Skip to main content

मन्दारीन भाषा के उपन्यास ‘ताईवान ट्रैवलॉग’ ने प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता

६ जेठ, काठमाण्डू। मन्दारीन चीनी भाषा में लिखित उपन्यास ‘ताईवान ट्रैवलॉग’ ने इस वर्ष का बुकर पुरस्कार जीत लिया है। मूल रूप से मन्दारीन में लिखा गया यह पुस्तक दुनिया का पहला ऐसा उपन्यास बन गया है जिसने यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया। मंगलवार शाम लंदन के टेट मॉडर्न में आयोजित विशेष समारोह में ताइवानी लेखिका यांग स्नांग जी और ताइवानी-अमेरिकी अनुवादक लिन किंग को विजेता घोषित किया गया। इन्हें लगभग ८५ लाख नेपाली रुपैयाँ के बराबर पुरस्कार राशि प्रदान की गई, जो लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से वितरित होगी। यह पुरस्कार जीतने वाले वे पहले ताइवानी और ताइवानी-अमेरिकी नागरिक हैं।

सन् १९३८ के जापानी शासित ताइवान की पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में एक जापानी लेखिका की कहानी है। वह लेखिका ताइवान के पाक्कला की यात्रा पर निकलती हैं और वहीं अपनी दोभाषी साथी से प्रेम में पड़ जाती हैं। इस उपन्यास को एक पुरानी यात्रा संस्मरण के अनुवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें पात्रों के विचारार्थ काल्पनिक फुटनोट्स और अनुवादक किंग के ‘वास्तविक’ फुटनोट्स भी शामिल हैं। जूरी पैनल की अध्यक्ष और उपन्यासकार नतासा ब्राउन ने इस लेखन शैली की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘यह पुस्तक रोमांस और औपनिवेशिक उत्तरार्ध के तीखे उपन्यास के रूप में दोहरी सफलता प्राप्त करती है।’

बुकर पुरस्कार की वेबसाइट को दिए गए इंटरव्यू में लेखिका यांग ने उपन्यास की प्रेरणा के बारे में बताया, ‘कोरिया और ताइवान दोनों एक समय जापानी साम्राज्य के उपनिवेश थे। लेकिन, कोरियाई लोग इसके प्रति समान रूप से असंतुष्ट हैं, जबकि ताइवानी इसे घृणा और स्मृति के मिश्रित और द्वंद्वात्मक नजरिए से देखते हैं। मैं समकालीन ताइवानी दृष्टिकोण से इस जटिल परिस्थिति को समझाना चाहती थी।’ यांग उपन्यासों के अलावा निबंध, मंगा और वीडियो गेम के स्क्रिप्ट भी लिखते हैं। ९० के दशक में ताइवानी रोमांटिक उपन्यासों की बढ़ती लोकप्रियता से प्रेरित होकर उन्होंने लेखन शुरू किया था। इसी तरह, अनुवादक किंग भी मौलिक कथाएँ लिखती हैं और उनका पहला उपन्यास ‘वीब’ शीघ्र प्रकाशित होने वाला है।

जवाफ लेख्नुहोस्

तपाईँको इमेल ठेगाना प्रकाशित गरिने छैन। अनिवार्य फिल्डहरूमा * चिन्ह लगाइएको छ