युक्रेनी ड्रोन हमले के बाद मॉस्को का तेल रिफाइनरी केंद्र कम से कम ६ महीनों तक बंद रहेगा
११ असार, काठमाडौं। यूक्रेन द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों के कारण मॉस्को के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक बड़े तेल रिफाइनरी केंद्र कम से कम छह माह तक बंद रहने वाला है। गाज़प्रोम नेफ्ट द्वारा संचालित इस रिफाइनरी केंद्र पर पहली बार १६ जून को हमला हुआ था, जिसमें रिफाइनरी की ५३ प्रतिशत क्षमता धारण करने वाले एक डिस्टिलेशन यूनिट को क्षति पहुंची। इसके बाद १८ जून को किए गए दूसरे हमले ने शेष ४७ प्रतिशत क्षमता वाले आधुनिक ‘यूरो प्लस’ यूनिट को भी नष्ट कर दिया, इसकी जानकारी उद्योग से जुड़े स्थिर सूत्रों ने दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बुधवार को इन सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट प्रकाशित की।
मॉस्को रिफाइनरी की क्षतिग्रस्त इकाइयों की मरम्मत में कम से कम आधा साल लगेगा, उद्योग से जुड़े स्रोतों ने बताया। रॉयटर्स के अनुसार, इस रिफाइनरी ने २०२४ में ११.६ मिलयन मीट्रिक टन कच्चा तेल संसाधित किया था, जिससे २.९ मिलियन टन पेट्रोल और ३.२ मिलियन टन डीजल का उत्पादन हुआ था। गाज़प्रोम नेफ्ट द्वारा संचालित इस रिफाइनरी के नुकसान पर रूसी अधिकारियों ने अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। यूक्रेन ने इस साल वसंत ऋतु से ही रूसी तेल प्रसंस्करण केंद्रों और सप्लाई चेन पर हमलों को तेज कर दिया है।
ड्रोन हमलों के कारण रूस के उन रिफाइनरी केंद्रों की उत्पादन क्षमता ठप या काफी कम हो गई है जो देश के पेट्रोलियम उत्पादन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई इलाकों में ईंधन rationing करना पड़ा है। इस साल की शुरुआत से ही रूस में पेट्रोल की औसत कीमतों में ६.६ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। १५ जून तक के आँकड़ों के अनुसार, एक सप्ताह में कीमतों में वृद्धि के बाद राष्ट्रीय औसत कीमत ६९.११ रूबल प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। उपप्रधानमंत्री अलेक्ज़ेंडर नोवाक ने मंगलवार को आंतरिक ईंधन बाज़ार की स्थिति को ‘चुनौतीपूर्ण लेकिन नियंत्रण में’ बताया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और जेट ईंधन के निर्यात पर पहले से मौजूद प्रतिबंध के साथ ही अब डीजल के निर्यात पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाने की चर्चा चल रही है।