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नेपाल चुनाव २०८२ : ‘जिज्ञासा, भय और नागरिकता के मिले-जुले अनुभव’

बसंतपुर स्थित मतदान केंद्र पर वोट डालती हुई एलिशा माहर्जन।

तस्वीर स्रोत, Kamal Pariyar

काठमाडौं बसंतपुर की एलिशा माहर्जन कुछ महीने पहले तक यह सोचती थीं कि ‘वोट डालूँ या न डालूँ, क्या फर्क पड़ेगा?’

लेकिन भदौ में हुए ‘जेन जी आंदोलन’ के बाद इस १९ वर्षीय किशोरी की सोच बदली। गुरुवार को अपने मोहल्ले के मतदान केंद्र पहुँचीं और पहली बार वोट डाला।

उन्होंने बातचीत में कहा, “जेन जी आंदोलन से प्रेरित होकर हमने भी मतदान किया।”

भदौ में युवा भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ राजधानी में प्रदर्शन हुए थे।

कम से कम ७७ लोगों की मौत के बाद बनी अंतरिम सरकार ने प्रतिनिधि सभा भंग कर आम चुनाव की घोषणा की थी।

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