
दुर्लभ कैंसर से जूझती शांति थामी की कहानी
शारीरिक पीड़ा से बड़ी मानसिक शक्ति होती है, यह बात शांति ने पांच ऑपरेशनों, संक्रमण और अनिश्चितता के बीच भी साबित की है।
समाचार सारांश
संपादकीय समीक्षा की गई।
- दुर्लभ मेलानोमा कैंसर से पीड़ित शांति थामी पाटन अस्पताल में ४ चक्र इम्यूनोथेरेपी के बाद कैंसर मुक्त हो गई हैं।
लंबे समय से थायराइड, कमर दर्द और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही शांति थामी का दैनिक जीवन संघर्षपूर्ण था। लगभग एक साल पहले उनकी टांग के पंजे में एक छोटा काला दाग दिखाई दिया।
शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य घाव, एलर्जी या चोट समझकर घरेलू उपचार किया, लेकिन दाग बढ़ता गया, घाव बन गया, सूजन हुई और दर्द शुरू हो गया।
जब समस्या गंभीर हुई, तो परिवार ने उन्हें वीर अस्पताल ले जाया। वहां से थायराइड विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ होते हुए प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया। कई जांच और परामर्श के बाद भाद्र के समीप पहला बायोप्सी किया गया।
२०८२ आश्विन (दशहरा के अगले दिन) उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया और तीन महीनों के भीतर पांच बड़े ऑपरेशन किए गए। टांग के पंजे, घुटने सहित कई जगहों से बार-बार घाव काटे गए। संक्रमण भी हुआ और ठीक होने में देरी हुई। परिवार ने 3 लाख रुपये से अधिक खर्च किए, लेकिन स्पष्ट निदान नहीं मिल पाया।
पांचवें ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने परिवार को बताया, ‘‘यह मेलानोमा है, एक दुर्लभ और आक्रामक कैंसर।’’
यह कैंसर तेजी से फैलता है, शरीर के अन्य अंगों पर हमला करता है और सामान्य उपचार से आसानी से नियंत्रित नहीं होता। परिवार को कई जगहों से ‘‘उपचार संभव नहीं’’, ‘‘जीवन छोटा है’’ जैसे निराशाजनक संदेश मिले।
आशा की नई किरण: इम्यूनोथेरेपी
वीर अस्पताल से निराश होकर लौटे इस परिवार को अंतिम आशा पाटन अस्पताल में मिली। वहां डॉ. अरुण शाही के नेतृत्व में कैंसर विशेषज्ञों की टीम ने उन्हें इम्यूनोथेरेपी उपचार शुरू करने का निर्णय लिया।
बांग्लादेश में निर्मित, नेपाल में स्वीकृत दवाओं का उपयोग हुआ। अब तक ४ चक्र इम्यूनोथेरेपी पूरी हो चुकी है। चौथा चक्र वैशाख १५ को दिया गया। उपचार २१ दिनों के अंतराल पर चलता है और कुल २ साल तक जारी रखा जाता है। प्रत्येक ३ चक्र के बाद पेट स्कैन किया जाता है।
हाल के पेट स्कैन में परिवार में खुशी छा गई। शांति के शरीर में कैंसर नहीं पाया गया और डॉक्टरों ने ‘कैंसर मुक्त’ घोषित किया। पुराना घाव ठीक हो रहा है, सूजन कम हुई है और स्वास्थ्य धीरे-धीरे सुधार रहा है।
कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अरुण शाही ने इसे ‘मेडिकल चमत्कार’ कहा है। उन्होंने कहा, ‘‘दुर्लभ और आक्रामक कैंसर में इतना अच्छा जवाब इतनी जल्दी मिलना बेहद कम होता है।’’
आर्थिक संघर्ष जारी
शांति की यह यात्रा सिर्फ चिकित्सा की नहीं, बल्कि वित्तीय और भावनात्मक संघर्ष की भी कहानी है। एक चक्र इम्यूनोथेरेपी का खर्च ३ लाख ६० हजार से ४ लाख रूपए तक है। परिवार की मासिक आमदनी ४० हजार से कम है।
ऋण लेकर, रिश्तेदारों से मदद मांगकर, विदेश में रहने वाले पोते-पोतियों की सहायता से उपचार चल रहा है। खर्च के कारण शांति की बेटियां विदेशी रोजगार के लिए गई हैं। परिवार के एक सदस्य ने कहा, ‘‘बहनें विदेश जानें के लिए मजबूर हुई हैं, इसका दर्द भी इसी उपचार का परिणाम है।’’
भले ही कुछ राहत मिली हो, आगामी चक्रों के लिए आर्थिक चिंता बनी हुई है।
प्रेरणादायक संदेश
शांति थामी की कहानी सभी नेपाली लोगों के लिए हार न मानने, उम्मीद बनाए रखने और संघर्ष करते रहने का उदाहरण बन गई है। इस सफलता ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं। पहला, नेपाल में ही आधुनिक उपचार संभव है, विदेश जाने से पहले स्थानीय विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए।
दूसरा, कैंसर उपचार में देरी से पहचान और नकारात्मक सलाह बड़ी समस्या है। डॉक्टरों को आशा जगाने वाले सकारात्मक परामर्श देने चाहिए।
शांति की यात्रा यह स्पष्ट करती है कि कैंसर अंत नहीं, एक नई शुरुआत हो सकता है। सही समय पर सही उपचार, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार का समर्थन से इसे जीता जा सकता है। देर से पहचान समस्या बढ़ाती है, लेकिन सही डॉक्टर और आधुनिक उपचार जीवन वापस ला सकते हैं।
नकारात्मक बातें सुनकर आशा नहीं खोनी चाहिए क्योंकि चिकित्सा विज्ञान हर दिन नई संभावनाएं खोल रहा है। शांति ने पांच ऑपरेशन, संक्रमण और अनिश्चितताओं के बावजूद बड़ी मानसिक ताकत दिखाई है।
सरकार और समाज के लिए आह्वान
यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि नेपाली समाज और सरकार के लिए एक बड़ा आह्वान है। डॉ. अरुण शाही ने सरकार से इम्यूनोथेरेपी और आधुनिक कैंसर दवाओं पर कर में छूट, दाम नियंत्रण और स्वास्थ्य बीमा में समावेशिता की मांग की है।
उन्होंने कहा, ‘‘महंगी दवाओं के लिए विशेष राहत कोष और सुविधाजनक ऋण की व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही नेपाल में कैंसर दवाएं उत्पादन करने के लिए औषधि उद्योग को प्रोत्साहन और तकनीकी सहायता देनी चाहिए।’’
इससे दवाओं की कीमत घटेगी, रोजगार सृजित होगा और कुशल जनशक्ति विदेश पलायन से बच सकेगी।

डॉ. शाही ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में कैंसर उपचार केंद्रों की क्षमता बढ़ाकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा पहुंचाना आवश्यक है। इम्यूनोथेरेपी जैसे आधुनिक उपचार सुलभ किए जाएं ताकि जीवन रक्षा आसान हो।
वे कहते हैं कि समाज के सभी स्तरों से सहयोग की जरूरत है। कैंसर पीड़ितों और उनके परिवारों को अनावश्यक डर नहीं दिखाना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को व्यक्तिगत, सामाजिक और संस्थागत मदद उपलब्ध कराई जा सकती है।
शांति थामी अभी भी उपचार के दौर में हैं और पूरी तरह ठीक होकर परिवार के पास लौटने का सपना देख रही हैं।