
हिमालय क्षेत्र का संरक्षण विश्वव्यापी साझा जिम्मेदारी है : यादव
नेपाल के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. रामवरण यादव ने हिमालय क्षेत्र के संरक्षण को न केवल नेपाल की बल्कि पूरे विश्व की साझा जिम्मेदारी बताया है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय, हिमनद और पारिस्थितिकी प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जाहिर करते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। “नेपाल के हिमालय विश्वस्तरीय पहचान हैं। उनकी सुरक्षा और संवर्धन में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकता आवश्यक है,” उन्होंने कहा। १६ जेठ, काठमांडू।
‘एएमएस एवरेस्ट टूरिज्म अवार्ड २०२६’ कार्यक्रम में अपना संबोधन देते हुए उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय, हिमनद और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। इसके संरक्षण के लिए विश्वव्यापी सहयोग अनिवार्य होने पर उन्होंने बल दिया।
पूर्व राष्ट्रपति यादव ने नेपाल की भौगोलिक विविधता और सामाजिक एकता का जिक्र करते हुए तराई, पहाड़ और हिमालय क्षेत्र की विशिष्ट भूमिका को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान का मूल बताया। उन्होंने तराई को कृषि और आध्यात्मिक केंद्र, पहाड़ को दृढ़ता और सांस्कृतिक विरासत तथा हिमालय क्षेत्र को नेपाल के गर्व का प्रतीक माना और कहा कि विविधता में ही नेपाल की शक्ति निहित है।
सगरमाथा को मानवीय साहस, दृढ़ संकल्प और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का प्रतीक बताते हुए डॉ. यादव ने कहा कि नेपाल के हिमालयी पर्यटन क्षेत्र विभिन्न संस्कृतियों और राष्ट्रों के बीच आपसी समझ बढ़ाने का माध्यम हैं। ‘‘नेपाल के हिमालय पूरी दुनिया के लिए एक पहचान हैं। उनकी सुरक्षा और संवर्धन के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एकजुट होना अति आवश्यक है,’’ उन्होंने कहा, ‘‘पर्यटन सीमापार के लोगों को जोड़ने और अवसर उत्पन्न करने का साधन है, लेकिन हमें अपनी संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण की रक्षा करने की जिम्मेदारी कभी नहीं भूलनी चाहिए।’’