
चुरे संरक्षण के लिए बजट में कटौती, ढुंगा और गिट्टी के खनन पर बल
सरकार ने आगामी आर्थिक वर्ष के लिए चुरे क्षेत्र संरक्षण के बजट में कटौती करते हुए लगभग 1 अरब रुपये ही आवंटित किए हैं। अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने संसद में चुरे तथा तराई मधेश क्षेत्र के जलचक्र को स्थायी बनाने के उद्देश्य से बजट आवंटित करने का उल्लेख किया है। बजट में ढुंगा, गिट्टी और बालू के उत्खनन की व्यवस्था होने के कारण चुरे के दोहन में वृद्धि होने की आशंका व्यक्त करते हुए संबंधित पक्षों ने चिंता जताई है। 16 जेठ, काठमांडू। नीति तथा कार्यक्रम में चुरे संरक्षण के विषय में मौन रहने के बावजूद सरकार ने आगामी बजट में इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए भारी कटौती की है। वित्त वर्ष 2082/83 में चुरे क्षेत्र संरक्षण के लिए 1 अरब 69 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं वर्तमान सरकार ने आगामी वित्त वर्ष के लिए लगभग केवल 1 अरब रुपये ही आवंटित किए हैं।
संघीय संसद में बजट प्रस्तुत करते हुए अर्थमंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने कहा, ‘चुरे तथा तराई मधेश क्षेत्र के जलचक्र को स्थायी बनाए रखने के लिए जल स्रोत संरक्षण, तालाब निर्माण, भूस्खलन नियंत्रण, तटबंध निर्माण जैसी गतिविधियों को संचालित करने हेतु लगभग 1 अरब रुपये आवंटित किए हैं।’ इसके अतिरिक्त बजट वक्तव्य में ‘औद्योगिक विकास’ शीर्षक के तहत पर्यावरणीय दृष्टिकोण से उपयुक्त स्थानों की पहचान कर ढुंगा, गिट्टी, बालू के उत्खनन तथा प्रसंस्करण का भी प्रावधान किया गया है। इससे चुरे का दोहन बढ़ने का डर संबंधित पक्षों में व्याप्त है। चुरे संरक्षण कार्यकर्ता सुनिल यादव ने कहा कि तराई मधेश के निवासियों के पेयजल समस्या समाधान के लिए सरकार ने डिप्टी ट्यूबवेल का प्रावधान किया है, लेकिन भूमिगत जल पुनर्भरण में सहायक चुरे के दोहन को बढ़ावा देने वाले बजट आवंटन की आलोचना करते हैं।
उनके अनुसार वर्तमान सरकार चुरे की संवेदनशीलता को समझने में विफल रही है। ‘पहले की सरकारें इसे नहीं समझ पाईं और वर्तमान सरकार भी नहीं समझी, जिसके कारण चुरे मरुभूमिकीकरण की ओर बढ़ रहा है,’ यादव ने कहा, ‘आगामी वित्त वर्ष का बजट भी सरकार की चुरे प्रति संवेदनशीलता को प्रतिबिंबित नहीं करता।’ चुरे पर्वत श्रृंखला नेपाल के 77 जिलों में से 37 जिलों का भूभाग घेरती है। जैविक विविधता और जल स्रोतों के हिसाब से चुरे को संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तराई मधेश क्षेत्र में जल स्रोतों का सूखना और कृषि उत्पादन में कमी का मुख्य कारण चुरे दोहन है।