
इंधन और ऊर्जा बचत के बीच श्रीलंका और फिलिपींस में संकटकाल
समाचार सारांश
- मध्यपूर्व के युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से फिलिपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा संकटकाल की घोषणा की है।
- फिलिपींस में 28 फरवरी के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें दोगुनी से अधिक बढ़ गई हैं।
- श्रीलंका ने सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा बचाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
११ चैत, काठमांडू। मध्यपूर्व में चल रहे युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद पड़ोसी एशियाई देशों में गंभीर प्रभाव दिखने लगे हैं।
इंधन की भीषण कमी और मूल्यवृद्धि के कारण फिलिपींस ने राष्ट्रीय ऊर्जा संकटकाल घोषित किया है, जबकि श्रीलंका सरकार ने भी कड़े ऊर्जा बचत निर्देश जारी किए हैं।
अमेरिका-इजरायल और इरान के बीच युद्ध से फिलिपींस अधिक प्रभावित हुआ है। इस देश का लगभग ९८ प्रतिशत तेल खाड़ी क्षेत्र से आयात होता है, जहां २८ फरवरी से पेट्रोल और डीजल की कीमतें दोगुनी से अधिक बढ़ी हैं।
इंधन आपूर्ति में गंभीर संकट को देखते हुए राष्ट्रपति फर्डिनान्ड मार्कोस जूनियर ने एक वर्ष के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संकटकाल घोषित कर कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इरान के साथ युद्ध को वजह बताते हुए संकटकाल लागू करने वाला फिलिपींस दुनिया का पहला देश बन गया है।
फिलिपींस के ऊर्जा मंत्री शेरोन गारिन के अनुसार देश में करीब ४५ दिनों का ही इंधन भंडार बचा है। महंगे गैस के विकल्प के तौर पर तत्काल कोयले से चलने वाले विद्युत केंद्रों पर अधिक निर्भर रहने की सरकार की योजना है। होर्मुज जलसंधि के नाकाबंदी से एशियाई बाजार में बड़ा संकट आया है, जहाँ दुनिया के ९० प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार केंद्रित है।
सड़क पर मजदूरों ने हड़ताल की घोषणा
संकटकाल लागू होने के बाद सरकार ने इंधन, खाद्य और दवाइयों की वितरण सुविधा के लिए विशेष समिति गठित की है, साथ ही इंधन खरीद के अधिकार सीधे प्राप्त किए हैं।
सरकारी कर्मचारियों के लिए सप्ताह में केवल ४ दिन काम करने का नियम (फोर-डे वर्क विक) लागू किया गया है, जबकि जल यातायात (फेरी) सेवाओं में कटौती की गई है।
हालांकि, मजदूर संगठन केएमयू समेत अन्य ने संकटकाल का विरोध किया है। उनका कहना है कि संकटकाल के दौरान हड़ताल पर प्रतिबंध है, जिससे वे असंतुष्ट हैं। बढ़ती महंगाई और सरकार की धीमी प्रतिक्रिया के विरोध में यातायात और राइड-शेयरिंग सेवा के चालक गुरुवार और शुक्रवार को दो दिन हड़ताल पर रहेंगे।
वे ईंधन कर हटाने, दाम घटाने और किराया तथा मजदूरी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद व्यवसायी संकट के समय सरकार के कदम का समर्थन करते हैं।
श्रीलंका की सख्त नीति: लिफ्ट और एसी न चलाने के निर्देश
संभावित इंधन संकट को देखते हुए श्रीलंका ने भी सरकारी कार्यालयों के लिए कड़े ऊर्जा बचत निर्देश जारी किए हैं। सिन्ह्वा समाचार एजेंसी के अनुसार, श्रीलंका के प्रमुख अत्यावश्यक सेवा कार्यालय ने सभी मंत्रालयों के सचिवों और कार्यालय प्रमुखों को परिपत्र जारी कर बिजली तथा इंधन की खपत घटाने के आदेश दिए हैं।
नए नियमों के अनुसार, कर्मचारियों को व्यक्तिगत वाहन के स्थान पर सार्वजनिक या सामूहिक परिवहन (कारपूलिंग) का उपयोग करना होगा। क्षेत्रीय या फील्ड कार्य के लिए वाहनों की संख्या कम करने हेतु दैनिक यातायात योजना बनाना अनिवार्य है।
साथ ही बिजली बचाने के लिए कार्यालयों में एयर कंडीशनर की जगह पंखे चलाने, दिन में प्राकृतिक प्रकाश का अधिकतम उपयोग करने और लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है।
उच्च सुरक्षा क्षेत्रों को छोड़कर सड़कों पर अनावश्यक प्रकाश व्यवस्था न करने और तकनीक के माध्यम से कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने के बजाय घर से काम करने की अनुमति देने को भी कहा गया है। श्रीलंका सरकार ने सभी अधिकारियों से राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण प्रयासों में मिसाल कायम करने का आह्वान किया है।
(एजेंसियों के सहयोग से)