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पूर्व अर्थमंत्री खतिवड़ा ने बजट में आयकर की न्यूनतम सीमा न बढ़ाने का सुझाव दिया

पूर्व अर्थमंत्री डॉ. युवराज खतिवड़ा ने आगामी बजट में आयकर की न्यूनतम सीमा न बढ़ाने का सुझाव दिया है। उन्होंने अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले द्वारा आर्थिक वर्ष २०७८/८४ के बजट निर्माण के दौरान पूर्व अर्थमंत्रियों के साथ हुई चर्चा में यह सुझाव दिया। डॉ. खतिवड़ा ने राजस्व वृद्धि की सीमा १० से १२ प्रतिशत तक रखना उपयुक्त बताया और इसे १५ प्रतिशत तक न बढ़ाने की सिफ़ारिश की। उन्होंने कहा, “राजस्व १२ खरब पार करने के बावजूद १३ खरब तक पहुंचने की संभावना कम है।”

डॉ. खतिवड़ा ने बजट का आकार लगभग २० खरब ५० करोड़ के आसपास होना चाहिए और राजस्व लक्ष्यों को अत्यधिक महत्वाकांक्षी नहीं बनाना चाहिए, इस बात पर सहमति जताई। उन्होंने अन्तःशुल्क में कमी लाने और मूल्य अभिवृद्धि कर को दो दरों में न ले जाने का भी सुझाव दिया। साथ ही, मधेश क्षेत्र में कृषि के योगदान में गिरावट होने पर इस विषय पर ध्यान देने का आग्रह किया।

उन्होंने स्वास्थ्य बीमा में समस्या न उत्पन्न करने तथा कृषि के लिए अनुदान आवश्यक होने की बात कही। राष्ट्रीय गौरव के कार्यक्रमों में पूर्व में मनमानी हुई है, जिसे सुधारा जाना चाहिए, इस पर भी उन्होंने सुझाव दिया। उन्होंने कहा, “केवल दो-चार लोगों को गिरफ्तार करके समस्या का समाधान नहीं हो सकता।” वित्तीय क्षेत्र में सुधार के लिए राष्ट्र बैंक के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने की सलाह भी दी।

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