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भाषण में सीमित बजट के महत्वपूर्ण घोषणाएँ

आर्थिक वर्ष २०८२/८३ में सरकार को विनियोजित कुल बजट का केवल ८०.५५ प्रतिशत ही खर्च करने में सफलता मिली है। पूंजीगत खर्च का लक्ष्य ४६.७९ प्रतिशत तक सीमित रहने के कारण कई रणनीतिक और बड़े परियोजनाओं की घोषणाएँ केवल कागज तक ही सीमित रह गईं। सरकार मल कारखाना, निजगढ विमानस्थल और सुकुम्वासी प्रबंधन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं में ठोस प्रगति नहीं कर सकी। १ साउन, काठमाडौं। आर्थिक वर्ष २०८२/८३ के अंतिम दिन (असार ३२) तक सार्वजनिक खर्च के सभी संकेतक निराशाजनक रहे। सरकार इस वर्ष कुल विनियोजित राशि का आधा भी विकास खर्च नहीं कर सकी। महालेखा नियन्त्रक कार्यालय के ३२ असार तक के आंकड़ों के अनुसार पूंजीगत खर्च केवल ४६.७९ प्रतिशत रहा। इस वर्ष सरकार ने ४ खर्ब ७ अरब ८८ करोड पूंजीगत खर्च का लक्ष्य रखा था, हालांकि आर्थिक वर्ष के अंतिम दिन तक सिर्फ १ खर्ब ९० अरब ८४ करोड विकास खर्च हुआ। इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने कुल १९ खर्ब ६४ अरब ११ करोड रुपये का बजट प्रस्तावित किया था। कुल खर्च लक्ष्य का ८०.५५ प्रतिशत ही हुआ, अर्थात् ३२ साउन तक १५ खर्ब ८२ अरब १६ करोड रुपये का खर्च किया गया। चालू खर्च १० खर्ब ४३ अरब ९९ करोड रुपये था, जो लक्ष्य का ८८.४ प्रतिशत है, जबकि चालू बजट विनियोजन ११ खर्ब ८० अरब ९८ करोड रुपये था। पिछले वर्ष का बजट तीन अर्थ मंत्रियों द्वारा संचालित किया गया। बजट प्रस्तुति तत्कालीन अर्थ मंत्री विष्णुप्रसाद पौडेल ने की थी। २३ और २४ भदौ के आन्दोलन के बाद अर्थविद रामेश्वर खनाल अर्थ मंत्रालय संभाले। २१ फागुन के चुनाव के बाद गठित शक्तिशाली सरकार के अर्थ मंत्री डा. स्वर्णिम वाग्ले हैं। दो अर्थ मंत्रियों द्वारा कार्यान्वित बजट से सरकार प्रारंभिक सुधार के संकेत तक दिखाने में असफल रही। लेकिन अर्थ मंत्री वाग्ले ने चालू वर्ष में विकास खर्च की दयनीय स्थिति को दोहराने से इनकार किया है। वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में खर्च लक्ष्य का ९२.५६ प्रतिशत खर्च हुआ। कुल ३ खर्ब ७५ अरब २४ करोड के लक्ष्य में ३ खर्ब ४७ अरब ३३ करोड रुपये खर्च हुए। सरकार ने बजट के अर्धवार्षिक समीक्षा के माध्यम से कुल खर्च ८५.९६ प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। चालू खर्च ११ खर्ब २५ अरब ९७ करोड और पूंजीगत खर्च २ खर्ब ४३ अरब ३० करोड तक पहुंचाने का लक्ष्य था। वित्तीय प्रबंधन से ३ खर्ब १९ अरब खर्च लक्ष्य से ऊपर रहा। अर्धवार्षिक समीक्षा में कुल बजट खर्च १६ खर्ब ८८ अरब ३२ करोड तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया।