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ट्रम्प ने ओमान को क्यों दी धमकी? विश्लेषकों का नजरिया

१४ जेठ, काठमाडौं। बुधवार एक पत्रकार ने होर्मुज जलमार्ग पर व्यापार विनियमन के विषय में ईरान और ओमान की भूमिका के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से राय मांगी। पत्रकार ने पूछा – ‘क्या आप ईरान और ओमान को इस जलमार्ग का नियंत्रण करने देने के लिए कोई अस्थाई समझौता स्वीकार करेंगे?’ ट्रम्प ने धमकी भरे स्वर में जवाब दिया, ‘किसी का भी नियंत्रण वहाँ नहीं होगा। यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र है और ओमान को भी अन्य देशों की तरह सभ्य व्यवहार करना चाहिए, नहीं तो हमें उन्हें उड़ा देना पड़ेगा।’ उनके उत्तर से प्रारंभ में ऐसा लगा कि उन्होंने गलती से ‘ईरान’ के स्थान पर ‘ओमान’ कह दिया होगा। लेकिन बाद में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस बयान की आधिकारिक ट्रांसक्रिप्ट के साथ इसे सोशल मीडिया पर साझा किया और उसी अरब देश के प्रति संकेत की पुष्टि की।

अमेरिका और ओमान के बीच २०० वर्षों से भी अधिक पुराना संबंध है और दोनों देशों को निकट सहयोगी राष्ट्र के रूप में जाना जाता है। सुरक्षा साझेदारी, मुक्त व्यापार समझौते, विज्ञान और तकनीकी सहयोग जैसी विभिन्न क्षेत्रों में उनकी साझेदारी है। ओमान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता की भूमिका भी निभाई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माएल बाघाई ने गुरुवार एक सार्वजनिक विज्ञप्ति में ‘अमेरिकी अधिकारियों की धमकी’ के बाद ओमान के प्रति एकजुटता जताई और बंदर अब्बास क्षेत्र में अमेरिकी हमले की निंदा की। इसके बाद अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान पर नया हमला किया, जो होर्मुज जलमार्ग के सैन्य क्षेत्र को निशाना बना रहा है।

कमजोर युद्धविराम के बीच यह इस सप्ताह ईरान पर दूसरा अमेरिकी हमला था। ईरानी पक्ष ने अमेरिका के इस कदम को ‘आक्रमण’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसी गतिविधियाँ दोहराई गईं, तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलमार्ग के आसपास चार खतरनाक ईरानी लड़ाकू ड्रोन गिराए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक आक्रमण का निशाना बंदर अब्बास पोर्ट में मौजूद ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन था, जहां पांचवां ड्रोन लॉन्च के लिए तैयार हो रहा था। पिछले सोमवार रात को अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास पर हमला किया था। सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हकिन्स ने जारी बयान में इसे ‘आत्मरक्षा के तहत हमला’ बताया है।

ईरान ने इसे अपने युद्धविराम का ‘गंभीर उल्लंघन’ मानकर आलोचना की है। एक उच्चस्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल कतार में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्धविराम समझौते के दौरान इन हमलों को अंजाम दिया गया। ऐसे हमले और कमजोर युद्धविराम से पश्चिम एशिया का भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बुधवार बंदर अब्बास हवाई अड्डे के निकट एक अमेरिकी हवाई ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया है। हमले का स्थान सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन कुवैत के आकाश में मिसाइल और ड्रोन विफल करने की सूचना के बाद ईरान की यह घोषणा सामने आई।

ईरानी पक्ष ने अमेरिकी कदमों को ‘आक्रमण’ मानते हुए चेतावनी दी है कि यदि ऐसी गतिविधियां दोहराई गई तो वे ‘निर्णायक’ प्रतिक्रिया देंगे और परिणाम की पूरी जिम्मेदारी आक्रमणकारियों की होगी। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजिजी ने बुधवार को ट्रम्प की टिप्पणियों के जवाब में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि ईरान अमेरिकी ‘रेड लाइन’ पर टिककर नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा निर्धारित रेड लाइन में यूरेनियम संवर्धन का अधिकार, होर्मुज जलमार्ग पर अधिकार और प्रतिबंधों को हटाने की मांग शामिल है।

अजिजी ने कहा, ‘ट्रम्प इस रणनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोज रहे हैं; कभी धमकियां देते हैं और कभी समझौते के लिए अपील करते हैं।’ इस बीच अमेरिका ने ‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह संस्था होर्मुज जलमार्ग में जहाजों के आवागमन प्रबंधन के लिए ईरान द्वारा गठित की गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि इस संस्था के साथ सहयोग करने वाले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की मदद कर सकते हैं और उन पर प्रतिबंध लगना संभव है।

‘पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ ने पिछले सप्ताह सार्वजनिक किए गए नक्शे में होर्मुज जलमार्ग के दोनों ओर व्यापक जल क्षेत्र पर तेहरान के दावे को फिर से दोहराया था। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, ‘ईरानी सैन्य प्रयास विश्व व्यापी समुद्री व्यापार को जबरन नियंत्रित करने की निरंतर कोशिशों से पता चलता है कि वहां की शासन व्यवस्था नकदी की कमी से जूझ रही है।’ ट्रम्प ने बुधवार को ईरान के साथ समझौते से अभी संतुष्ट न होने और प्रतिबंध हटाने पर कोई बातचीत नहीं करने का आरोप लगाया।

कई विश्लेषकों ने ट्रम्प के कुछ कदमों को ‘मैडमैन थ्योरी’ के विस्तार के रूप में देखा है। ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान समझौता करना चाहता है और हम भी वही चाहते हैं। अभी यह स्थिति नहीं आई है, हम अभी संतुष्ट नहीं हैं लेकिन होंगे। अन्यथा हम पूरी कार्रवाई करेंगे।’ ट्रम्प की धमकियों और लगातार हमलों ने विभिन्न प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि कुछ देश भविष्य में अमेरिका के भूभाग बन सकते हैं, जो उनके कथित साम्राज्यवादी विस्तार की सोच को और विवादास्पद बनाता है।

इस प्रतिक्रिया में अमेरिका स्थित अधिकारवादी संस्था ‘डन’ के वकालत निदेशक राएद जरार ने ट्रम्प की टिप्पणियों को ‘माफिया जैसी’ बताया। जरार ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र के अनुच्छेद किसी भी राष्ट्र के खिलाफ सैन्य धमकी को निषिद्ध करते हैं और यह प्रतिबंध अमेरिका को भी बांधता है।’ उनके अनुसार, वाशिंगटन का उद्देश्य तेल मार्ग को पुनः खोलना है, लेकिन जलक्षेत्र के नजदीक एक अरब देश को ‘उड़ाने’ की धमकी देना कानूनी रूप से गलत मानसिकता है। इस मानसिकता ने फरवरी में युद्ध को जन्म दिया था। ‘ट्रम्प प्रशासन द्वारा कराए जाने वाले किसी भी युद्धविराम को राष्ट्रपति के मंत्रिपरिषद की अगली बैठक तक ही माना जा सकता है,’ उन्होंने कहा।

ईरानी विश्लेषक फोआद इजादी ने कहा – ईरान होर्मुज जलमार्ग पर अपनी रणनीति को सैन्य संघर्ष से हटाकर कानूनी सार्वभौमिकता की ओर मोड़ रहा है। ‘संयुक्त राज्य अमेरिका ११,००० किलोमीटर दूर है और उसकी अधिकारिता केवल मैक्सिको की खाड़ी तक सीमित है।’ इजादी के अनुसार, होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह से ईरान और ओमान के नियंत्रण में है और वहां कोई अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र नहीं है। लेकिन तेहरान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से नेविगेशन शुल्क वसूलने का अधिकार रखता है। ऐसा नियम तुर्की, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अपने जलमार्गों में भी लागू किया है।

कई जानकार ट्रम्प के कदमों को ‘मैडमैन थ्योरी’ के विस्तार के रूप में देखते हैं, जो सैन्य कारवाही की संभावना दिखाकर विरोधियों को दबाव में लाता है। ट्रम्प की धमकी को ‘गनबोट कूटनीति’ भी कहा जाता है, जिसमें सैन्य शक्ति के सहारे कूटनीति की जाती है। इसी कूटनीतिक आधार पर ट्रम्प ने ईरान और ओमान की संयुक्त जलमार्ग प्रबंधन प्रस्ताव को खारिज किया माना जाता है।

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