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विद्युत प्राधिकरण की अक्षमता से 1 हजार मेगावाट से अधिक बिजली हुई बर्बाद

समाचार सारांश

संपादकीय समीक्षा की गई।

  • नेपाल विद्युत् प्राधिकरण के प्रसारण पूर्वाधार की कमी और कमजोर प्रबंधन के कारण बरसात के मौसम में 1 हजार मेगावाट से अधिक बिजली बर्बाद हुई है।
  • स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों के संगठन नेपाल के उपाध्यक्ष प्रकाश दुलाल ने प्राधिकरण के एकाधिकार के कारण निजी क्षेत्र के प्रवर्द्धकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, इसका आरोप लगाया है।
  • ऊर्जा क्षेत्र की समस्याओं को सुलझाने के लिए विद्युत् प्राधिकरण को उत्पादन, प्रसारण, वितरण और व्यापार के रूप में अलग-अलग स्वायत्त कंपनियों में पुनर्गठन करने की मांग उठ रही है।

28 असार, काठमाडौं । नेपाल विद्युत् प्राधिकरण की अक्षमता के कारण देश में उत्पादित 1 हजार मेगावाट से अधिक बिजली खराब हो गई है।

प्राधिकरण ने प्रसारण पूर्वाधार की कमी और खपत से अधिक उत्पादन हो रहा है, इस वजह से 1 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत परियोजनाओं से बिजली नहीं खरीदी है।

नेपाल में जलविद्युत क्षमता बढ़ रही है, लेकिन उत्पादित बिजली का उचित प्रबंधन न होने के कारण बरसात के मौसम में निजी क्षेत्र के प्रवर्द्धकों को बड़ी हानि उठानी पड़ रही है।

अभी उत्पादन हो सकने वाले सभी विद्युत प्रणालियों को जोड़ पाने में असमर्थता के कारण विद्युत प्राधिकरण स्वयं और अपनी सहायक कंपनियों द्वारा उत्पादित बिजली को ही प्राथमिकता दी जाती है। निजी क्षेत्र के उत्पादकों की बिजली खपत के आधार पर ही उत्पादन सीमित करना पड़ता है।

प्राधिकरण ने प्रसारण लाइन न बनने, सबस्टेशन की क्षमता न होने, ग्रिड में समस्या और मांग से अधिक बिजली उत्पादन होने के कारण निजी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं को उत्पादन घटाने के निर्देश देना शुरू किया है।

ऊर्जा उत्पादकों ने बताया कि प्राधिकरण ने ‘कन्टिन्जेन्सी’ स्थिति में रहने वाली जलविद्युत परियोजनाओं को आवश्यकतानुसार उत्पादन घटाने का निर्देश दिया है।

प्राधिकरण प्रसारण लाइन और सबस्टेशन की कमी के कारण पूर्ण क्षमता से संचालन न कर पाने वाली परियोजनाओं को ‘‘कन्टिन्जेन्सी’’ (आपातकालीन) में रखता है।

कम बिजली खपत और ज्यादा उत्पादन तथा प्रसारण लाइन और सबस्टेशन क्षमता की कमज़ोरी के कारण हर साल बरसात के मौसम में प्राधिकरण आपातकालीन स्थिति में परियोजनाओं को उत्पादन घटाने के निर्देश देता है।

स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादकों के संगठन नेपाल (इप्पान) के उपाध्यक्ष प्रकाश दुलाल ने कहा कि नेपाल के ऊर्जा बाजार में विद्युत प्राधिकरण का ‘खरीददार का एकाधिकार’ है, जिससे निजी क्षेत्र में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हुई हैं।

इप्पान के अनुसार इस समय 30 से अधिक परियोजनाएं कन्टिन्जेन्सी में हैं। प्राधिकरण प्रसारण और सबस्टेशन क्षमता को देखते हुए विभिन्न स्थानों की परियोजनाओं को उत्पादन घटाने के निर्देश देता है।

मर्स्याङ्दी करिडोर प्रसारण लाइन की कमी के कारण दोर्दी–1, माथिल्लो दोर्दी ‘ए’, चेपे खोला, दोर्दी खोला, सुपर दोर्दी, न्यादी खोला जैसी परियोजनाएं कन्टिन्जेन्सी में हैं, इप्पान ने बताया।

वर्तमान में नेपाल की अंदरूनी खपत, भारत और बांग्लादेश में निर्यात सहित अधिकतम विद्युत खपत लगभग 3,200 मेगावाट है। राष्ट्रीय ग्रिड में जुड़ी क्षमता लगभग 4,400 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। लेकिन लगभग 900 से 1,000 मेगावाट बिजली खराब हो रही है, उपाध्यक्ष दुलाल ने बताया।

उत्पादित बिजली खरीदने वाला निकाय केवल प्राधिकरण है, इसलिए समस्या उत्पन्न हो रही है, दुलाल ने कहा।

दुलाल ने कहा, ‘आर्थिक सिद्धांत के अनुसार जहां बहुत से उत्पादक लेकिन एक ही खरीददार हो, वहां बाजार में खरीददार का पूर्ण नियंत्रण होता है, यानी एक प्रकार की तानाशाही। नेपाल में बिजली उत्पादन करने वाले कई निजी प्रवर्द्धक हैं, लेकिन खरीददार केवल प्राधिकरण है, इसलिए प्राधिकरण चाहे तो निजी क्षेत्र की बिजली प्रवाह रोक सकता है और प्रवर्द्धक समस्याओं में पड़ जाते हैं।’

विद्युत प्राधिकरण के प्रवक्ता राजन ढकाल ने बताया कि बिजली की आपूर्ति खपत के आधार पर ही होती है। उन्होंने कहा, ‘सिस्टम स्थिरता बनाए रखने के लिए बिजली उत्पादन घटाना एक निरंतर प्रक्रिया है। कभी बढ़ती है, कभी घटती है, इसलिए प्राधिकरण उत्पादन घटाने के निर्देश भी देता है, लेकिन कभी अत्यधिक कम करने को नहीं कहता।’

विद्युत् की मांग और खपत के प्रबंधन के लिए कभी उत्पादन बढ़ाने और कभी घटाने की प्रक्रिया सामान्य बनी हुई है, उन्होंने कहा।

समझौतों में कमियाँ और ‘टेक एंड पे’ बाध्यता

विद्युत क्रय समझौते (PPA) में ‘टेक या पे’ प्रावधान के बावजूद कनेक्शन एग्रीमेंट (प्रसारण लाइन समझौता) की विभिन्न शर्तों के कारण प्रवर्द्धकों को क्षतिपूर्ति नहीं मिली है, दुलाल ने दावा किया।

प्राधिकरण क्रॉस-बॉर्डर प्रसारण लाइन (जैसे ढल्केबर–मुजफ्फरपुर, बुटवल–गोरखपुर आदि) और देश के अंदरूनी प्रसारण लाइनों को समय पर नहीं बना पाया, इसलिए कन्टिन्जेन्सी क्लॉज का उपयोग करते हुए ‘टेक एंड पे’ को व्यावहारिक रूप से ‘केवल लेने पर भुगतान’ में बदल दिया।

अंदरूनी प्रसारण लाइनों की कमजोरी और क्षमता की कमी के कारण दोर्दी करिडोर समेत कई परियोजनाओं की बिजली कन्टिन्जेन्सी में डालकर कटौती की जाती है, उन्होंने बताया।

विद्युत प्राधिकरण स्वयं उत्पादक, प्रसारणकर्ता, वितरक और प्रणाली संचालक भी है। आपातकालीन हालात में सुरक्षा कारणों से या प्रसारण लाइन में समस्या आने पर प्राधिकरण बिजली को बंद करने के निर्देश दे सकता है।

लेकिन बाजार में मांग न होने या अपनी परियोजनाओं को पूर्ण क्षमता पर संचालित करने के लिए प्राधिकरण तकनीकी समस्या बताकर निजी क्षेत्र की बिजली बंद करवा रहा है, दुलाल ने आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘प्राधिकरण स्वयं उत्पादक और प्रणाली संचालक होने से स्वार्थों का टकराव होता है। यदि प्रसारण और व्यापार के लिए अलग स्वतंत्र निकाय होते तो वे प्राधिकरण के लाभ-हानि से परे निजी क्षेत्र की बिजली को उचित स्थान दे पाते।’

पूर्वाधार की कमजोरी और गुणवत्ता संबंधी प्रश्न

बरसात के मौसम में तराई क्षेत्र में गर्मी बढ़ने से पंखे और एयर कंडीशनर की मांग अधिक होती है, वहीं एलपीजी गैस के विकल्प के रूप में इंडक्शन चुल्हा का उपयोग भी बढ़ा है। लेकिन ट्रांसफॉर्मर की कम क्षमता, कमजोर कंडक्टर और पुरानी प्रसारण संरचना के कारण अक्सर सूचित या अनसूचित लोडशेडिंग होती है।

प्रवर्द्धकों ने बताया कि वे सबस्टेशन तक प्रसारण लाइन जरूर बिछाते हैं, लेकिन उससे आगे की पूर्वाधार मजबूत न होने के कारण उत्पादित बिजली बर्बाद हो रही है। इसके अलावा पहले ट्रांसफॉर्मर खरीद में हुए अनियमितताओं और खराब गुणवत्ता के कारण ट्रांसफॉर्मर फटने तथा बिजली कटौती की समस्याएं पुनः सामने आई हैं।

ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा समस्याओं का समाधान विद्युत प्राधिकरण के पुनर्गठन के बिना संभव नहीं है, दुलाल ने कहा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण को उत्पादन, प्रसारण, वितरण और व्यापार के रूप में अलग-अलग स्वायत्त कंपनियों में विभाजित किया जाना चाहिए।

‘जब तक व्यापार और प्रसारण लाइन का प्रबंधन तटस्थ निकाय नहीं करेगा, तब तक निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादित बिजली की सुनिश्चितता नहीं होगी,’ दुलाल ने जोर दिया।

साथ ही विद्युत नियमन आयोग जैसे नियामक निकायों को मजबूत और सक्रिय बनाने तथा निजी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी उन्होंने जताई।