शेख हसीना का ऐलान – इस वर्ष ही बांग्लादेश लौटूंगी
समाचार सारांश
संपादकीय रूप से समीक्षा किया गया।
- मृत्युदंड की सजा पाए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सभी षडयंत्रों को पार करते हुए इस वर्ष ही देश वापस लौटने का ऐलान किया है।
- भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार माना जा रहा है।
- सन् 2024 के आंदोलन के बाद भारत में रहने वाली हसीना ने अपने खिलाफ फैसले को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए मृत्युदंड से डरने की बात नहीं कही है।
15 असार, काठमांडू। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मृत्युदंड की सजा पाए होने के बावजूद इस वर्ष देश वापसी का ऐलान किया है। वह लगभग दो वर्षों से भारत में रह रही हैं।
मानवता के खिलाफ अपराध से संबंधित मामले में मृत्युदंड की सजा पाए 78 वर्षीय हसीना को बांग्लादेश सरकार ने ‘फरार’ घोषित किया था। सन् 2024 के अगस्त में हुए आंदोलन के बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत चली गई थीं। उस समय विद्यार्थी नेतृत्व वाले जनआंदोलन ने उनके 15 वर्षों के शासन का अंत किया था।
देश छोड़ने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से बहुत कम ही दिखाई दिया। इस साल जनवरी में नई दिल्ली में प्रेस क्लब से एक संबोधन के अलावा वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर नहीं आईं।
भारतीय टेलीविजन चैनल एनडीटीवी को दिए गए एक साक्षात्कार में हसीना ने कहा कि वह मृत्युदंड से डरती नहीं हैं। उन्होंने अपने खिलाफ फैसले को गैरकानूनी, असंवैधानिक और राजनीतिक प्रेरित बताया।
उन्होंने कहा, ‘मेरे खिलाफ कई षड्यंत्र रचे गए। लेकिन हर षड्यंत्र को परास्त करते हुए मैं जनता के वोट से पांच बार प्रधानमंत्री चुनी गई और देश के अभूतपूर्व विकास के लिए काम किया।’
‘मृत्युदंड से कोई भय नहीं’
मृत्युदंड की सजा पाए होने के बावजूद बांग्लादेश लौटने को लेकर पूछे जाने पर हसीना ने कहा, ‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहती हूं, सभी बाधाओं और षड्यंत्रों को पार करते हुए मैं इस वर्ष अपने देश वापस लौटूंगी।’
पिछले साल नवंबर में ढाका की एक अदालत ने हसीना को हिंसा भड़काने, हत्या का आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
इस बीच उनके दल अवामी लीग पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। एक समय बांग्लादेश का सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दल माना जाने वाला अवामी लीग अब कानूनी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।
भारत–बांग्लादेश संबंधों में सुधार
पिछले दो वर्षों में भारत और बांग्लादेश के बीच संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं। विद्यार्थी आंदोलन के बाद हसीना के सत्ता से हटने और भारत जाने के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। तब से बांग्लादेश बार-बार हसीना की प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है।
सन् 2026 के फरवरी में हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की पार्टी की स्पष्ट बहुमत प्राप्ति के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार नजर आने लगा है।
नई सरकार के गठन के साथ द्विपक्षीय संवाद में तेजी आई है। इसी माह से भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जारी करने की प्रक्रिया पुनः शुरू की है।
ढाका स्थित भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 25 जून को पर्यटक वीजा प्रक्रिया 28 जून से पुनः शुरू होने की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘इससे हमारे दोनों संप्रभु देशों के नागरिकों के बीच संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है।’
पहले भारत ने चिकित्सा वीजा जारी करना भी पुनः शुरू किया था।
सीमा और आव्रजन के विषय अभी भी संवेदनशील
भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध हैं लेकिन कुछ मसलों पर मतभेद कायम हैं।
खासकर सीमा पार हो रहे अवैध आव्रजन का विषय दोनों के बीच प्रमुख विवाद का बिंदु है। भारत अवैध प्रवासी पाए गए लोगों को बांग्लादेश लौटाता रहा है, जिससे समय-समय पर दोनों देशों के बीच तनाव होता रहा है।
ऐसी स्थिति में शेख हसीना का सार्वजनिक रूप से देश लौटने का ऐलान और भारत का बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा पुनः शुरू करना दक्षिण एशियाई राजनीति एवं भारत-बांग्लादेश रिश्तों के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाएं मानी जा रही हैं।