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नेपाल में इबोला का खतरा कितना है और सरकार क्या कर रही है

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में स्वास्थ्यकर्मी और संक्रमित मरीज

तस्वीर स्रोत, Reuters

तस्वीर का कैप्शन, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में 2018 और 2020 के बीच हुए घातक प्रकोप के दौरान लगभग 2,300 लोगों की मौत हुई थी

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पढ़ने का समय: 4 मिनट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप को अंतर्राष्ट्रीय जनस्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के बाद नेपाल में भी इसको लेकर सतर्कता बरती जा रही है, यह जानकारी स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय ने दी है।

डब्ल्यूएचओ ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के पूर्वी इतुरी प्रांत में इबोला फैलने के बाद विश्वव्यापी चिंता को देखते हुए रविवार को “विश्व स्वास्थ्य संकट” घोषित किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि प्रभावित देशों से आने वाले नेपाली और विदेशी यात्रियों की स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर क्वारंटाइन का प्रावधान किया गया है।

हालांकि भारत में अब तक इबोला के कोई मामले पुष्टि नहीं हुए हैं, फिर भी स्थलमार्ग पर कोई विशेष तैयारी नहीं है, हालात के अनुसार तैयारी की योजना बनी हुई है।

एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ के अनुसार, वर्तमान में जोखिम कम दिख रहा है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है, फिर भी सतर्कता बरतना आवश्यक है।

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