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प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह के ‘जमीन अतिक्रमण’ बयान से विवाद, विपक्षी दलों ने अभिलेख से हटाने की मांग की

प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह ‘बालेन’ का भारत द्वारा नेपाल की “जमीन अतिक्रमण” करने वाला बयान बड़ा विवाद पैदा कर गया है। विपक्षी दलों ने इस अभिव्यक्ति को “संप्रभुता के विरुद्ध” बताते हुए तुरंत संसद के अभिलेख से हटाने और प्रधानमंत्री से स्पष्टता प्रदान करने की मांग की है। प्रधानमंत्री के रविवार को दिए गए इस बयान पर विवाद उत्पन्न हुआ है, जबकि विपक्ष इसे “अजिम्मेदाराना” करार देते हुए तुरंत सुधार की अपील कर रहा है।

सोमवार दोपहर विपक्षी दलों ने संयुक्त बैठक कर संसद में अवरोध भी किया। विदेश मंत्रालय ने रविवार शाम जारी बयान में प्रधानमंत्री के उक्त बयान को मूल रूप से दशगजा क्षेत्र के अतिक्रमण और “क्रॉस-बॉर्डर अक्स्यूपेशन” अर्थात ‘सीमा पार जमीन के अधिकार’ से संबंधित बताया था। विपक्षी नेकपा एमाले ने भी इस अभिव्यक्ति के खिलाफ सड़क प्रदर्शन किया है।

विपक्षी दलों की इस मांग पर सत्तारूढ़ दल, नेपाल सरकार या प्रधानमंत्री वालेन्द्र शाह की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। संसद के शुरू होने पर सभी सांसद खड़े होकर विरोध प्रकट कर चुके हैं। नेपाली कांग्रेस के सांसद निश्कल राई ने प्रधानमंत्री की अभिव्यक्ति को “अत्यंत अपरिपक्व” बताया और कहा, “यह अभिव्यक्ति संसद के रिकॉर्ड में दर्ज होकर उदाहरण बन गई है।” उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रहित के खिलाफ है और नेपाल को “सीमा अतिक्रमणकर्ता” घोषित करने का खतरा पैदा करता है। जब तक इसे सही नहीं किया जाता, तब तक वे सरकार के साथ सहयोग नहीं करेंगे।

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