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कसरी बदल्दै छ प्रविधिले युद्धको रूप ? – Online Khabar

युद्ध के स्वरूप में तकनीक कैसे बदलाव ला रही है?

१५ जेठ, काठमाडौँ। सन् २०२२ में यूक्रेन के युद्ध क्षेत्र में देखी गई ट्रेंच युद्ध और भारी तोपखाने का दृश्य अब पूरी तरह अलग हो चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने से शुरू हुई संघर्ष किसी पूरी तरह से भिन्न है। हालांकि, इन दोनों संघर्षों में कुछ समानताएँ भी नजर आई हैं। युद्ध शुरू हुए लगभग तीन महीने के बाद भी ये समानताएँ अधिक स्पष्ट हो रही हैं। दोनों संघर्षों में शक्तिशाली सैन्य बल वाले देश अपने प्रतिद्वंद्वी को पराजित नहीं कर पाए हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चार साल पहले अपनी विशेष सैन्य अभियान शुरू करते समय शीघ्र विजय की उम्मीद जताई थी। उत्तरी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी प्रारंभ में ईरान के खिलाफ युद्ध ४ से ५ सप्ताह में समाप्त होने का दावा किया था। ईरान के खिलाफ यह संघर्ष गत २८ फरवरी को शुरू हुआ था।

पेरिस के प्रतिष्ठित सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय साइंसेज पो की की प्रोफेसर निकोल ग्राजेव्सकी, जो ईरान और रूस मामलों की विशेषज्ञ हैं, उन्होंने कहा, ‘रूस और अमेरिका दोनों के सैन्य अभियान अपेक्षा के अनुसार सफल नहीं हुए हैं।’ उनके अनुसार इसका मुख्य कारण दोनों पक्षों का अहंकार है। हालिया वार्ताओं में ईरान और अमेरिका के बीच प्रारंभिक शांति प्रयासों में कुछ प्रगति देखने को मिली है, लेकिन सोमवार को अमेरिका द्वारा ईरान पर पुनः हवाई हमला करने से यह प्रगति अस्थिर हो गई है। चाहे समझौता हो या न हो, इस युद्ध ने आधुनिक युद्ध के विकास के बारे में महत्वपूर्ण सबक दिए हैं। यूक्रेन संघर्ष ने भी ऐसा ही संदेश दिया है।

तकनीक युद्ध के स्वरूप को बदल रही है, जहां पारंपरिक सैन्य झड़प में कमजोर पक्ष सीधे तौर पर अधिक शक्तिशाली सेना से मुकाबला नहीं कर पाते। यूक्रेन और ईरान ने ‘असिमेट्रिकल’ रणनीति अपनाई है, जिसके कारण ये राष्ट्र शक्तिशाली सेनाओं को रोकने में सफल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों में हमला कर अमेरिका पर दबाव डाला है। कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों के बड़े सैन्य बेस कैंप और ऊर्जा केंद्रों पर ड्रोन के एकतरफा हमले किए गए, जिससे फारस की खाड़ी क्षेत्र में आतंक फैल गया। साथ ही, ईरान ने हॉर्मुज जलमार्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए समुद्री माइन और तेज गति के हथियारबंद नौकाओं से डर पैदा किया है। दूसरी ओर, यूक्रेन ने मास्को में पहुंचकर रूसी सैनिक अधिकारियों की हत्या की है और तेल शोधन केंद्रों तथा भंडारण स्थलों पर नियमित हमले जारी रखे हैं। यूक्रेन ने काला सागर की नौसेना को कमजोर करने के लिए समुद्री ड्रोन का भी उपयोग किया है।

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, ये संघर्ष नई तकनीक और आविष्कारों ने युद्ध के स्वरूप को किस प्रकार बदल दिया है यह सबसे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। अमेरिकी रक्षा के कुछ स्रोत बताते हैं कि सऊदी अरब के ‘प्रिंस सुल्तान एयर बेस’ की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंसयुक्त ‘ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम’ का इस्तेमाल हो रहा है। यह प्रणाली शुरू में यूक्रेन ने रूस के हमलों से बचाव के लिए विकसित की थी। वहीं, लेबनान के लड़ाकू समूह हिज़्बुल्लाह ने इजरायली सैनिकों पर विस्फोटक ड्रोन से हमला किया है, जिसे फाइबर-ऑप्टिक केबल द्वारा नियंत्रित किया जाता है। फारस की खाड़ी में प्रयुक्त सेंसर, निर्देशित मिसाइल और एआई तकनीक युक्त ड्रोन की बहु-स्तरीय प्रणाली दुनिया भर में तेजी से फैल सकती है। ‘कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस’ के विशेषज्ञ माइकल कॉफमैन के अनुसार, इन युद्धों ने ‘मैदान में व्यापक और सटीक हमलों की तकनीक के प्रवेश’ को दर्शाया है। वे कहते हैं, हिज़्बुल्लाह और माली के लड़ाके भी आर्थिक और सुलभ तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह प्रणाली छोटे और मध्यम शक्तियों के लिए भी युद्धभूमि में सटीक निशाने का तकनीकी उपयोग आसान हो जाएगा।

इसी तरह की आक्रमण रणनीतियाँ गत अप्रैल में मध्य पूर्व के संघर्ष में युद्धविराम से पहले देखी गई थीं। वहां बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ भारी मात्रा में ड्रोन (ड्रोन स्वार्म्स) भेजकर हमला किया गया था। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार ऐसी रणनीति पहली बार रूस ने यूक्रेन पर हमला करते समय अपनाई थी। सन् २०२२ में ईरान ने रूस को ‘साहेद’ ड्रोन प्रदान किया था, जिसे मास्को ने यूक्रेन पर इस्तेमाल किया। इसी वर्ष ईरान उन ड्रोन को खाड़ी देशों में भी तैनात कर रहा है। बदले में, रूस ने भी ईरान को कुछ सैन्य सहायता दी है, जिसका पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार रूस कैस्पियन सागर के ऊपर ड्रोन पार्ट्स भेज रहा है।

विशेषज्ञ ग्राजेव्सकी के अनुसार विरोधी निशाने को भ्रमित करने के लिए रूस और ईरान ने ‘ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम’ (GPS) में हेरफेर के लिए सहयोग किया है। अमेरिकी नौसेना की नजरों से बचने के लिए ईरान से जुड़े कई जहाजों ने हॉर्मुज जलमार्ग में अपनी स्थिति ट्रैकर को नकली बना रखा है। यह रणनीति रूस के अवैध ऊर्जा टैंकरों ने पहले ही इस्तेमाल में लाई थी। सन् २०२४ मार्च में साइप्रस में ब्रिटिश सैन्य बेस पर निशाना बने एक ईरानी ड्रोन से रूसी एंटी-जैमिंग उपकरण मिला था। यूरोपीय अधिकारी चिंतित हैं कि यदि वर्तमान शांति वार्ता विफल हुई और ईरान फिर से आक्रमण पर उतरा, तो रूस उसे हथियार उपलब्ध करा सकता है। गत अप्रैल में यूक्रेन को सैन्य सहायता देने वाले देशों की बैठक में ब्रिटिश रक्षा मंत्री जॉन हिली ने कहा था, ‘हमने रूस द्वारा ईरान को आक्रमण में सहयोग करने के प्रमाण देखे हैं।’ उन्होंने विस्तृत विवरण नहीं दिया, लेकिन यह भी कहा, ‘पुतिन चाहते थे कि हमारा ध्यान मध्य पूर्व की ओर जाए और यूक्रेन से दूर रहे।’

ईरान युद्ध ने कुछ देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में दरार डाली है। खासकर ट्रम्प प्रशासन और यूरोप के बीच संबंध तनावपूर्ण हुए हैं। कई यूरोपीय नेताओं ने इस विवाद को अनावश्यक और अवैध बताया है। इस संघर्ष ने विश्व स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में समस्याएँ पैदा की हैं और देशों में ईंधन की होड़ शुरू हो गई है। कुछ देश अवैध होने के बावजूद उपलब्ध तेल और गैस के लिए रूस की ओर आकर्षित हो रहे हैं। अमेरिका का ध्यान मध्य पूर्व की ओर होने से रूस और यूक्रेन के बीच शांति प्रक्रिया प्रभावित हुई है। किव सुरक्षा फोरम के निदेशक और यूक्रेन के पूर्व उपराष्ट्रपति डैनिलो लुब्किव्स्की ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान में युद्ध शुरू किया तो क्रेमलिन में खुशी से शैम्पेन खुला था।’

लेकिन ईरान युद्ध ने कुछ अप्रत्याशित कूटनीतिक गठबंधन भी बनाए हैं। यूक्रेन द्वारा खाड़ी देशों के साथ स्थापित की गई नई साझेदारी इसका उदाहरण है। गत अप्रैल में यूक्रेन ने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ नई सुरक्षा समझौते किए। कुछ साल पहले ऐसे कूटनीतिक संबंधों की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी क्योंकि उस समय खाड़ी देश रूस के प्रति तटस्थ थे। ‘यूरोपीय काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस’ के सुरक्षा कार्यक्रम सह-निर्देशक जाना कोब्जोवा के अनुसार किव अपनी ड्रोन तकनीक और सैन्य प्रशिक्षण के बदले मध्य पूर्व से कूटनीतिक समर्थन, ऊर्जा समझौते और आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणाली लेना चाहता है। जाना कोब्जोवा कहती हैं कि यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की इस संकट को अवसर में बदलने की आशा रखते हैं। तेल धनी खाड़ी देशों के साथ ये समझौते यूक्रेन के लिए लाभकारी होंगे। ड्रोन तकनीक की बिक्री से यूक्रेन के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। पिछले साल अमेरिका ने किव को हथियार अनुदान पर रोक लगाई थी, तब से यूरोप ही यूक्रेन का मुख्य समर्थक बना है। यूरोपीय देश अमेरिका के साथ मिलकर हथियार खरीद कर यूक्रेन भेज रहे हैं। इसके अलावा, पिछले महीने यूरोपीय संघ ने यूक्रेन को ९० अरब यूरो का ऋण स्वीकृत किया है। लेकिन यूरोप की यह निरंतर सहायता उसकी अपनी आर्थिक स्थिति पर निर्भर होगी। ईरान युद्ध से उत्पन्न ऊर्जा और आपूर्ति की कमी यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव डालेगी, यह यह निर्धारित करेगा। यदि शीघ्र शांति स्थापित नहीं होती है, तो यूरोप की आर्थिक स्थिति और नाजुक हो सकती है। रोम में अंतरराष्ट्रीय मामले संस्थान के विशेषज्ञ रिकार्डो अल्कारो ने कहा कि हॉर्मुज जलमार्ग पर जारी गतिरोध ने विश्व ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर चुनौती दी है। यह जलमार्ग विश्व की कुल ऊर्जा आपूर्ति का २० प्रतिशत हिस्सा संभालता है और यहां तनाव के कारण ईरान यूक्रेन की तरह यूरोप के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यूरोप और ईरान मामलों पर शोध कर रहे अल्कारो ने कहा, ‘यूक्रेन युद्ध अभी भी यूरोप का मुख्य मोर्चा है, पर ईरान युद्ध को कमतर नहीं आंका जाना चाहिए। यह यूरोप की सबसे बड़ी प्राथमिकता, अर्थात् यूक्रेन की सहायता करने की क्षमता पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।’

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