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‘मंत्रालय के कामों में प्रधानमंत्री का कोई हस्तक्षेप नहीं है’

चैत्र १३ को दिन मंत्री बनी प्रतिभा रावल को शुरुआत में दो मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी- भूमि व्यवस्था, सहकारी एवं गरीबी निवारण तथा संघीय मामला एवं सामान्य प्रशासन। सरकार ने मंत्रालयों की संख्या कम करने का निर्णय लिया और इन दोनों मंत्रालयों को आपस में मिला दिया गया। वर्तमान में एकीकृत मंत्रालय के रूप में भूमि व्यवस्था, सहकारी, संघीय मामला और सामान्य प्रशासन मंत्रालय कार्यरत है। रावल के मंत्रालय का संचालन नागरिकों और कर्मचारियों से सीधे संबंधित है। वे बेघर, भूमिहीन और असंगठित बसोबासियों तथा सहकारी पीड़ितों के अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही हैं। साथ ही सरकारी स्थायी कर्मचारी प्रशासन में सुधार के लिए प्रयासरत हैं।

सरकार के १०० दिनों के कार्यकाल में अपने मंत्रालय द्वारा की गई गतिविधियों पर केंद्रित रहते हुए रावल ने अनलाइनखबर के पत्रकार संत गाहा मगर, कृष्ण ज्ञवाली और लिलु डुम्रे से बातचीत में कहा, “जब मैंने जिम्मेदारी संभाली तो दो मंत्रालय थे। वे मंत्रालय और १०० बिंदुओं वाली कार्ययोजना के अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं। कुछ कार्य अन्य मंत्रालयों के सहयोग से भी पूरे करने होंगे। हम बिंदुवार इन कार्यों का विवरण सार्वजनिक करेंगे।”

रावल ने आगे कहा, “ऐसे कई कार्य हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण मेरे लिए निजामती कर्मचारियों के ट्रेड यूनियन से जुड़ी व्यवस्थाओं को हटाना है। यह व्यवस्था कर्मचारी तंत्र को हानि पहुंचा रही थी और प्रशासन की छवि खराब कर रही थी। इसलिए हम इस पुरानी व्यवस्था को हटाकर एक नया, निष्पक्ष संगठन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।”

सहकारी के छोटे बचतकर्ताओं की राशि लौटाने के कार्य की शुरुआत १०० दिनों के अंदर करने पर गर्व व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैंने अब तक जो भी कार्य किए हैं, उनमें किसी को प्रश्न उठाने की गुंजाइश नहीं है। मेरी मुख्य प्राथमिकता केवल जल्दी काम दिखाना नहीं, बल्कि गुणवत्ता युक्त परिणाम निकालना है।”

भूमिहीनों के लिए लालपुर्जा वितरण का ऐतिहासिक कार्य कल से शुरू हो चुका है और स्थानीय स्तर पर मालपोत तथा नापी कार्यालयों को हस्तांतरित करने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है, बताती रावल ने कहा, “हमारा लक्ष्य मालपोत और नापी कार्यालयों में लोगों की संख्या कम करना है। इसके लिए हम डिजिटलाइजेशन के प्रयास कर रहे हैं।”

बेघर लोगों के प्रबंधन पर रावल ने कहा, “बेघर लोगों की लागत संग्रह और प्रबंधन का अद्यतन विवरण हम सार्वजनिक कर रहे हैं। हमने कितनी आवेदनों को स्वीकार किया है और कितनों का प्रमाणीकरण हुआ है, इसकी नियमित जानकारी दी जाएगी।”

सुकुमवासी प्रबंधन में सरकार की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए रावल ने बताया, “सरकार होल्डिंग सेंटर में रहने वाले सुकुमवासियों को मासिक खर्च प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। फिलहाल हम नगार्जुन अपार्टमेंट में भी सुकुमवासियों को रखे हुए हैं।”

भूमिहीन और बेघर लोगों के प्रबंधन के लिए सरकार की योजना के बारे में बताते हुए रावल ने कहा कि भूमि समस्या समाधान समिति और काठमांडू महानगरपालिका के बीच गहन वार्ता जारी है। “थापाथली इलाके से हटाए गए सुकुमवासियों को विशेष प्राथमिकता देते हुए काम शुरू करने की योजना है।”

उन्होंने कहा, “सरकारी योजना के अनुसार पहले लागत संकलन करना था, फिर बेघर लोगों का प्रबंधन करना था। हमने कल से ही यह लागत संग्रहण शुरू किया है।”

भूमि आयोग का विघटन कर केवल समिति बनाए जाने के बाद भी कार्य जारी है और १०० दिनों से कम समय में लालपुर्जा वितरण शुरू हो गया है, बताते हुए रावल ने कहा, “हमने कल बर्दिया से भूमिहीन दलितों को लालपुर्जा बांटना शुरू किया।”

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं होता और रावल आयोग की रिपोर्ट का क्रियान्वयन चरणबद्ध तरीके से हो रहा है। “आयोग द्वारा चिन्हित सभी जमीनें रोकने के लिए पत्राचार हो चुका है।”

रावल ने कहा, “होल्डिंग सेंटर में मौजूद सुकुमवासियों की वास्तविक संख्या का सत्यापन हो चुका है और उन्हें जमीन देने या प्रबंधन करने के विकल्पों पर काम चल रहा है।”

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