
आउटसोर्सिंग श्रमिकों के श्रम शोषण के खिलाफ श्रम मंत्रालय का सख्त कदम, नियमन हेतु पत्राचार
समाचार सारांश
- सरकार ने आउटसोर्सिंग श्रमिकों के श्रम शोषण को रोकने के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक और श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को श्रम कानूनों के तहत सख्त निर्देश दिए हैं।
- श्रम विभाग ने बैंक और वित्तीय संस्थानों में काम करने वाले सुरक्षागार्डों को न्यूनतम वेतन एवं सेवा सुविधाएं न दिए जाने की शिकायत मिलने पर नियमन के लिए नेपाल राष्ट्र बैंक को पत्र भेजा है।
- श्रम कानून के विपरीत सार्वजनिक खरीद कानून के तहत कम मूल्य में श्रमिक आपूर्ति की जा रही है, इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देशात्मक आदेश जारी किया है।
१ जेठ, काठमांडू। आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों के श्रम शोषण के मामलों के कारण सरकार ने सख्त कदम उठाया है।
सरकार ने नेपाल राष्ट्र बैंक, श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों और संबंधित निकायों को पत्र भेज कर श्रम कानून के अनुसार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा हेतु कड़ा निर्देश दिया है।
श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय के श्रम और व्यवसायजन्य सुरक्षा विभाग ने राष्ट्र बैंक को अनुरोध किया है कि श्रमिक आपूर्तिकर्ता के माध्यम से आने वाले श्रमिकों के श्रम अधिकारों को सुनिश्चित करने हेतु बैंक और वित्तीय संस्थानों को निर्देश प्रदान करें।
बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत सुरक्षागार्ड, सफाई कर्मचारी, फ्रंटलाइनर, कार्यालय सहयोगी सहित श्रमिकों के श्रम शोषण के मामले सामने आने के पश्चात विभाग ने श्रम कानून के तहत नियंत्रण हेतु आग्रह किया है।
हाल ही में हेलो सरकार, श्रम मंत्रालय एवं श्रम विभाग में बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत आउटसोर्सिंग श्रमिकों के खिलाफ श्रम शोषण की शिकायतों में वृद्धि हुई है।
विभाग के प्रवक्ता इंजीनियर मणिनाथ गोप ने बताया कि न्यूनतम वेतन न मिलने, अत्यधिक कार्यभार लगने जैसी शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। बढ़ती शिकायतों के कारण राष्ट्र बैंक को नियमन हेतु पत्राचार किया गया है।
श्रम कानून २०७४ की धारा ५९ के अनुसार श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियां सुरक्षा सेवा, सहायक सेवा, व्यवसाय सहायता सेवा एवं घरेलू सहायता सेवा में श्रमिकों को नियोजित कर सकती हैं।
परन्तु कई बैंक और वित्तीय संस्थाएं (मुख्य रोजगारदाता) तथा श्रमिक आपूर्तिकर्ता (रोजगारदाता) के बीच हुए समझौतों के अनुसार सुरक्षा कर्मियों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन एवं श्रम कानून २०७४ व श्रम नियमावली २०७५ के अनुसार सेवा सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं, ऐसा विभाग ने शिकायतों में बताया है।
विभाग ने पहले भी श्रम कानून और नियमों के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु २७ चैत २०८२ को राष्ट्र बैंक को पत्र भेजा था, परंतु अनुपालन न होने पर पुनः श्रम मंत्रालय के निर्देश पर अनुरोध किया गया है।
श्रम नियमावली २०७५ के नियम ५६ के तहत प्रत्येक प्रतिष्ठान को पुस महीने के अंत तक श्रम ऑडिट कराना आवश्यक है। इसी नियम की उप-धारा (४) के अनुसार श्रम ऑडिट रिपोर्ट बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा राष्ट्र बैंक को प्रस्तुत करनी होती है।
विभाग ने उक्त प्रावधानों को कठोरता से लागू कराने हेतु राष्ट्र बैंक को पुनः पत्र भेजकर निर्देश देने कहा है।
साथ ही विभाग ने श्रमिक आपूर्तिकर्ता सभी कंपनियों, नेपाल मजदूर आपूर्तिकर्ता संघ एवं सुरक्षा व्यवसायी संगठन नेपाल को भी श्रम कानूनों के अनुसार श्रमिकों को सभी सेवा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
सेवा सुविधा न देने पर विभाग ने कड़ी कार्रवाई का सख्त चेतावनी दी है।

बैंक एवं वित्तीय संस्थानों में कार्यरत सुरक्षागार्ड सहित श्रमिकों को न्यूनतम वेतन नहीं मिलना, अधिक घंटे काम कराना, त्योहारों के खर्च कम देना एवं श्रम कानून के तहत सेवा सुविधाएं न मिलने की शिकायतों पर विभाग ने श्रमिक आपूर्तिकर्ता कंपनियों को कड़े निर्देश देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी है।
श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय ने न्यूनतम वेतन न मिलने और अधिक काम लगाने की शिकायतों के मद्देनजर श्रमिकों के श्रम अधिकारों के कार्यान्वयन में कड़ाई दिखा रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय और हेलो सरकार में शिकायतें मिलने के बाद निकटस्थ अधिकारियों को दबाव के तहत सरकार ने श्रमिक शोषण के मामलों पर सख्त कदम उठाना शुरू किया है। आउटसोर्सिंग श्रमिक संगठन नेपाल ने २४ मंसिर २०८२ को श्रम विभाग में एक आवेदन दिया था।
श्रम कानूनों के विपरीत श्रमिक आपूर्ति के विरुद्ध आवेदनों के कारण उनका नियमन एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। लंबी सुनवाई न होने पर संगठन के अध्यक्ष नारायणप्रसाद खरेल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, हेलो सरकार, राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र आदि जगहों पर शिकायतें दर्ज करवाई थीं।
विभाग में दर्ज शिकायतों पर कोई सुनवाई न होने के कारण ये निकाय श्रम मंत्रालय पर दबाव डालने लगे थे।
अध्यक्ष खरेल के अनुसार श्रमिक आपूर्तिकर्ता श्रम कानूनों के बजाय सार्वजनिक खरीद कानून के तहत कम मूल्य पर कार्य कर रहे हैं।
‘जहां श्रम कानूनों के तहत होना चाहिए था, वहां सार्वजनिक खरीद कानून के अनुसार कम मुल्य पर कार्य दिया जा रहा था, जिससे टेंडर स्वीकृत के खिलाफ राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र में शिकायत की गई,’ अध्यक्ष खरेल ने कहा, ‘विभाग में दर्ज आवेदन सुनवाई न होने पर मैं प्रशासनिक प्रमुखों के साथ राष्ट्रीय सतर्कता केंद्र में शिकायत दर्ज कराया, जिस पर से कार्रवाई शुरू हुई।’

सुरक्षागार्ड जैसे श्रमिकों के नियोजन में श्रम कानून की बजाय सार्वजनिक खरीद कानून के अनुसार कम मूल्य का अनुबंध होना आम बात हो गई है। इस विषय पर सर्वोच्च न्यायालय में रिट दायर की गई थी और २५ वैशाख को सरकार के नाम पर निर्देशात्मक आदेश जारी हो चुका है।
श्रम कार्यालयों में इस प्रकार की शिकायतें बढ़ने के कारण एक ही संस्था पर २३२ से ३०० श्रमिकों को ठगने की भी शिकायतें दर्ज हो रही हैं।
सुरक्षागार्डों के लिए श्रम विभाग ने मासिक न्यूनतम वेतन कम से कम २७,७३७ रुपये निर्धारित किया है, परंतु कुछ को अब तक केवल १९,५५० रुपये दिए जा रहे हैं।