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पश्चिम एशियाई संघर्षों के कारण बाल बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव : युनिसेफ की गंभीर चिंता


१० चैत, काठमाडौं। मध्यपूर्व में बढ़ते संघर्ष के चौथे सप्ताह में प्रवेश करते ही लेबनान में ११८ और कुवैत में २०० से अधिक बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। युनिसेफ के अनुमान के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से रोजाना औसतन लगभग ८७ बच्चे मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।

युनिसेफ की उप कार्यकारी निदेशक टेड चाइबान ने तत्काल शत्रुता समाप्त करने, नागरिक अवसंरचना की सुरक्षा करने और मानवीय सहायता को व्यवस्थित रूप से सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया है।

युनिसेफ ने जारी हिंसा को मध्यपूर्व में एक गम्भीर संकट बताते हुए चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि निर्दोष बाल बच्चों की मौत से जनता का विश्वास कमजोर होगा और इसका दीर्घकालीन प्रभाव वैज्ञानिक विकास पर भी पड़ेगा।

लगभग एक महीने तक चले विनाशकारी युद्ध के कारण तेल, ईंधन और गैस की कीमतों में वृद्धि से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तीव्र प्रभाव पड़ा है, जो संयुक्त राष्ट्र ने भी स्वीकार किया है।

मध्यपूर्व में हवाई क्षेत्र, यातायात, परिवहन मार्ग और प्रमुख मानवीय सीमाओं के बंद और अवरुद्ध होने से आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की उपलब्धता, साथ ही मानव सेवा और व्यापार आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

होर्मुज जल क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में जोखिम बढ़ा दिया है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि किया है।

खाद्य सुरक्षा को खतरा और बाजारों में अस्थिरता के कारण एशिया और अफ्रीका के विकासशील देशों को सबसे अधिक प्रभाव झेलने की संभावना है। –रासस

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