
संसद में विपक्षी एकता बढ़ाने के लिए सरकार की पहल
१८ जेठ, काठमाडौं। प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बयान के खिलाफ विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है। सभी विपक्षी दलों के नेताओं की आज हुई संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक प्रधानमंत्री माफी नहीं मांगते और बयान वापस नहीं लेते, संसद का संचालन नहीं होगा। नेकपा के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने कहा, ‘सीमा अतिक्रमण संबंधी कल प्रधानमंत्री द्वारा संसद में दिया गया बयान राष्ट्रद्रोह माना गया है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री को संसद में देशवासियों के नाम माफी मांगनी चाहिए। इसलिए विपक्षी दलों ने संसद अवरुद्ध करने का निर्णय लिया है।’
आकस्मिक रूप से रविवार को संसद की बैठक में पहुंचे प्रधानमंत्री शाह ने सांसदों को जवाब देते हुए कहा था कि ‘नेपाल ने भी भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है।’ इस बयान के खिलाफ सोमवार को विपक्षी सांसदों ने संसद की बैठक में विरोध किया। नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने नेपाल द्वारा भारत की जमीन अतिक्रमण किए जाने के तथ्य की खोज की थी और अन्य सांसदों ने भी उनका समर्थन किया था। इसके बाद विभिन्न तरफ़ से आपत्ति जताते हुए विपक्षी दलों ने सिंहदरबार में संयुक्त बैठक की। २१ फागुन के चुनाव के बाद यह विपक्षी दल कांग्रेस, एमाले, नेकपा, राप्रपा और श्रम संस्कृति के नेताओं की पहली बैठक थी।
संयुक्त बैठक का प्रभाव संघीय संसद में भी देखा गया, जहां संयुक्त विरोध के कारण संसद अवरुद्ध हो गया। राष्ट्रिय सभा में तो पूरा सदन ही संयुक्त विरोध की स्थिति में है। वहां रास्वपा के ना होने के बावजूद यह माहौल नजर आ रहा है। एमाले राष्ट्रीय सभा संसदीय दल के नेता प्रेमप्रसाद दंगाल ने कहा, ‘इतिहास में कभी किसी ने इस तरह का राष्ट्रद्रोही बयान नहीं दिया, जिसका कोई तथ्य समर्थन न करता हो। इसलिए हम सभी को एक होकर कदम उठाना चाहिए।’ राष्ट्रीय सभा में कांग्रेस, एमाले, नेकपा, जसपा और जनमोर्चा ने संयुक्त बैठक कर प्रधानमंत्री के बयान को सुधारने के लिए दबाव डालने का निर्णय लिया है।