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बारामा भूमिहीनों ने सात बिंदुओं पर मांगे रखी, न माने जाने पर तीन चरणों में आंदोलन की चेतावनी

जीतपुरसिमरा उपमहानगरपालिका के भूमिहीनों ने सात बिंदुओं की मांग के साथ बार के डिवीजन वन कार्यालय में ज्ञापन पत्र सौंपा है। उन्होंने वैकल्पिक आवास और पुनःस्थापन न दिए जाने पर बस्ती खाली न करने तथा लालपूर्जा वितरण के साथ कानूनी स्वामित्व दिलाने की मांग की है। मांगें पूरी न होने पर तीन चरणों में आंदोलन करने की घोषणा करते हुए टोले में सभा, कार्यालय घेराव और राजमार्ग बंद करने की चेतावनी दी है। ६ जेठ, बारा। बार के जीतपुरसिमरा उपमहानगरपालिका के विभिन्न वादों के भूमिहीनों ने सात बिंदुओं की मांगें प्रस्तुत की हैं। बुधवार को डिवीजन वन कार्यालय बार में ज्ञापन पत्र सौंपते हुए उपमहानगरपालिका के १० वाडों के भूमिहीन एवं अव्यवस्थित बसोबासियों ने मांगें पूरी न होने पर तीन चरणों में आंदोलन करने की चेतावनी दी है। जीतपुरसिमरा के जनप्रतिनिधि, अव्यवस्थित बस्तियों के नेतागण और स्थानीय संघ संस्थाओं के प्रतिनिधि डिवीजन वन कार्यालय में पहुंचकर अपनी मांगे रखी हैं। उन्होंने डिवीजन वन कार्यालय से जनता को डराने-धमकाने का काम रोकने, शांतिपूर्ण जीवन जीने का अवसर देने और स्पष्ट कारण के साथ पुनःस्थापना योजना प्रदान करने का आग्रह किया है। वन क्षेत्र को अतिक्रमणकारी कहकर जनता को त्रसित करने के काम से परहेज करने की चेतावनी भी दी है। ‘वर्षों से कर देने वाले, मतदाता, नागरिकता प्राप्त, विद्युत और पेयजल कनेक्शन वाले, विद्यालय और स्वास्थ्य चौकी उपलब्ध लोगों और सरकार द्वारा सभी दायित्व पूरी किए गए नागरिकों को अतिक्रमणकारी कहकर धमकाना अमानवीय, अन्यायपूर्ण और संविधान के विरुद्ध कार्य है,’ ज्ञापन पत्र में उल्लेखित है। जीतपुरसिमरा वाडा नं १ के पथलैया, वाडा नं १६ के टांगीयाबस्ती, पिलुवा–महेन्द्रनगर क्षेत्र, वाडा नं २२ का चकरी, वाडा नं १४ के खयरघारी सहित अन्य क्षेत्रों में पूरी बस्तियां लालपूर्जा के बिना हैं। पिछले वर्ष वन क्षेत्र की जमीन पर सरकार द्वारा बस्तियां बसाए जाने से अब बस्ती हटने का खतरा बढ़ा है, स्थानीय नेता बताते हैं। जीतपुरसिमरा की टांगीयाबस्ती के सुकुम्बासी नेता रमेश सापकोटा कहते हैं, ‘सरकार का अव्यवस्थित बस्ती हटाने का प्रयास गलत नहीं, लेकिन यदि सभी बस्तियों को एक ही नजर से देखा गया तो बड़ा विद्रोह होगा।’ जीतपुरसिमरा के विभिन्न वाडों में कुछ बस्तियां वन क्षेत्र से संबंधित हैं और पहले किसी सरकारी निकाय ने वहां बस्ती बसाई है, इसलिए बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बस्ती खाली नहीं कराई जानी चाहिए यह मांग है। कुछ दिन पहले डिवीजन वन कार्यालय बार ने डोजर चलाकर जीतपुरसिमरा वाडा नं २२ के तीन नंबर पुल क्षेत्र की बस्ती हटाई थी जिससे स्थानीय लोग त्रस्त हैं। डिवीजन वन कार्यालय अन्य स्थानों पर भी बस्ती हटाने की सूचना जारी कर रहा है, इसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और भूमिहीन तथा अव्यवस्थित बस्तियों के लोगों ने बुधवार को डिवीजन वन कार्यालय में ज्ञापन पत्र सौंपा। कार्यालय ने बताया है कि जीतपुरसिमरा के वाडा नं १ के दुधौरा खोला क्षेत्र और पथलैया के पूर्व टोले की बस्ती हटाने की तैयारी है। डिवीजन वन प्रमुख सुजीत कुमार झाका के अनुसार, पथलैया के पूर्व टोले के कुछ घरों तथा दुधौरा खोला किनारे की बस्ती के अलावा अन्य स्थानों पर फिलहाल बस्ती हटाने की योजना नहीं है। ‘हमने वन से जुड़े सभी बस्तियों को खाली कराने के लिए नहीं कहा है, न ऐसी कोई सूचना जारी की गई है,’ उन्होंने कहा। मांग निम्नलिखित हैं: १. जीतपुरसिमरा के वाडा नं १, २, ३, ४, १४, १६, १७, १८, २१ और २२ के भूमिहीनों को तत्काल हटाया न जाए। २. वैकल्पिक आवास, पुनःस्थापना और सम्मानजनक व्यवस्था के बिना किसी भी बस्ती में डोजर और बल का प्रयोग न किया जाए। ३. दशकों से बसे हुए नागरिकों को लालपूर्जा देकर कानूनी स्वामित्व सुनिश्चित किया जाए। ४. राष्ट्रीय भूमि आयोग के माध्यम से भूमिहीन, सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बस्तियों का आंकड़ा संकलित कर प्रमाणित लोगों को लालपूर्जा दिया जाए तथा बाकी प्रक्रिया आगे बढ़े। ५. जन सम्पदा, नदी, ऐलानी एवं सार्वजनिक जमीनों के प्रबंधन में मानव अधिकारों और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी जाए। ६. भूमिहीन, सुकुम्बासी और अव्यवस्थित बस्तियों पर बल प्रयोग, डर, धमकी और भेदभावपूर्ण व्यवहार तत्काल बंद किया जाए। ७. स्थानीय सरकार, जनकार्यालय, भूमि आयोग और संबंधित पक्षों के साथ वार्ता कर दीर्घकालीन समाधान खोजा जाए। आंदोलन के कार्यक्रम इस प्रकार हैं: मांगें पूरी न होने पर तीन चरणों में आंदोलन किया जाएगा। पहले चरण में टोला और वाडा स्तर पर जनसभा, हस्ताक्षर संग्रह, शांतिपूर्ण धरना और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। दूसरे चरण में डिवीजन तथा सेक्टर वन कार्यालय घेराव, प्रदर्शन, विरोध सभाएं, सड़क बहस और नागरिक अभियान चलाए जाएंगे। तीसरे चरण में पालिका और प्रशासनिक कार्यालय घेराव, त्रिभुवन और महेन्द्र राजमार्ग घेराव तथा यदि बल प्रयोग हुआ तो दोनों राजमार्ग अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने की चेतावनी दी गई है।

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