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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा कर पर 100 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाने की चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि यूरोपीय संघ डिजिटल सेवा कर लागू करता है तो वे उनके उत्पादों पर 100 प्रतिशत सीमा शुल्क लगा देंगे। यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत मेटा, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसे प्रमुख तकनीकी कंपनियों पर कड़े नियम और जुर्माना लगाए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक विवाद उत्पन्न हो गया है। मेटा ने यूरोपीय नियामकों द्वारा अपने व्यावसायिक सफलता पर कड़े जुर्माने लगाकर दंडित करने का आरोप लगाते हुए ट्रम्प प्रशासन से व्यापार समझौते में सहयोग का अनुरोध किया है।

15 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने डिजिटल सेवा कर के खिलाफ कड़ा जवाब देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने विदेशी उत्पादों पर भारी व्यापारिक जुर्माना लगाने की योजना बताई। ट्रम्प ने शुक्रवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह चेतावनी दी, जिसमें उन्होंने खासतौर पर यूरोपीय संघ के नियामकों को लक्ष्यित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “कई यूरोपीय देश अमेरिकी कंपनियों पर डिजिटल सेवा कर लागू करने की योजना बना रहे हैं। कुछ देश इसे लागू करने के अंतिम चरण में हैं। यह मेरी आधिकारिक चेतावनी है। यदि यह कर लागू हुआ तो वे सभी देशों से अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर तुरंत 100 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाए जाएंगे।”

ट्रम्प ने यह सुनिश्चित किया कि यह सीमा शुल्क कड़ी सख्ती से लागू होंगे। यह पुराने व्यापार समझौतों की पुन: समीक्षा को बाध्य करेगा। कर लागू होते ही सीमा शुल्क तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए जाएंगे। व्हाइट हाउस पहले ही यूरोपीय नियामकों को चेतावनी दे चुका है। यूरोपीय संघ ‘डिजिटल सर्विस एक्ट’ (डीएसए) के तहत और भी सख्त नियम लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर सख्त प्रतिबंध लगाए गए हैं और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है।

सोशल मीडिया कंपनियां लगातार व्हाइट हाउस के साथ वार्ता कर रही हैं और यूरोपीय संघ के कड़े नियमों का विरोध कर रही हैं। विशेष रूप से मेटा कंपनी अपने व्यवसाय पर लागू अतिरिक्त शर्तों को हटाने का प्रयास कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में मेटा को भारी जुर्माना भुगतना पड़ा है। यूरोपीय नियामक डाटा चोरी के आरोप में हर साल एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक जुर्माना लगा रहे हैं।

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ट्रम्प प्रशासन के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और राष्ट्रपति ट्रम्प से विदेशी व्यापार समझौतों में समर्थन पाने की आशा रखते हैं। वे अपने खिलाफ लगे जुर्मानें को रोकना चाहते हैं। मेटा अन्य देशों से लगे जुर्मानो के खिलाफ भी विरोध कर रही है, खासतौर पर स्थानीय प्रकाशकों की सामग्री के उपयोग पर लगने वाले जुर्माने को लेकर वे असंतुष्ट हैं। हाल ही में मेटा ने ऑस्ट्रेलिया के ‘न्यूज बर्गेनिंग इंसेंटिव’ में हुए परिवर्तनों को अनुचित और खराब बताया था।

कई मामलों में मेटा का विरोध जायज दिखता है। अधिकांश नियम उनकी सफलता को दंडित करने के लिए बनाए गए हैं। मेटा का व्यापार क्षेत्र अत्यंत व्यापक है और यह विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कंपनी पर स्थानीय करों से बचने का आरोप भी लगा है, हालांकि वे वर्तमान नियमों के तहत काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर गलत धारणा के आधार पर अत्यधिक कड़ी कार्रवाई करना अनुचित हो सकता है। लेकिन अमेरिकी सरकार ने यह कदम केवल मेटा के दबाव के कारण नहीं, बल्कि अन्य तकनीकी कंपनियों की मांगों को भी ध्यान में रखकर उठाया है।

‘पोलिटिको’ में पिछले सप्ताह प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय नियामक ने डीएसए के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया है, जिसमें ‘अमेज़न वेब सर्विस’ और ‘माइक्रोसॉफ्ट एज्योर’ जैसी क्लाउड सेवाएं भी शामिल हैं। इससे अन्य तकनीकी दिग्गजों को अमेरिकी सरकार में पैरवी करने के लिए प्रोत्साहन मिला है और व्हाइट हाउस को सक्रिय रूप से कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। यह नया दबाव मेटा और अन्य सोशल प्लेटफॉर्म्स के लिए मददगार साबित हो सकता है, जिससे वे नए बाजारों में प्रस्तावित जुर्मानों का सामना करने में सक्षम होंगे। यदि ऐसा होगा, तो यह मेटा के लिए एक बड़ी सकारात्मक घटना होगी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विकास में अतिरिक्त निवेश के अवसर प्रदान करेगी।

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