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कैंसर के उपचार में नई सिरिंज की सफल परीक्षण

१८ चैत्र, काठमाडौं। चिकित्सकों ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। जिन मरीजों के ट्यूमर उपचार से ठीक नहीं हो पा रहे थे, उन्हें पूरी तरह समाप्त करने में सक्षम नई इंजेक्शन का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। ‘जॉनसन एंड जॉनसन’ कंपनी द्वारा विकसित ‘अमिवान्तामैब’ नामक इस सिरिंज का ११ देशों में क्लिनिकल परीक्षण किया गया था। खासतौर पर उन मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया जिनके कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुके थे या पुनः सक्रिय हो चुके थे, और अन्य उपचार असफल हो गए थे।

परीक्षण में एक तिहाई से अधिक मरीजों के ट्यूमर में कमी देखी गई है, और कुछ ही हफ्तों में इस सिरिंज का उल्लेखनीय प्रभाव देखने को मिला है। चिकित्सकों के अनुसार १५ मरीजों के ट्यूमर पूरी तरह गायब हो चुके हैं। लंदन स्थित ‘इंस्टिट्यूट ऑफ कैंसर रिसर्च’ के प्रोफेसर केविन हैरिंगटन ने बताया कि कीमोथैरेपी और इम्यूनोथैरेपी दोनों असफल होने वाले मरीजों में इस तरह के मजबूत परिणाम आना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उनका कहना है कि जिन मरीजों के सभी उपचार विकल्प खत्म हो चुके हैं, उन्हें इस दवा से मिली राहत आश्चर्यजनक है और यह हर साल हजारों मरीजों की जान बचाने में सक्षम है। परीक्षण में सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित १०२ मरीज शामिल थे, जो दुनिया में कैंसर के छठे सबसे आम प्रकार हैं। इनमें से ४३ मरीजों के ट्यूमर सिकुड़े या पूरी तरह से खत्म हुए, २८ के ट्यूमर छोटे हुए, और १५ का कैंसर पूरी तरह खत्म हो गया।

सिर और गर्दन के अलावा फेफड़े के कैंसर के मरीजों में भी इस दवा ने समान सकारात्मक प्रभाव दिखाया है। यह दवा कैंसर फैलाने वाले प्रोटीन को रोकती है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधी प्रणाली को सक्रिय करके ट्यूमर से लड़ने में मदद करती है। २०२४ में जब जिब्रो को कैंसर हुआ, तब से २०२५ से परीक्षण में शामिल ५६ वर्षीय कार्ल वाल्स ने दवा के प्रभाव पर खुशी जताई है। पहले ऐंठन और दर्द की वजह से बोलना और खाना मुश्किल होता था, लेकिन अब वे सामान्य जीवन बिता रहे हैं।

वर्तमान में विश्वभर करीब ६० क्लिनिकल परीक्षण इस दवा की प्रभावकारिता की जांच के लिए चल रहे हैं। मुख्यतः फेफड़ा, मस्तिष्क, पेट और बड़ी आंत के कैंसर में इसके प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक शोध के परिणाम शिकागो में आयोजित ‘अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी’ की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए जाएंगे।

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