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फ्रेंच ओपन की पीड़ा से विम्बलडन की शान तक: सिन्नर का शानदार वापसी सफर

समाचार सारांश

  • विश्व नंबर एक खिलाड़ी यानिक सिन्नर ने जर्मनी के अलेक्जेंडर जेवरीव को हराकर लगातार दूसरी बार विम्बलडन टेनिस खिताब जीता है।
  • फ्रेंच ओपन में निराशाजनक हार के बाद उन्होंने खुद को पुनः स्थापित करते हुए अपने करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया।
  • ट्रॉफी जीतने के बाद सिन्नर ने कहा, ‘पेरिस के बाद यह खिताब मेरे लिए बेहद खास है।’

२९ जून, काठमांडू। एक महीने पहले फ्रेंच ओपन में मिली अप्रत्याशित हार ने यानिक सिन्नर के आत्मविश्वास को गहरा झटका दिया था, लेकिन विश्व नंबर एक खिलाड़ी ने इस कमजोरी को मात देकर आगे बढ़ना चुना।

उन्होंने इसी निराशा से उभरकर लगातार दूसरी बार विम्बलडन का खिताब जीतते हुए एक बार फिर विश्व टेनिस के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी होने का सबूत दिया।

फाइनल में जर्मन खिलाड़ी अलेक्जेंडर जेवरीव को चार सेट में ३-१ से हराते हुए २४ वर्षीय इतालवी स्टार सिन्नर ने अपने करियर का पांचवां ग्रैंड स्लैम खिताब हासिल किया। वह ओपन युग में लगातार दो बार विम्बलडन जीतने वाले दसवें पुरुष खिलाड़ी बने।

यह खिताब सिन्नर के लिए सिर्फ एक और ग्रैंड स्लैम नहीं, बल्कि फ्रेंच ओपन में मिली कष्टदायक हार का भी जवाब था।

फ्रेंच ओपन में उन्होंने दो सेट और निर्णायक सेट में ५-१ की बढ़त बनाए रखते हुए भी अर्जेंटीना के जुआन मैनुएल सेरुंडोलो के खिलाफ हार का सामना किया था। उन्होंने लगातार दो वर्षों से पेरिस में यह दुखद हार झेली थी।

विम्बलडन में भी उनका सफर आसान नहीं था। पहले राउंड में मीयोमिर केकमानोविच के खिलाफ पांच सेट तक संघर्ष करना पड़ा। यदि वह यह मैच हार जाते तो सिन्नर लगातार तीसरे मौजूदा पूर्व विजेता के रूप में पहले दौर में बाहर हो जाते।

लेकिन उसी कठिन जीत के बाद वह अपनी लय में वापस आए और लगातार पांच मैच सीधे सेट में जीतते हुए फाइनल तक पहुंचे। सेमीफाइनल में उन्होंने २४ बार के ग्रैंड स्लैम विजेता नोवाक जोकोविच को एकतरफा तरीके से हराया।

फाइनल में जेवरीव के खिलाफ शुरुआती सेट हारने के बाद सिन्नर दबाव में थे, पर उन्होंने संयम नहीं खोया और निर्णायक मोड़ पर उत्कृष्ट रिटर्न खेलते हुए ब्रेक लेकर जीत सुनिश्चित की।

खिताब जीतने के बाद सिन्नर ने फ्रेंच ओपन की पीड़ा को याद करते हुए कहा, ‘पेरिस के बाद यह खिताब मेरे लिए बेहद खास है। वहां की हार के बाद यहां प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए बहुत मेहनत की।’

सिन्नर के कोच डेरेन काहिल ने भी हार के बाद मजबूत होकर लौटने की क्षमता को खेल का सबसे बड़ा जीवनसाथी बताया।

‘उन्होंने कई कठिन हार देखीं, लेकिन वे उन्हें रोक नहीं सकीं। वे हर असफलता के बाद और भी मजबूत होकर लौटते हैं,’ काहिल ने कहा।

इस वर्ष सिन्नर का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने ४७ में से ४४ मैच जीते हैं। पिछले साल विम्बलडन जीत के बाद से ८३ में से ७७ मैचों में सफलता हासिल की है।

विम्बलडन खिताब के साथ ही सिन्नर ने विश्व नंबर एक की अपनी स्थिति और मजबूत की है। हालांकि फाइनल हारने के बावजूद जेवरीव सोमवार से चोटिल कार्लोस अल्कराज को पीछे छोड़कर विश्व नंबर दो की रैंकिंग पर पहुंच जाएंगे।

पूर्व विम्बलडन विजेता मारीयन बार्टोली ने सिन्नर के खेल को नोवाक जोकोविच के समान स्तर का बताया।

‘दबाव सहने की शैली, जरूरी समय पर असाधारण फुर्तीली खेल तकनीक और कठिन परिस्थितियों में जीत हासिल करने की क्षमता देखकर लगता है कि सिन्नर आने वाले १०-१५ वर्षों में नए नोवाक जोकोविच बन सकते हैं,’ उन्होंने कहा।