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काम, काम, काम – Online Khabar

काम, काम, काम – श्रम और रोजगार का वर्तमान अध्ययन

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने पाँच वर्षों के भीतर 12 लाख नए रोजगार सृजन करने का घोषणा किया है, जिसका उद्देश्य बाध्यात्मक पलायन को कम करना है। त्रिवि मानवशास्त्र विभाग के अध्ययन के अनुसार 35 जातियों को दैनिक 24 घंटे काम की कमी और अनियमित रोजगार की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने आर्थिक वर्ष २०७८/०८४ के नीति तथा कार्यक्रम में औद्योगिक नीति संशोधन एवं रिमोट वर्क नीति को लागू कर रोजगार को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने हालिया आम चुनाव से पहले एक पृष्ठ नागरिक करार जारी किया था। यह करार तीन भागों में विभाजित है – प्राथमिकता, वर्तमान स्थिति और लक्ष्य। करारपत्र की प्राथमिकता के बिंदु संख्या 3 में ‘काम, काम, काम’ शीर्षक उल्लिखित है। वर्तमान स्थिति में ‘अनौपचारिक, न्यून मजदूरी और उच्च बेरोजगारी; रोजाना 3,300 से अधिक युवाओं का पलायन’ बताया गया है, जबकि लक्ष्य में ‘बाध्यात्मक पलायन को घटाना, औपचारिक, सम्मानित, सुरक्षित और समावेशी 12 लाख नए रोजगार सृजन’ करने का लक्ष्य रखा गया है। प्राथमिकता क्षेत्रों में ‘आईटी, निर्माण, पर्यटन, कृषि, खनिज, उद्योग और सेवा व्यापार’ शामिल हैं। करारपत्र में कहा गया है, “यदि आप हमें एकल बहुमत दिलाते हैं और करार की शर्तों को पांच वर्षों में पूरा नहीं करते हैं, तो आगामी चुनाव में हमें दंड भुगतना होगा।”

सन् 2022 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय मानवशास्त्र विभाग ने ईस्ट-वेस्ट सेंटर, हवाई और पर्ड्यू विश्वविद्यालय (अमेरिका) के सहयोग से ‘नेपाल की 35 जातियां 24 घंटे कैसे बिताती हैं?’ विषय पर व्यापक अध्ययन किया था। अध्ययन का शीर्षक था ‘State of Social Inclusion: A Study of Time Allocation’। यह शोध सन् 2012 में पूरा किए गए ‘State of Social Inclusion in Nepal’ अध्ययन का उन्नत संस्करण था। चयनित जातियां बागमती और मधेस प्रदेश के विभिन्न आर्थिक एवं सामाजिक स्तरों से थीं। हिमाल से लेकर तराई-मधेस तक में ब्राह्मण, नेवार, गुरुङ, तामाङ, मुसहर जैसे समूह शामिल थे। इस परियोजना में मधेस के सात गांवों के विभिन्न जातियों के लोगों से साक्षात्कार, विषयगत चर्चा और दैनिक गतिविधियों का तथ्यांक संग्रह किया गया। मासिक, त्रैमासिक एवं वार्षिक स्थिति का भी विश्लेषण किया गया।

पाठक दैनिक काम की कमी को सभी स्थानों पर पाए गए आंकड़ों से स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। स्थानीय स्तर पर किसान कार्य, मजदूरी, खेत अधीनता और श्रमिक रोजगार में सीमित समय खर्च होता है, जो अनियमित और मौसमी प्रकृति का होता है। मुसहर बस्ती की स्थिति सबसे प्रभावशाली थी जहां अधिकांश लोगों को नियमित रोजगार की कमी और अधिकतर समय बेरोजगारी में बिताने का अनुभव था। “सरकार को पर्याप्त रोजगार देना चाहिए” की मांग सर्वत्र सुनाई दी। ऐसी परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि गांव और शहर दोनों जगह रोजगार के अवसर बढ़ाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने पाँच वर्षों में 12 लाख रोजगार सृजन करने की योजना बनाई है, जिसका वार्षिक औसत लगभग 2 लाख 40 हजार रोजगार के बराबर है। देश में प्रति वर्ष 5 लाख श्रमिक श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं, जिनमें सभी को रोजगार नहीं मिल पाता। प्रतिदिन 3,300 युवा विदेश पलायन करते हैं, जो वार्षिक लगभग 11 लाख से अधिक होता है। यह आंकड़ा नेपाली श्रम बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर दर्शाता है।

सरकार को श्रम बाजार का विस्तार करने की चुनौती का सामना करना होगा तथा निर्मित रोजगार महंगाई नियंत्रण में सक्षम होगा या नहीं इसका परीक्षण भी होगा। केवल सरकारी रोजगार से पूरी मांग पूरी नहीं होगी; इसलिए व्यापक निजी क्षेत्र के सहयोग की आवश्यकता दिखाई देती है। शिक्षित युवाओं को देश में रोकने के लिए सरकारी व्यवस्था को और सुधारना होगा। शिक्षित युवाओं के डिग्री के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। शहर-केंद्रित रोजगार अवसरों के कारण संसाधन और शक्ति शहर में केंद्रित हो रहे हैं, जिससे गांव खाली हो रहे हैं। असंतुलित विकास के कारण गांव सुस्त पड़ गए हैं। जनसंख्या पुनर्वितरण और संतुलन बनाए रखने के लिए नीतियां और कार्यक्रम बनाकर गांव-केंद्रित रोजगार सृजन आवश्यक है। इससे न केवल शहर की भीड़ नियंत्रित होगी बल्कि गांव भी समृद्ध होंगे। यदि गांवों में बुनियादी सेवा और अवसर बढ़ाए जाएं तो लोग अपने गांव में ही रहने के लिए प्रेरित होंगे और अनावश्यक शहरी पलायन घटेगा।

सरकार ने हाल ही में वैधानिक मकान मालिक और सुकुम्बासी समस्या समाधान के लिए रणनीति बनाई है, जिसका सामाजिक सद्भाव पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। मुसहर, कायस्थ, मुस्कान सहित विभिन्न समुदाय सरकार से घर और रोजगार की समस्या का ठोस समाधान चाह रहे हैं। विदेशी रोजगार के विकल्प के रूप में घरेलू रोजगार सृजन अनिवार्य है, जो युवाओं को गांव में रहने के लिए प्रेरित करेगा। चीन ने जनसंख्या पुनर्संतुलन के लिए पूर्वी तटीय क्षेत्र से पश्चिमी भूभाग तक जनसंख्या स्थानांतरित करने की ठोस योजना चलाई है। इसमें सड़क, यातायात, विद्युत, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में व्यापक निवेश कर युवाओं को परियोजनाओं में संलग्न किया जा रहा है। ऐसी योजना नेपाली संदर्भ में भी आवश्यक है, जहां ग्रामीण उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और व्यवस्थित निवेश हेतु समर्पित नीतियां, योजनाएं व कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए।

देश में स्टार्टअप व्यवसाय विकास की शुरुआत में हैं, पर नीतियों और परियोजनाओं में महत्वपूर्ण अंतर दिखाई देता है। योग्य और अयोग्य उद्यमियों को आवश्यक मदद सुनिश्चित करने में सरकार की भूमिका अहम होगी। सरकार ने आर्थिक वर्ष २०७८/०८४ के लिए प्रस्तुत नीति तथा कार्यक्रम में रोजगार को विशेष प्राथमिकता दी है। इसमें औद्योगिक नीति संशोधन, राष्ट्रीय उद्यम प्रवर्धन सुविधा की स्थापना, नई रोजगार नीति की तैयारी, कौशल विकास, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार सेवा प्रणाली के एकीकरण जैसे बिंदु शामिल हैं। रिमोट वर्क नीति के लिए कानूनी प्रावधान बनाने और विदेश लौटे युवाओं के कौशल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित करने के प्रयास भी सरकार करेगी। इस दशक को रोजगार प्रवर्धन दशक घोषित करते हुए मध्यपहाड़ी लोकमार्ग के आसपास के शहरों को नई आर्थिक संभावनाओं से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है।

निष्कर्षत: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी द्वारा पांच वर्षों में 12 लाख रोजगार सृजन की घोषणा प्रेरणादायक प्रतीत होती है, लेकिन नेपाली समाज की व्यापक रोजगार मांग के हिसाब से यह संख्या अपेक्षाकृत कम है। आज के युवा रोज़गार के लिए देश छोड़ रहे हैं, इसलिए रोजगार के सभी आयामों में विस्तार आवश्यक है। रोजगार से ही अधिक रोजगार सृजित होता है; अतः सरकार के वादों को व्यवहार में ज़मीन पर उतारने का दबाव है। अद्वितीय सरकार, युवा प्रधानमंत्री और चर्चित अर्थशास्त्री मंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट और क्रियान्वयन पर सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद है। बजट प्रस्तुति के बाद नीति तथा कार्यक्रम के अनुसार विशेष संरचना बनाई जाएगी और क्रियान्वयन मार्गदर्शिका स्पष्ट होगी। रिमोट वर्क नीति को विशेष तवज्जो मिली है; दक्ष जनशक्ति विकास में सरकार की प्रगति सफलता का मापदंड होगा। वास्तविक रोजगार आवश्यकता के आधार पर सरकार को बड़ी जिम्मेदारी निभानी है और जनमत का सम्मान करते हुए अपने वादे पूरे करने होंगे।

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