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पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय को ‘शैक्षिक केंद्रीकृत हब’ बनाने की योजना

पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के नवनियुक्त उपकुलपति प्रा.डा. सुजनबाबु मरहट्टा ने पदभार ग्रहण किया है। प्रधानमंत्री तथा विश्वविद्यालय के कुलपति बालेन शाह के 2083 असार 19 के निर्णय के अनुसार उपकुलपति पद पर नियुक्त प्रा.डा. मरहट्टा ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया। पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के नेतृत्व में आने से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्राध्यापक मरहट्टा चिकित्सा शिक्षा आयोग के निर्देशक के रूप में कार्यरत थे। पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय के नेतृत्व संभालने वाले प्रा.डा. मरहट्टा से संवाददाता हरि अधिकारी ने बातचीत की। प्रस्तुत है, बातचीत का संपादित अंश:

आपने पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय (पीयू) का नेतृत्व संभाला है। अब विश्वविद्यालय को आगे कैसे बढ़ाने की योजना है? विश्वविद्यालय सुधार के लिए मैंने स्पष्ट मार्गदर्शन (विजन-मिशन) तय किया है। मुख्य रूप से मैं तीन पक्ष – शिक्षण, अनुसन्धान और सेवा – को व्यवस्थित कर आगे बढ़ाऊंगा। शैक्षिक क्षेत्र में हम 21वीं सदी के वैश्विक बाजार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम का ‘रि-मॉडलिंग’ करेंगे। आगामी शिक्षण प्रणाली ‘कंप्टेंसी बेस्ड’ अर्थात् दक्षता आधारित होगी, जो छात्रों को आवश्यक कौशल के साथ काम करने में सक्षम बनाएगी। इसके लिए आधुनिक तकनीकी-मैत्री शिक्षण पद्धति और मूल्यांकन प्रणाली में व्यापक सुधार का योजना है। अनुसंधान को उत्पादन और नवप्रवर्तन से जोड़ने की योजना भी है। अनुसंधान को केवल कागज तक सीमित नहीं रखते हुए समाज में ठोस प्रभाव डालने का उद्देश्य है। सेवा क्षेत्र के अंतर्गत हमारे संलग्न कॉलेज, अस्पताल और कृषि फार्म को व्यवस्थित करते हुए समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने के लिए परिचालित किया जाएगा। वर्तमान देश में आई नई राजनीतिक चेतना और लहर को आत्मसात करते हुए शैक्षिक वातावरण विकसित करूंगा। विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार संचालन की योजना है। परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से तकनीकी-मैत्री और डिजिटल बनाना मेरा मुख्य लक्ष्य है, जो परिणाम प्रकाशन में देरी को रोकेगा। विश्वविद्यालय के शैक्षिक कैलेंडर को व्यवस्थित करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार कैलेंडर को ‘सिंकनाइज़’ कर कड़ाई से लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए केवल छात्र शुल्क और सरकारी अनुदान पर निर्भर न होने का प्रबंध किया जाएगा। हमने अक्षय कोष की अवधारणा प्रस्तुत की है। हमारी डायस्पोरा और पूर्व छात्रों को समेटते हुए दीर्घकालीन विकास के लिए कोष स्थापित किया जाएगा।

विश्वविद्यालय में होने वाले राजनीतिक हस्तक्षेप और बंद-हड़ताल की व्यवस्थित कैसे होगी? उन्होंने कहा, ‘राजनीति अपने आप में बुरी नहीं है, लेकिन विश्वविद्यालय के अंदर स्वार्थपरक राजनीति संस्थान को नुकसान पहुंचा रही है। दलीय राजनीति और स्वार्थपरक राजनीति को कर्मचारी स्तर से लेकर संकाय स्तर तक रोकने की नीति लागू करूंगा। नई राजनीतिक चेतना को आत्मसात करते हुए वैचारिक वातावरण का निर्माण करूंगा। दलीय राजनीति के प्रभाव से ऊपर उठकर कार्य करूंगा।’

केन्द्रीय कार्यालय गोठगाउँ है या विराटनगर इस बारे में अभी भ्रम है, इस पर उन्होंने कहा, ‘इसमें कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। पूर्वाञ्चल विश्वविद्यालय का केन्द्रीय कार्यालय और पदाधिकारियों का कार्यक्षेत्र गोठगाउँ ही है। विराटनगर में केवल कुछ संपर्क कार्यालय और परीक्षा इकाइयां हैं। इस विषय में भ्रम न हो।’

अंतिम सवाल में, ‘पदाधिकारियों की नियुक्ति में राजनीतिक हिस्सेदारी होती थी, आपकी नियुक्ति प्रक्रिया कैसी रही?’ प्रा.डा. मरहट्टा ने उत्तर दिया, ‘मैं जिस विधि और प्रक्रिया से आया हूँ वह पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित है। मेरी योग्यताएं और अनुभव सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध हैं। विश्वविद्यालय के अंदर भी मैं यही मेरिटोक्रेसी (पारदर्शिता और क्षमता आधारित) प्रणाली स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ। जिससे मैंने मार्ग अपनाया है, वही प्रणाली विश्वविद्यालय में भी लागू करूंगा।’

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