
‘कर्मचारी इंजन हैं, ड्राइविंग सीट पर बैठने वाले को उन्हें कैसे चलाना है पर ध्यान देना चाहिए’
समाचार सारांश
- चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मंत्रियों के चयन एवं मंत्रालयों के आवंटन पर ध्यान केंद्रित है।
- पूर्व सचिव गोविंद कुसुम ने कहा कि प्रधानमंत्री को कार्ययोजना बनाकर पांच वर्षों की प्राथमिकताओं के साथ सक्षम और जवाबदेह मंत्रिमंडल बनाना चाहिए।
- सरकार को सुशासन, पारदर्शिता और क्रियान्वयन-केंद्रित प्रणाली विकसित करके पिछले कमियों को दोहराने से बचना होगा, जो अवसर और चुनौती दोनों है।
चुनाव के बाद स्पष्ट बहुमत के साथ नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ध्यान मुख्य रूप से मंत्री चयन और मंत्रालयों के आवंटन पर केंद्रित है। आगामी सरकार को मजबूत जनादेश मिलने के कारण नेतृत्व पर स्पष्ट दृष्टि के साथ सक्षम, जवाबदेह और परिणाम-केंद्रित टीम बनाने का दबाव है। सुशासन, पारदर्शिता और क्रियान्वयन-केंद्रित प्रणाली विकसित करके पिछली कमियों को पुनः न दोहराना सरकार के लिए अवसर और चुनौती दोनों होगी। इसी संदर्भ में पूर्व सचिव गोविंद कुसुम से बातचीत इस प्रकार है :
अभी चुनाव के बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया जारी है। मंत्री चयन और मंत्रालयों का आवंटन कैसे किया जाना चाहिए?
हम संसदीय प्रणाली के अनुसार सरकार बनाते हैं, इसलिए मंत्रालयों के आवंटन के आरंभिक चरण में कुछ खींचतान देखी जा रही है। पहले गठबंधन सरकार के समय ऐसा होता था। कई बार व्यक्तिगत लाभ के कारण ‘मैं यह मंत्रालय लूंगा’ जैसी प्रवृत्ति होती थी।
लेकिन अब जो सरकार बनने जा रही है उसके पास ‘लैंडस्लाइड विजय’ है, यानी अत्यधिक बहुमत है। इस स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत है कि नेतृत्व, खासकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार, देश को कैसे आगे ले जाना है यह स्पष्ट करें। प्रधानमंत्री को अपनी दृष्टि प्रस्तुत करनी होगी क्योंकि वर्तमान संसद से बनने वाली सरकार के लिए पिछली गलतियों को दोहराने की कोई गुंजाइश नहीं है।
गलतियाँ न दोहराने के लिए शुरुआती कदम क्या होने चाहिए?
सबसे पहले एक व्यवस्थित प्रणाली विकसित करनी होगी। एक कार्यात्मक ‘शासन संस्कृति’ स्थापित करनी होगी जिसमें मूल्य और मान्यताएँ हों। शासन प्रणाली की परंपरा की स्थापना प्रारंभ से होनी चाहिए। अब किसी को भी ‘मैं यह मंत्रालय लूंगा’ का रवैया नहीं अपनाना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो यह चिंता का विषय है।
प्रधानमंत्री को किस प्रकार का मंत्रिमंडल बनाना चाहिए?
प्रधानमंत्री को अपनी टीम में संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करके एक सक्षम टीम बनानी चाहिए। पहले की तरह प्रधानमंत्री के निर्देशों की अनदेखी कर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति अब स्वीकार्य नहीं है। प्रधानमंत्री को स्पष्ट कार्ययोजना बनानी चाहिए कि प्रशासन, आर्थिक, उद्योग, कृषि और सामाजिक विकास क्षेत्रों में क्या काम कैसे किए जाएंगे।
कार्यक्रमों के लिए ‘समय सीमा’ निर्धारित करनी होगी। किन कार्यों को तुरंत करना है, किन्हें एक वर्ष या पांच वर्ष के भीतर पूरा करना है इसकी प्राथमिकता तय करनी होगी। पांच वर्षों की रूपरेखा निर्धारित और पारदर्शी होनी चाहिए। कामों की प्रगति के बारे में आम जनता को भी जानकारी मिलने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए।
सेवा प्रदान में कई समस्याएं हैं, इन्हें सुधारने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
सरकार को सभी सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों में तेज और प्रभावी सेवा प्रवाह प्रणाली विकसित करनी चाहिए। सेवा प्रदाता कर्मचारियों को सशक्त बनाकर उनका मनोबल बढ़ाना आवश्यक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि सरकार जनता की आशा लेकर बनी है, इसलिए सफलता के लिए सभी को सहयोग करना होगा।
सेवाग्राही के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करनी होगी। इसके लिए प्रशासनिक क्षेत्र के नौकरशाहों तथा तकनीकी कर्मियों का विश्वास जीतना सरकार का काम है।
अक्सर कर्मचारियों के काम न करने की शिकायत होती है, इसका समाधान क्या हो सकता है?
कर्मचारी इंजन हैं; ड्राइविंग सीट पर बैठा व्यक्ति सरकार है। इंजन को कैसे स्टार्ट करके दौड़ाना है, यह जिम्मेदारी ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की होती है। जब जाम लगे या अन्य समस्या आए तो उन्हें हल करना भी सरकार व नेतृत्व का कार्य है। मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा ‘इस सचिव को लूंगा या हटाऊंगा’ कहने से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि सक्षम कर्मचारी से बेहतर परिणाम लाने और उस पर भरोसा करने की व्यवस्था हो।
मंत्रालयों की संख्या अधिक हो गई है ऐसी आवाजें हैं, इसे कैसे प्रबंधित किया जाए?
मंत्रालयों की संख्या कानूनी सीमा से अधिक न हो इसका ख्याल रखना चाहिए, फिर भी छोटे और चुस्त मंत्रालय बेहतर होते हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रालय नीतिगत दिशा देते हैं, काम करने वाले कर्मचारी हैं। बहुत अधिक मंत्री और मंत्रालय की आवश्यकता नहीं है। एक मंत्री दो मंत्रालय भी संभाल सकता है।
केंद्र सरकार को स्थानीय सरकारों के काम करने का अनुकूल माहौल बनाने पर भी विचार करना चाहिए। स्थानीय सरकार को सुविधाजनक माहौल, संसाधन और विश्वास के साथ काम करने देना चाहिए। स्थानीय सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो, विवाद उत्पन्न करने वाला माहौल नहीं बनाना चाहिए क्योंकि इससे विकास और वादों की पूर्ति में बाधा आती है।
सरकार अब पहले की तरह ‘मैं करूंगा’ की सोच में नहीं रहनी चाहिए, खुद क्षेत्र में जाकर कार्य का दायित्व उठाना चाहिए। स्थानीय स्तर की योजनाओं और शिकायतों को सुनने तथा प्रबंधित करने के लिए अलग प्रणाली बनानी होगी। मंत्रालय के अंदर अलग इकाई बनाकर तत्काल समस्याओं का समाधान और जनसाधारण को जवाबदेही प्रदान करनी होगी।
सांसद भी अपनी विशेषज्ञता के अनुसार मंत्रालय चाहते हैं, इस बार इसमें क्या बदलाव होगा?
मुख्य बात ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति की दृष्टि पर निर्भर करती है। प्रधानमंत्री नियुक्ति का अधिकार रखते हैं। सांसदों की क्षमता और उनकी कार्यक्षमता को आंका कर मंत्रालय प्रदान करना प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है।
केवल विषय पढ़ने से कोई सक्षम नहीं माना जा सकता। अध्ययन और कार्य कौशल अलग होता है। व्यावहारिक ज्ञान का अभाव भी हो सकता है। लोक सेवा के स्तर पर कौन काम कर सकता है और किस प्रकार मिलकर काम करना है, यह प्रधानमंत्री को समझना चाहिए। नेतृत्व क्षमता विकसित करना आवश्यक है। अच्छी टीम बनानी है और उसके कार्य का निरंतर निरीक्षण करना होगा।
सरकार और प्रधानमंत्री को बड़े दिल और व्यापक दृष्टिकोण वाला होना चाहिए। पद प्राप्त करना और कार्यान्वयन करना अलग बातें हैं। हमें अतीत की तुलना में अब कार्य करने पर केंद्रित होना चाहिए।
आंतरिक सुरक्षा, विकास, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं के साथ जातीय, भौगोलिक तथा लैंगिक विवादों का प्रबंधन भी करना होगा।
विदेश नीति और भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। जिम्मेदार व्यक्ति को संवेदनशील और संयमित होना चाहिए। ज्यादा बोलने से बेहतर है कार्य कर दिखाना।
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