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अपूरो सूचना, समन्वय अभाव – Online Khabar

अपर्याप्त सूचना और समन्वय की कमी

समाचार सारांश में की गई संपादकीय समीक्षा के अनुसार, जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के संबंध में सुरक्षा निकायों के बीच पर्याप्त सूचना उपलब्ध न होने का संकेत जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दिए गए बयानों में जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी से जुड़ी सूचनाओं में असंगतता उजागर हुई है। २३ और २४ भदौ को हुई घटनाओं में सुरक्षा निकायों के बीच समन्वय की गंभीर कमी देखी गई है। ११ चैत्र, काठमांडू। गत २३ और २४ भदौ को सम्पन्न जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के बारे में सुरक्षा निकायों के बीच पर्याप्त सूचना साझा नहीं होने की स्थिति जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सूचना संग्रहण की प्रमुख जिम्मेदारी निभाने वाले राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग से लेकर नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस और नेपाली सेना तक सभी में आवश्यक सूचनाओं के अभाव का बड़ा दोष पाया गया है। सुरक्षाकर्मियों के बयानों और घटनाओं के विवरणों में जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी के बारे में विभिन्न भिन्न जानकारियाँ मिली हैं। पुलिस अधिकारियों के बीच भी आंदोलन की तैयारी को लेकर मिली सूचनाओं में उल्लेखनीय विरोधाभास रहा है। तत्कालीन आईजीपी चन्द्रकुवेर खापुङ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन होने की जानकारी दी थी। वहीं, तत्कालीन एआईजी और वर्तमान आईजीपी दानबहादुर कार्की ने रेडिट, डिस्कॉर्ड, एक्स जैसे सोशल नेटवर्किंग साइटों पर हुई चर्चाओं की सूचना मिलने की बात कही है। कार्की ने बयान में कहा, “जेएनजीआइ द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रेडिट, डिस्कॉर्ड, एक्स जैसे सोशल प्लेटफॉर्म्स की सूचना निगरानी करते हुए जिला सुरक्षा समिति की बैठक में सुरक्षा योजना पारित की गई और ४,३९६ पुलिस कर्मी परिचालित किए गए।” कार्य विभाग के तत्कालीन एआईजी सिद्धीविक्रम शाह ने भी टिकटक, फेसबुक, रिल्स, डिस्कॉर्ड जैसे माध्यमों पर जेएनजीआइ आंदोलन संबंधी सूचनाएँ तीव्र गति से फैलने पर तत्कालीन आईजीपी को जानकारी दी। काठमांडू उपत्यका पुलिस कार्यालय की रानीपोखरी शाखा के तत्कालीन कार्यवाहक प्रमुख डीआईजी ओम राना ने कहा कि आंदोलन की प्रकृति की उम्मीद से भिन्न थी। काठमांडू के तत्कालीन एसएसपी विश्व अधिकारी ने पूर्व सूचना अनुमान लगाने में असमर्थता व्यक्त की। २०७९ भदौ २२ को केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के निष्कर्ष के अनुसार प्रदर्शनकारियों की संख्या ३ हजार से ५ हजार के बीच अनुमानित की गई थी। उन्होंने पूर्व सूचना के विश्लेषण में कमजोरियां होने को भी स्वीकार किया। शांतिपूर्ण आंदोलन की उम्मीद में २३ भदौ को राष्ट्रीय सभागार में राष्ट्रपति के संबोधन की तैयारी की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने यह उम्मीद जताई थी कि जेएनजीआइ आंदोलन सामान्य रहेगा और अधिकतम ५ हजार लोग भाग लेंगे। जबकि नेपाली सेना के प्रधानसेनापति का मत इससे अलग था। २२ भदौ को हुई केंद्रीय सुरक्षा समिति की बैठक के संदर्भ में प्रधानसेनापति अशोकराज सिग्देल ने कहा, “राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग और अन्य सुरक्षा निकायों ने आंदोलन के बड़े स्तर पर होने की जानकारी दी थी।” हालांकि, उसी समय राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक नहीं हुई थी। प्रधानसेनापति के बयान के बावजूद राष्ट्रीय अनुसन्धान विभाग के तत्कालीन प्रमुख हुतराज थापाले विपरीत जानकारी दी। थापाले कहा कि प्रदर्शनकर्ताओं की संख्या अनुमानित रूप से ३,५०० से ५,००० के बीच थी। ये सभी बयान दर्शाते हैं कि राज्य की सुरक्षा संरचना में सूचना संग्रहण के क्षेत्र में गंभीर कमी थी तथा जेएनजीआइ आंदोलन की तैयारी को लेकर सुरक्षाकर्मियों के बीच सूचना असामान्य और अपकृत थी। इससे आंदोलन का स्पष्ट विश्लेषण, रणनीतिक योजना बनाना और फिल्ड ऑपरेशन को सफलतापूर्वक संचालित करने में असमर्थता प्रकट हुई। अपर्याप्त सूचनाओं की स्थिति में सुरक्षा निकायों के बीच २३ और २४ भदौ की घटनाओं में समन्वय का अभाव चरम पर था। सुरक्षाकर्मी के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं। काठमांडू के तत्कालीन एसएसपी विश्व अधिकारी ने कहा, “नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस के बीच टैक्टिकल मूवमेंट में कभी-कभी समयांतराल होता था और कमांड क्लियरेंस प्रक्रिया समन्वय में बाधाएं उत्पन्न करती थी।” नेपाली सेना ने यदि स्थिर ड्यूटी संभाली होती तो पुलिस भीड़ नियंत्रण में पूरी तरह केंद्रित हो सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संसद भवन परिसर में आंदोलन नियंत्रित करने के लिए लगाए गए विशेष कार्यदल के तत्कालीन एसपी ऋषिराम कँडेल ने सुरक्षा निकायों के बीच समन्वय कम रहने की बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “२३ भदौ को सशस्त्र पुलिस अपनी नजदीक होने के बावजूद अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा सकी और २४ भदौ को नेपाली सेना के १०-१२ सदस्यों का दल पुलिस महानिरीक्षक के गेट पर आक्रमण बढ़ने के बाद तटस्थ रहना पड़ा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में समन्वय की कमजोरी स्पष्ट हुई।” काठमांडू के अन्य एसपी अपिलराज बोहरे ने भी सशस्त्र पुलिस बल और सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “एपीएफ और सेना ने अंतिम क्षणों में ही भागीदारी जताई लेकिन दोनों सुरक्षा निकायों से अपेक्षित व्यावसायिक सहयोग, संयंत्रगत प्रतिक्रिया और सामूहिक समन्वय नहीं दिखा।” समन्वय की कमी के मद्देनजर प्रधानसेनापति सिग्देल ने समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “२३ भदौ को संसद भवन क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति जटिल हो गई थी, इसलिए पूर्व निर्णय के अनुसार अन्य सुरक्षा निकायों के साथ समन्वय कर आवश्यक सुरक्षा तैयारी करने का निर्देश दिया है।”

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