित कर रहे हैं।
१३ भ्रातृ संगठनों के विघटन और नए नेतृत्व लाने के बारे में क्या कहा गया?
अधिक कार्य न होने के कारण भ्रातृ संगठनों की अवधि बढ़ाई नहीं गई। महिला संघ में नया नेतृत्व है, अन्य संगठनों में जल्द ही नए नेतृत्व के लिए चर्चा चल रही है। आवश्यक सहयोग और सहायता दी जाएगी।
अधिवेशन सम्पन्न न होने पर संगठन के विघटन की प्रक्रिया लागू हो सकती है।