समाचार सारांश
- “सिर्फ व्यावसायिक सफलता के आधार पर नहीं, सांस्कृतिक योगदान के आधार पर भी राज्य को फिल्मों को सम्मान देना चाहिए,” ऐसा कहते हुए एमाले सांसद पद्मा अर्याल ने विधेयक को स्पष्ट करने की आवश्यकता बताई।
- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वाली फिल्मों को राज्य को विशेष अनुदान और कर छूट प्रदान करनी चाहिए, उन्होंने कहा।
- किसी समुदाय की कहानी पर फिल्म बनाते समय उसी समुदाय से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है और फिल्म विकास बोर्ड को एक औपचारिक संस्था मात्र न बनाना चाहिए, उन्होंने बताया।
काठमांडू – एमाले सांसद पद्मा अर्याल ने कहा है कि फिल्मों को केवल व्यावसायिक सफलता के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक योगदान के आधार पर भी राज्य द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधि सभा की आज की बैठक में राष्ट्रीय सभा में पंजीकृत चलचित्र विधेयक 2082 पर विचार करने के प्रस्ताव पर अपनी धारणा व्यक्त करते हुए उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘सिर्फ व्यावसायिक सफलता के आधार पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक योगदान के आधार पर भी राज्य को फिल्मों का सम्मान करना चाहिए। इस विषय में विधेयक को स्पष्ट बनाना आवश्यक है।’
उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान वाली कथाओं पर आधारित फिल्मों ने अच्छी आमदनी की है और ऐसी फिल्मों को राज्य द्वारा विशेष अनुदान और कर में छूट प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी समुदाय से संबंधित कहानी पर फिल्म बनाते समय उस समुदाय से अग्रिम अनुमति लेना अनिवार्य है। ‘अन्यथा, इस विषय में विवाद होने पर संबंधित निकाय जवाबदेह होगा,’ उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म विकास बोर्ड को सिर्फ एक औपचारिक संस्था बना कर न रखा जाए।

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