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प्रधानमंत्री शाह ने जातीय भेदभाव और छुआछूत उन्मूलन के लिए सामाजिक सोच में बदलाव आवश्यक बताया

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जातीय भेदभाव तथा छुआछूत उन्मूलन राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध जागरूक और संवेदनशील सामाजिक वातावरण बनाने के लिए सभी से अपील की है। संविधान ने जातीय भेदभाव को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है, इसके बावजूद इसका अंत करने के लिए समाज की सोच, व्यवहार और संस्कारों में सकारात्मक बदलाव अनिवार्य है, उन्होंने जोर देते हुए कहा। सरकार सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित करते हुए छुआछूत के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान चला रही है, साथ ही दलित समुदाय की कौशल संरक्षण और आय अर्जन वृद्धि को प्राथमिकता दे रही है।

२१ ज्येष्ठ, काठमाडौं। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि समाज में समानता, सम्मान और मानवीय गरिमा के मूल्यों को व्यवहार में उतारते हुए भेदभाव के खिलाफ जागरूक और जिम्मेदार सामाजिक वातावरण बनाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। जातीय भेदभाव तथा छुआछूत उन्मूलन राष्ट्रीय दिवस, २०८३ के अवसर पर गुरुवार जारी शुभकामना संदेश में उन्होंने यह बात कही।

प्रधानमंत्री शाह ने देश के समग्र विकास में दलित समुदाय द्वारा दी गई सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान का उच्च सम्मान करते हुए कहा, ‘जातीय भेदभाव और छुआछूत के समाप्ति के लिए कानूनी व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, प्रभावी उन्मूलन के लिए समाज की सोच, व्यवहार और संस्कारों में सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक है।’

समानतामूलक, सभ्य और सुसंस्कृत समाज निर्माण के लिए छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ सरकार राष्ट्रीय अभियान चला रही है तथा दलित समुदाय के पारंपरिक कौशल संरक्षण, आय वृद्धि और तकनीकी उन्नयन को प्राथमिकता दी जा रही है, इसकी जानकारी उन्होंने दी। प्रधानमंत्री शाह ने सभी नेपाली नागरिकों से एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा, ‘यह राष्ट्रीय दिवस सामाजिक सद्भाव और पारस्परिक सम्मान की संस्कृति को और मजबूत बनाने के लिए प्रेरणा प्रदान करे, ऐसी मेरी कामना है।’

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