
गृह मंत्री नियुक्ति में क्यों है उलझन?
समाचार सारांश: प्रधानमत्री बालेन शाह के अधीन गृह मंत्रालय एक महीने से बिना मंत्री के संचालित हो रहा है। पूर्व गृह मंत्री सुधन गुरुङ द्वारा संपत्ति शुद्धिकरण संबंधी आरोपों के बाद इस्तीफा देने के बाद ९ वैशाख से मंत्रालय में नया मंत्री नियुक्त नहीं हुआ है। सरकार ने ३१ वैशाख को पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भण्डारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर १५ दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। ६ जेठ, काठमाडौं। सबसे संवेदनशील माना जाने वाला गृह मंत्रालय लगभग एक महीने से सीधे प्रधानमंत्री की अप्रत्यक्ष निगरानी में संचालित हो रहा है। सुधन गुरुङ के इस्तीफा देने के बाद ९ वैशाख से गृह मंत्रालय का कोई अलग मंत्री नहीं है। यह मंत्रालय प्रधानमंत्री बालेन शाह के अधीन चल रहा है।
सुरक्षा और कार्यप्रणाली के लिहाज से सबसे संवेदनशील गृह मंत्रालय में कोई विभागीय मंत्री न होने के कारण इसका सीधा असर सेवा प्रवाह पर पड़ा है। गृह मंत्रालय के माध्यम से देश की पूरी शांति सुरक्षा, नीति, कानून, मानक और योजनाओं का कार्यान्वयन और नियमन होता है। विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा, महत्वपूर्ण स्थलों, संरचनाओं और कूटनीतिक मिशनों की सुरक्षा भी गृह मंत्रालय के दायरे में आती है।
देश की समग्र शांति सुरक्षा, सूचना संग्रह, आतंकवादी गतिविधियों की निगरानी एवं कार्रवाई, अपराध अनुसन्धान जैसे गंभीर मामलों का संबंध गृह मंत्रालय से है। ७७ जिलों के प्रशासनिक कार्यालय, ८० हजार कर्मियों वाला नेपाल पुलिस बल और लगभग ३८ हजार सदस्यीय सशस्त्र प्रहरी बल का कमांड भी गृह मंत्रालय के अधीन है। अपराध रोकथाम, नियंत्रण और जांच भी गृह मंत्रालय के कर्तव्यों में शामिल है। नागरिकता, हथियारों, विस्फोटक सामग्री के उपयोग एवं नियंत्रण का विषय भी गृह मंत्रालय से जुड़ा है। हिरासत एवं कारागार सुरक्षा तथा शरणार्थी संबंधी मामले भी गृह मंत्रालय के कार्यक्षेत्र में आते हैं।
हाल ही में रोहिंग्या शरणार्थी नेपाल में प्रवेश कर सकते हैं, इसलिए सीमा नाकों की सुरक्षा कड़ी की गई है। इस स्थिति में पिछले एक महीने से गृह मंत्रालय का कोई विभागीय मंत्री न होना शांति और सुरक्षा के क्षेत्र में अतिरिक्त चुनौतियां उत्पन्न कर रहा है। कार्यविभाजन नियमावली २०८३ के अनुसार गृह मंत्रालय की जिम्मेदारियां ५२ हैं। अन्य मंत्रालयों के अधीन न आने वाले कई कार्य भी गृह मंत्रालय के क्षेत्राधिकार में आते हैं।
प्रधानमंत्री के बाद सबसे आकर्षक मंत्री पद माने जाने वाले गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के लिए सक्रिय प्रयास होते रहे हैं। लेकिन गृह मंत्रालय कई माह से बिना मंत्री के है, जिससे आंतरिक सुरक्षा से जुड़े राजनीतिक नेतृत्व की अनुपस्थिति पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। बिना गृहमंत्री सुरक्षा, प्रशासन और संकट प्रबंधन की मुख्य जिम्मेदारी किसके पास होगी, यह अभी बहस का विषय है। कई ऑपरेशनल निर्णय सीधे गृह मंत्री के निर्देश के बिना नहीं हो पाते। संकट प्रबंधन से लेकर संचालन तक गृह मंत्री की भूमिका आवश्यक होती है।
पूर्व गृह मंत्री नारायणकाजी श्रेष्ठ ने भी नकली भूटानी शरणार्थी मामले में ऑपरेशनल योजना बनाकर निर्देश दिए थे। उच्च पदस्थ राजनीतिक नेतृत्व की कमी का प्रभाव कार्यान्वयन में दिखता है। नेपाल पुलिस के एक एआईजी के अनुसार, ‘पूर्व गृह मंत्री रहते कई उच्च पदस्थ गिरफ्तार हुए थे, अब कोई मंत्री नहीं है तो किनके खिलाफ कार्रवाई हुई? पुलिस को आदेश के बिना उच्च पदस्थों पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मंत्री न होने के कारण पुलिस नियमावली प्रतिनियुक्ति में भी देरी हो सकती है।’
गृह मंत्रालय के पूर्व सचिव चंडीप्रसाद श्रेष्ठ के अनुसार, ऑपरेशनल कार्य गृह सचिव द्वारा ही संचालित होते हैं, इसलिए बड़ी समस्याएं नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘नीतिगत फैसलों में मंत्री की अनुपस्थिति से समस्या आ सकती है, लेकिन मंत्री न होने से बड़ा संकट नहीं होगा। मंत्रालय को अलग किए जाने के बाद मंत्री नियुक्त करना स्वाभाविक है।’
मंत्री न होने के कारण गृह मंत्रालय के कार्य सुधन गुरुङ के व्यक्तिगत सचिव से लेकर प्रधानमंत्री बालेन शाह के निर्देशों के अनुसार संपादित हो रहे हैं। सुधन गुरुङ ने इस्तीफा देने के बाद भी उनके निजी सचिव जेम्स कार्की अभी भी कार्यरत हैं। मनोहर किनार की नुक्कड़वासी बस्ती हटाने के लिए कार्की स्वयं गए थे।
सुधन गुरुङ पर संपत्ति शुद्धिकरण मामले में जांच चल रही है। विवादित कारोबारी दीपक भट्ट से साझेदारी उजागर होने के बाद वह विवाद में फंसे थे। संपत्ति विवरण में छुपाए गए शेयर और विवादित व्यवसायी की कंपनी में शेयर मिलने के बाद ९ वैशाख को गुरुङ ने प्रधानमंत्री के समक्ष इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देते हुए उन्होंने फेसबुक पर लिखा था, ‘शेयर संबंधी प्रश्नों को गंभीरता से लिया है। पद से बड़ा नैतिकता होती है। जनविश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं। मेरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।’
इस्तीफा देने के २० दिन बाद ३१ वैशाख को सरकार ने जांच समिति गठित की। मंत्रिपरिषद ने २८ वैशाख को पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भण्डारी की अध्यक्षता में समिति बनाई। महालेखा नियंत्रक शोभाकांत पौडेल और सहन्यायविद् अच्युतमणि नेउपाने सदस्य हैं। समिति को १५ दिन का समय दिया गया है, जिसमें आधा समय बीत चुका है। समिति ने सत्य तथ्य का अध्ययन कर सरकार को सुझाव सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही है।
गृह मंत्री के पद खाली रखने से जांच पूरी होने के बाद सुधन गुरुङ के गृह मंत्रालय में पुनः लौटने की संभावना दिखाई दे रही है।